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कृषि कानूनों के विरोध में किसान आंदोलन के दौरान 220 किसानों की मौत हुईः पंजाब सरकार

केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने संसद में एक सवाल के जवाब में कहा है कि केंद्र के तीन नए कृषि का़नूनों के ख़िलाफ़ नवंबर 2020 से दिल्ली की सीमाओं पर आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले किसानों का सरकार के पास कोई रिकॉर्ड नहीं है. वहीं किसान आंदोलन की अगुवाई कर रहे संयुक्त किसान मोर्चा का कहना है कि अब तक तक़रीबन 400 किसानों की मौत हो चुकी है.

द (फोटो: पीटीआई)

जालंधरः केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर ने शुक्रवार को कहा था कि केंद्र के पास नए कृषि कानूनों के विरोध में किसानों के मौजूदा प्रदर्शन के दौरान आंदोलनकारियों की मौत का कोई रिकॉर्ड नहीं है.

हालांकि केंद्र सरकार की ओर से दिए गए इस बयान के विपरीत पंजाब सरकार ने किसान आंदोलन के दौरान किसानों की मौत का आंकड़ा पेश किया है. पंजाब सरकार ने राज्य के ऐसे 220 किसानों/किसान मजदूरों की मौत की पुष्टि की है. इसके साथ ही राज्य सरकार ने कहा है कि इन सभी मृतकों के परिजनों को 10.86 करोड़ रुपये का मुआवजा भी दिया गया है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, पंजाब सरकार के इन आंकड़ों से पता चलता है कि 20 जुलाई तक 220 किसानों/किसान मजदूरों की मौत की पुष्टि हुई है. इन 220 में से 203 मृतक (92 फीसदी) किसान/किसान मजदूर राज्य के मालवा क्षेत्र से थे, जबकि 11 (पांच फीसदी) मौतें माझा और छह (2.7 फीसदी) दोआबा क्षेत्र से हुई हैं.

दूसरी तरफ  संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान 400 किसानों की मौत हुई है. पंजाब सरकार के सूत्रों का कहना है कि अभी इस मामले में और मौतों की पुष्टि की जा रही है.

राज्य सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, सबसे अधिक किसानों/किसान मजदूरों की मौतें संगरूर जिले से हुई हैं, जहां बीते आठ महीनों में 43 लोगों की मौत हुई है. सरकार ने हर मामले में पांच-पांच लाख रुपये के मुआवजे को मंजूरी भी दी है. कुल मिलाकर 2.13 करोड़ रुपये पहले ही जिले के पीड़ित परिवारों को दिए जा चुके हैं.

इस मामले में दूसरी सर्वाधिक 33 मौतें बठिंडा जिले से हुई हैं और सरकार ने मृतक किसानों के परिजनों को कुल 1.65 करोड़ रुपये के मुआवजे को मंजूरी दी है.

मोगा में 27 मौतों की पुष्टि हुई है. पटियाला में 25, बरनाला में 17, मानसा में 15, मुक्तसर साहिब में 14 और लुधियाना में 13 मौतों की पुष्टि हुई है.

फाजिल्का में सात, फिरोजपुर में छह और गुरदासपुर में पांच मौतों की पुष्टि हुई है जबकि अमृतसर और नवांशहर में चार-चार मौतों की पुष्टि हुई है. मोहाली में तीन और तरन तारन में दो मौतें और जालंधर और कपूरथला में एक-एक मौत की पुष्टि हुई है.

सूत्रों का कहना है कि इसके अलावा विभिन्न जिलों से लगभग दो दर्जन और मृतक किसानों की पुष्टि जा रही है और लगभग इन सभी को इस सूची में शामिल किया जा सकता है.

मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने हाल ही में कहा था कि मृतकों के परिवार के एक सदस्य को अनुकंपा के आधार पर रोजगार भी उपलब्ध करा रही है और इसकी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है.

कृषि कानूनों के विरोध में प्रदर्शन के दौरान 18 से 85 हर आयुवर्ग के किसानों की मौत हुई है और यह संख्या 40 से 60 वर्ष आयुवर्ग के बीच सर्वाधिक है.

कृषि संघ भी अपने स्तर पर इन मौतों की जानकारियां इकट्ठा कर रहे हैं और उनके अनुसार अब तक दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान 500 से अधिक किसानों की मौत हो चुकी है, जिनमें से लगभग 85 फीसदी किसान सिर्फ पंजाब से ही हैं.

इन आंकड़ों में कृषि कानूनों के विरोध में स्थानीय तौर पर हुए प्रदर्शनों के दौरान पंजाब में हुई मौतें भी शामिल हैं.

संयुक्त किसान मोर्चा के मुताबिक, इन प्रदर्शनों में कई राज्यों के किसानों की भी मौत हुई है.

बता दें कि कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने शुक्रवार को संसद में जानकारी दी कि केंद्र के तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ वर्ष 2020 से दिल्ली की सीमाओं पर आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले किसानों का सरकार के पास कोई रिकॉर्ड नहीं है.

तोमर ने यह भी कहा कि सरकार ने तीन कृषि कानूनों के बारे में किसानों के मन में आशंकाओं का पता लगाने के लिए कोई अध्ययन नहीं कराया है.

मालूम हो कि केंद्र के नए तीन कृषि कानूनों के विरोध में मुख्य रूप से पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के हजारों किसान बीते  आठ महीने से दिल्ली की सीमाओं (सिंघू, टिकरी और गाजीपुर) पर डेरा डाले हुए हैं. इनमें से 200 किसानों का एक छोटा समूह अब विशेष अनुमति मिलने के बाद मध्य दिल्ली में जंतर मंतर पर किसान संसद के तहत धरना दे रहे हैं.