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निगरानी सूची में जेट एयरवेज़, स्पाइसजेट समेत सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के अफसरों के नाम शामिल

पेगासस प्रोजेक्ट: लीक हुए दस्तावेज़ दर्शाते हैं कि पेगासस के ज़रिये संभावित निगरानी के दायरे में रिलायंस की दो कंपनियों, अडाणी समूह के अधिकारी, गेल इंडिया के पूर्व प्रमुख, म्युचुअल फंड से जुड़े लोगों और एयरसेल के प्रमोटर सी. शिवशंकरन के नंबर भी शामिल थे.

बाएं से दाएं- जेट एयरवेज के नरेश गोयल, स्पाईसजेट के अजय सिंह और गेल इंडिया के पूर्व प्रमुख. (फोटो: द वायर/फेसबुक)

नई दिल्ली: सर्विलांसिंग से संबंधित लीक हुई सूची में भारत के विभिन्न क्षेत्र से जुड़े लोगों के नामों का खुलासा होने के बाद अब जेट एयरवेज के संस्थापक और चेयरमैन नरेश गोयल जैसे उद्योगपति से लेकर बड़ी सरकारी कंपनियों के अधिकारियों के नाम सामने आए हैं.

अंतरराष्ट्रीय मीडिया संगठनों के कंसोर्टियम, जिसमें द वायर भी शामिल है, के पेगासस प्रोजेक्ट के तहत इसका खुलासा हुआ है.

गोयल के अलावा सूची में स्पाइसजेट के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक अजय सिंह और एस्सार समूह के प्रशांत रुइया द्वारा उपयोग किए गए नंबर शामिल हैं.

भाजपा के साथ अपने जुड़ाव के लिए जाने जाने वाले अजय सिंह ने पिछले कुछ वर्षों में एयरलाइन को कलानिधि मारन से वापस लेने के बाद उल्लेखनीय सुधार के साथ आगे बढ़ाया है.

इस सूची में ऐसे कई व्यवसायी या कंपनियों के अधिकारी भी शामिल हैं, जिन्हें पिछले कुछ सालों में कानूनी मामलों का सामना करना पड़ा है, ज्यादातर ऋण धोखाधड़ी की जांच के कारण. इसमें रोटोमैक पेन के विक्रम कोठारी (और उनके बेटे राहुल) और एयरसेल के पूर्व प्रमोटर और उद्यमी सी. शिवशंकरन शामिल हैं.

फ्रांस के मीडिया नॉन-प्रॉफिट फॉरबिडेन स्टोरीज ने सबसे पहले 50,000 से अधिक उन नंबरों की सूची प्राप्त की थी, जिनकी इजरायल के एनएसओ ग्रुप द्वारा निर्मित पेगासस स्पायवेयर के जरिये निगरानी किए जाने की संभावना है. इसमें से कुछ नंबरों की एमनेस्टी इंटरनेशल ने फॉरेंसिक जांच की, जिसमें ये पाया गया कि इन पर पेगासस के जरिये हमला किया गया था.

फॉरबिडेन स्टोरीज ने इस ‘निगरानी सूची’ को द वायर  समेत दुनिया के 16 मीडिया संस्थानों के साथ साझा किया, जिन्होंने पिछले एक हफ्ते में एक के बाद एक बड़े खुलासे किए हैं. इस पूरी रिपोर्टिंग को ‘पेगासस प्रोजेक्ट’ का नाम दिया गया है.

एनएसओ ग्रुप का दावा है कि अपने प्रोडक्ट पेगासस को सिर्फ ‘प्रमाणित सरकारों’ को ही बेचते हैं. वहीं भारत सरकार ने पेगासस के इस्तेमाल को लेकर न तो स्वीकार किया है और न ही इनकार किया है. पेगासस ने इस सूची के किसी भी नंबर की हैकिंग से इनकार किया है.

पिछले कुछ सालों में जेट एयरवेज के बॉस नरेश गोयल के करिअर ने अर्श से फर्श तक का सफर तय किया है. साल 2018 के आखिर में कई मीडिया रिपोर्ट्स ने संकेत गिया था कि पैसे की कमी से जूझ रही उनकी एयरलाइन दिवालिया होने की कगार पर है. काफी उठापटक के बाद आखिरकार गोयल और उनकी पत्नी ने मार्च 2019 में बोर्ड से इस्तीफा दे दिया और एयरलाइन के नेताओं ने प्रबंधन संभाल लिया.

गोयल का नंबर पेगासस प्रोजेक्ट की सूची में उस दौरान दिखाई देता है जिस समय उन्हें मई 2019 में मुंबई एयरपोर्ट पर रोका गया था. बाद में जुलाई 2019 में कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय (एमसीए) ने आधिकारिक तौर पर जेट एयरवेज समूह की कई कंपनियों की जांच का आदेश दिया था.

इसके अलावा कोठारी और शिवशंकरन का नंबर उस समय सूची में दर्ज हुआ जब उनके खिलाफ सीबीआई जैसी कानूनी एजेंसियां जांच कर रही थीं.

बड़े कॉरपोरेट घरानों में काम करने वाले कम से कम तीन बिजनेस एक्जीक्यूटिव इस सूची में शामिल हैं. उनके पद अलग-अलग थे, लेकिन वे कंपनी से जुड़े नीतिगत मुद्दों पर काम करते थे.

इनमें अडाणी समूह के मिड-लेवल के एक अधिकारी, एस्सार समूह के एक व्यक्ति और स्पाइसजेट के पूर्व कर्मचारी शामिल हैं. द वायर  उनके नामों का खुलासा नहीं कर रहा है क्योंकि वे शीर्ष प्रबंधन का हिस्सा नहीं हैं और उन्होंने नाम न छापने का अनुरोध किया है.

इसके अलावा अपनी कंपनियों से जुड़े विवादों में रहने वाले रिलायंस इंडस्ट्री के वी. बालसुब्रमण्यन और रिलायंस अनिल धीरूभाई अंबानी समूह के एएन सेथुरमन के नंबर भी इस सूची में शामिल हैं.

दोनों कर्मचारी एक समय अविभाजित रिलायंस समूह का हिस्सा थे. इन पर आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम के तहत सरकारी दस्तावेज चोरी करने का आरोप लगाया गया था.

हालांकि अगस्त 2019 में दिल्ली उच्च न्यायालय ने कथित तौर पर गुप्त दस्तावेज रखने के लिए रिलायंस इंडिया लिमिटेड और उसके तीन अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलाने की अनुमति देने वाले एक ट्रायल कोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया था.

लीक हुई सूची में भारत के म्यूचुअल फंड उद्योग से जुड़े कम से कम पांच कॉरपोरेट अधिकारियों के नंबर दर्ज हैं. इनमें फ्रैंकलिन टेम्पलटन, डीएसपी ब्लैकरॉक और मोतीलाल ओसवाल जैसी कंपनियों के पेशेवर शामिल हैं.

इसके साथ ही द वायर  इस बात की भी पुष्टि कर सकता है कि सरकारी कंपनी गेल इंडिया के पूर्व प्रमुख और जनवरी 2020 में गैर-कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में एस्सार कंपनी में शामिल होने वाले बीसी त्रिपाठी का नंबर दर्ज है.

निगरानी के लिए संभावित निशाने के रूप में त्रिपाठी का चयन प्राकृतिक गैस निगम में शीर्ष पद संभालने के एक महीने बाद हुआ और लीक रिकॉर्ड में लगभग एक साल बाद तक उनका नंबर दिखाई देता है.

भारतीय जीवन बीमा निगम के पूर्व प्रमुख और गुजरात नर्मदा वैली फर्टिलाइजर कॉरपोरेशन के पूर्व कार्यकारी निदेशक के नंबर भी इस सूची में दिखाई देते हैं.

चार साल तक एक प्रमुख सरकारी कंपनी का नेतृत्व करने वाले एक पूर्व नौकरशाह ने द वायर  को बताया कि इन पदों को संभालने वाले ज्यादातर लोग मानते हैं कि एक हद तक उनकी निगरानी होती है.

उन्होंने कहा, ‘मैंने कभी पेगासस जैसी चीज के बारे में नहीं सुना था. लेकिन जब आप किसी ऐसे पद को संभालते हैं जो देश के सामरिक हित से करीब से जुड़ा होता है, तो यह उम्मीद की जाती है कि एक हद तक निगरानी होगी. ऐसा तब होता है जब नौकरी के लिए आपको जांचा जा रहा होता है, लेकिन बाद में भी ऐसा होता है. खासकर यदि आप ऐसे क्षेत्र में हैं जिसमें कॉरपोरेट हित हैं या सख्त नीतिगत निर्णय हैं.’