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भारत अब भी कारोबार के लिए चुनौतीपूर्ण स्थान, नौकरशाही बाधाओं को कम करे: अमेरिका

अमेरिकी विदेश विभाग ने बुधवार को जारी अपनी रिपोर्ट ‘2021 इन्वेस्टमेंट क्लाइमेट स्टेटमेंट्सः इंडिया ‘में जम्मू कश्मीर के विशेष संवैधानिक दर्जे को समाप्त करने और नागरिकता संशोधन क़ानून पारित करने का भी उल्लेख किया है.

(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

नई दिल्लीः अमेरिका का कहना है कि भारत व्यापार के लिए अभी भी चुनौतीपूर्ण स्थान बना हुआ है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका ने भारत से निवेश के लिए नौकरशाही बाधाओं को कम कर आकर्षक और विश्वसनीय निवेश माहौल को बढ़ावा देने का आग्रह किया.

अमेरिकी विदेश विभाग ने बुधवार को जारी अपनी रिपोर्ट ‘2021 इन्वेस्टमेंट क्लाइमेट स्टेटमेंट्सः इंडिया’ में कहा है कि भारत कारोबार के लिए चुनौतीपूर्ण स्थान बना हुआ है.

रिपोर्ट में जम्मू कश्मीर के विशेष संवैधानिक दर्जे को समाप्त करने और नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) को पारित करने का भी उल्लेख किया है.

रिपोर्ट में कहा गया, ‘बढ़े हुए टैरिफ, प्रतिस्पर्धी विकल्पों को सीमित करने वाले खरीद नियम, स्वच्छता और फाइटोसैनिटेरी उपायों सहित नए संरक्षणवादी कदम और अंतरराष्ट्रीय मानकों के विपरीत भारतीय विशिष्ट मानकों के जरिए वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला से उत्पादक बाहर हो गए हैं और द्विपक्षीय कारोबार का विस्तार सीमित हो गया है.’

विदेश विभाग ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) सरकार के दूसरे कार्यकाल के शुरुआती 100 दिनों में दो विवादित फैसले हुए.

जम्मू कश्मीर से विशेष संवैधानिक दर्जे को समाप्त करना और सीएए पारित करना. भारत का कहना हे कि सीएए उसका आंतरिक मामला है और भारत की संप्रभुता से संबंधित मामलों पर किसी भी विदेशी पक्ष का कोई अधिकार नहीं है.

भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को बताया है कि जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 को समाप्त करना उसका आंतरिक मामला है.

विदेश विभाग का कहना है कि विरोध प्रदर्शन सीएए के पारित होने के बाद शुरू हुए और मार्च 2020 में कोविड-19 के शुरू होने और राष्ट्रीय लॉकडाउन की घोषणा के साथ ही समाप्त हो गए.

रिपोर्ट में कहा गया कि दिसंबर 2020 तक आर्थिक गतिविधियों में गिरावट सहित कोविड-19 का प्रबंधन 2020 में प्रमुख मुद्दा बना.

रिपोर्ट कहती है कि भाजपा सरकार को कोविड-19 के मामले बढ़ने पर उससे निपटने के तरीके को लेकर आलोचनाओं का सामना करना पड़ा.

विदेश विभाग ने कहा कि कोविड-19 महामारी से पैदा हुई आर्थिक चुनौतियां और राष्ट्रीय लॉकडाउन से निपटते हुए भारत ने व्यापक सामाजिक कल्याण और आर्थिक प्रोत्साहन कार्यक्रम लागू किया और बुनियादी ढांचे और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर खर्च बढ़ाया.

रिपोर्ट में कहा गया, ‘सरकार ने फार्मास्यूटिकल्स, ऑटोमोबाइल, टेक्सटाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य क्षेत्रों में मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए उत्पादन से जुड़े प्रोत्साहनों को भी अपनाया. इन कदमों से भारत को अप्रैल 2020 और मार्च 2021 के बीच सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में लगभग आठ फीसदी की गिरावट से उबरने में मदद मिली.’

रिपोर्ट में कहा गया कि भारत सरकार अभी भी विदेशी निवेश के लिए सक्रिय तौर पर जोर दे रहा है. फरवरी 2021 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक महत्वाकांक्षी निजीकरण कार्यक्रम के जरिए जरिये 2.4 अरब डॉलर जुटाने की योजनाओं का ऐलान किया था.

रिपोर्ट कहती है कि मार्च 2021 में संसद ने भारत में बीमा सेक्टर में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) सीमा 49 फीसदी से बढ़ाकर 74 फीसदी कर दी थी.