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दिल्लीः मणिपुर के पत्रकार ने पड़ोसियों पर लगाया उत्पीड़न का आरोप, केस दर्ज

मामला दक्षिण दिल्ली के महरौली इलाके का है. मणिपुर के पत्रकार रोनेंद्र सिंह सपम ने अपनी शिकायत में कहा है कि पूरी तरह तैयार हुए बिना और साज-सज्जा के बग़ैर फ्लैट देने पर बिल्डर के ख़िलाफ़ जब उन्होंने आवाज उठाने की कोशिश की, तब उनके पड़ोसियों ने उन्हें धमकी दी और उत्पीड़न किया.

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

नई दिल्ली: दक्षिण दिल्ली के महरौली में रहने वाले मणिपुर के पत्रकार ने पड़ोसियों के खिलाफ कथित तौर पर उत्पीड़न करने के मामले में प्राथमिकी दर्ज कराई है.

पुलिस ने सोमवार को बताया कि पत्रकार रोनेंद्र सिंह सपम की शिकायत के मुताबिक, बिना पूरी तरह तैयार व साज-सज्जा के बगैर फ्लैट देने पर बिल्डर के खिलाफ जब उन्होंने आवाज उठाने की कोशिश की, तब पड़ोसियों ने उन्हें धमकी दी और उत्पीड़न किया.

सपम के मुताबिक, बीते 25 जुलाई को हाउसिंग सोसायटी ने लिफ्ट खराब होने के मुद्दे पर बैठक बुलाई, लेकिन मामले पर चर्चा के बजाय कुछ स्थानीय लोगों ने उन्हे धक्का दिया और बिल्डर की ओर से धमकी दी.

पुलिस ने कहा कि प्राथमिकी में नामजद तीन लोगों के खिलाफ निषेधात्मक कार्रवाई की गई है और मामले की जांच जारी है.

पुलिस उपायुक्त (दक्षिण) अतुल कुमार ठाकुर ने कहा कि शिकायत में नामजद लोगों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है.

सोमवार को ट्विटर पर पत्रकार ने आरोप लगाया, ‘एक तरफ मणिपुर की मेरी बहनें ओलंपिक में भारत को गौरवान्वित कर रही हैं, यहां दिल्ली में हमारे साथ बाहरियों जैसा बर्ताव किया जा रहा है. मेरे अपने पड़ोसी ने आज मुझे गालियां देते हुए धमकी दी और धक्का दिया. यह आज का नया भारत है, जिसमें हम जी रहे हैं.’

वह टोक्यो ओलंपिक में वेटलिफ्टर मीराबाई चानू और बॉक्सर मैरीकॉम के प्रभावशाली प्रदर्शन के संदर्भ में यह बात कह रहे थे..

उन्होंने अन्य ट्वीट में कहा, ‘कल्पना कीजिए कि जब अखबारों या पोर्टलों में हम ऐसे मामले पढ़ते थे तो सोचते थे कि पूर्वोत्तर के लोगों के साथ इतना बुरा व्यवहार कैसे किया जाता है, लेकिन आज जब यह मेरे साथ हुआ, तो मुझे एहसास हुआ कि हम कितने असहाय हैं. मैं उनका सामना नहीं कर सका और मुझे खड़े होकर उनकी गालियां सुननी पड़ीं!’

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें अपनी पत्नी, जो एक स्वास्थ्य कार्यकर्ता हैं, को अस्पताल छोड़ने की अनुमति नहीं दी गई और पत्नी को पैदल चलकर रिक्शा लेना पड़ा, ताकि वह अपनी रात की ड्यूटी के लिए समय पर पहुंच सकें.

उन्होंने ट्वीट कर कहा, ‘मेरी पत्नी, जो एक स्वास्थ्य कार्यकर्ता है, मेरा इंतजार कर रही थी क्योंकि मुझे उसे अस्पताल ले जाना था (उसकी रात की ड्यूटी के लिए) वह बिना किसी इमरजेंसी के छुट्टी नहीं ले सकती, उसे पैदल चलना पड़ा और रिक्शा लेना पड़ा, ताकि वह काम पर समय से पहुंच सके.’

मामला दर्ज होने के बाद उन्होंने कहा, ‘उम्मीद है कि कुछ न्याय होगा और शांति बनी रहेगी. मेरे मन में किसी के प्रति कोई कठोर भावना नहीं है, लेकिन मैं यह बताना चाहता हूं कि हम भारतीय भी हैं.’

मालूम हो कि पिछले साल मार्च में कोविड 19 महामारी की शुरुआत के समय दिल्ली के विजय नगर इलाके में दिल्ली विश्वविद्यालय से एमफिल कर रही मणिपुर की ही एक युवती को कोरोना कहते हुए उस पर पान थूका गया था. दिल्ली पुलिस ने इस मामले में आरोपी गिरफ्तार कर लिया था.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)