भारत

जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट का नाम बदला, अधिसूचना जारी

केंद्रशासित प्रदेश जम्मू कश्मीर और केंद्रशासित लद्दाख संयुक्त हाईकोर्ट का नाम बदलकर अब जम्मू कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट कर दिया गया है. जम्मू और कश्मीर के उपराज्यपाल, लद्दाख के उपराज्यपाल और हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से इस प्रस्ताव पर विचार मांगे गए थे, जिसके बाद कोई आपत्ति नहीं होने के बाद इस संबंध में अधिसूचना जारी की गई.

जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट. (फोटो साभार: फेसबुक)

नई दिल्लीः केंद्रशासित प्रदेश जम्मू कश्मीर और केंद्रशासित प्रदेश लद्दाख संयुक्त हाईकोर्ट का नाम बदलकर अब जम्मू कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट कर दिया गया है. इस संबंध में शुक्रवार को अधिसूचना जारी की गई.

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने नाम में बदलाव को प्रभावी करने के लिए जम्मू कश्मीर पुनर्गठन (कठिनाइयों का निवारण) आदेश 2021 पर हस्ताक्षर किए.

इस आदेश को कानून मंत्रालय के न्याय विभाग ने शुक्रवार को अधिसूचित किया.

आदेश में कहा गया कि जम्मू कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम 2019 को जम्मू कश्मीर राज्य को केंद्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर और केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में पुनर्गठित करने के लिए बनाया गया था.

आदेश में यह इंगित किया गया है कि कानून में घोषणा की गई कि जम्मू कश्मीर का उच्च न्यायालय ‘केंद्रशासित प्रदेश जम्मू कश्मीर और केंद्रशासित प्रदेश लद्दाख के लिए साझा उच्च न्यायालय’ होगा.

आदेश में कहा गया, ‘हाईकोर्ट का मौजूदा नाम काफी लंबी और जटिल है. है. इसकी जगह इसे जम्मू कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट कहा जा सकता है, जो सुविधाजनक होने के अलावा अन्य सामान्य हाईकोर्ट की तरह सरल है. इसका नाम पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के पैटर्न में रखा गया है, जिसका अधिकार क्षेत्र पंजाब और हरियाणा राज्य और केंद्रशासित प्रदेश चंडीगढ़ है.’

केंद्रशासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर के उपराज्यपाल, केंद्रशासित प्रदेश लद्दाख के उपराज्यपाल और हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से प्रस्ताव पर विचार मांगे गए थे.

केंद्रशासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर के उपराज्यपाल ने 27 अक्टूबर, 2020 के पत्र के माध्यम से और केंद्रशासित प्रदेश लद्दाख के उपराज्यपाल ने 20 अक्टूबर, 2020 के पत्र के जरिये हाईकोर्ट के प्रस्तावित नाम में बदलाव को लेकर अपनी सहमति जताई थी.

आदेश में कहा गया, केंद्रशासित प्रदेश जम्मू कश्मीर और केंद्रशासित प्रदेश लद्दाख संयुक्त हाईकोर्ट के तत्कालीन चीफ जस्टिस ने 21 नवंबर 2020 को पत्र के जरिये प्रस्तावित नाम को लेकर कोई आपत्ति नहीं जताई थी.

(समाचार एजेंसी पीटीआई से इनपुट के साथ)