नॉर्थ ईस्ट

नॉर्थ ईस्ट डायरी: असम सरकार ने समूचे राज्य को छह महीने के लिए अशांत क्षेत्र घोषित किया

इस हफ़्ते नॉर्थ ईस्ट डायरी में असम, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश और त्रिपुरा के प्रमुख समाचार.

(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

असम: तीन दशक में पहली बार राज्य सरकार ने अफ्सपा के तहत असम को छह महीने के लिए अशांत क्षेत्र  घोषित किया

गुवाहाटी: पिछले तीन दशक में पहली बार असम सरकार ने विवादास्पद सशस्त्र बल विशेष अधिकार अधिनियम (अफ्सपा), 1958 के तहत शक्तियों का प्रयोग करते हुए छह महीने के लिए समूचे राज्य को अशांत क्षेत्र घोषित कर दिया है. यह घोषणा बीते एक सितंबर से लागू हो गई है.

एक आधिकारिक विज्ञप्ति में कहा गया है कि राज्य के गृह एवं राजनीतिक विभाग ने असम को छह महीने के लिए अशांत क्षेत्र घोषित किया है. सशस्त्र बल विशेषाधिकार शक्तियां अधिनियम, 1958 के तहत मिली शक्तियों के मुताबिक यह कदम उठाया गया है.

इसके तहत अशांत क्षेत्रों में तैनात सेना को गिरफ्तारी, किसी परिसर की तलाशी लेने और बगैर किसी वारंट के किसी को गोली मारने की शक्ति प्राप्त होगी.

अफ्सपा की धारा तीन के मुताबिक इसे उन स्थानों पर लागू किया जा सकता है जहां नागरिक प्रशासन की सहायता के लिए सशस्त्र बलों के इस्तेमाल की जरूरत है. केंद्र और राज्य सरकार, दोनों ही इस कानून के तहत किसी इलाके को अशांत क्षेत्र घोषित कर सकती हैं.

असम को पहली बार 1990 में में अशांत क्षेत्र घोषित किया गया था. उस समय राज्य में प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन उल्फा की बड़े पैमाने पर हिंसा देखी गई थी. साथ ही, प्रफुल्ल कुमार महंत के नेतृत्व वाली तत्कालीन एजीपी सरकार को बर्खास्त कर राष्ट्रपति शासन लगाया गया था. तब से केंद्र सरकार अफ्सपा का इस्तेमाल करती रही है.

अफ्सपा के तहत शक्तियों का इस्तेमाल करने की राज्य सरकार को ऐसे वक्त इजाजत मिली है जब केंद्र और असम, दोनों जगह भाजपा की सरकारें हैं. आधिकारिक विज्ञप्ति में कहा गया है कि राज्य में मौजूदा कानून व्यवस्था का आंकलन करने के बाद यह घोषणा की गई है. दरअसल, भूमिगत संगठनों की कुछ हिंसक घटनाओं के चलते राज्य में कानून व्यवस्था चिंता का विषय बना हुआ है.

वहीं, नई दिल्ली में गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि असम में 2016 में हिंसा की 75 घटनाएं हुई. इनमें 33 लोग मारे गए, जिनमें चार सुरक्षाकर्मी भी शामिल हैं. साथ ही 14 अन्य लोगों का अपहरण हुआ. अधिकारी ने बताया कि राज्य में हिंसा को उल्फा और एनडीएफबी जैसे संगठन अंजाम देते हैं.

इसके अलावा असम की सीमा से लगे मेघालय में 20 किमी लंबा क्षेत्र, अरुणाचल प्रदेश के तीन जिले- तिरप, चांगलांग और लोंगदिंग- तथा अरुणाचल प्रदेश में नौ अन्य जिलों के तहत 14 पुलिस थाना क्षेत्र 30 सितंबर तक अशांत क्षेत्र घोषित रहेंगे.

असम: 1987 से अब तक राज्य में 32 पत्रकार मारे जा चुके हैं

(फोटो:पीटीआई)

(फोटो:पीटीआई)

असम के पत्रकार संगठनों ने गौरी लंकेश की हत्या की निंदा की है, लेकिन साथ ही उत्तर पूर्व के पत्रकारों के साथ भेदभाव होने का आरोप भी लगाया है. हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, इन संगठनों का कहना है कि असम में 1987 से लेकर अब तक 32 पत्रकार मारे जा चुके हैं लेकिन इनकी हत्याओं पर किसी ने कुछ नहीं कहा.

गुवाहाटी प्रेस क्लब के सचिव नवा ठाकुरिया ने कहा कि भारत में पत्रकारों के लिए सबसे ख़तरनाक जगह असम है. दुखद ये है कि यहां काम के दौरान होने वाली पत्रकारों की हत्याएं मुश्किल से मुद्दा बन पाती है. उनका कहना है कि असम में मारे गए इन पत्रकारों की हत्या का कोई भी मामला अभी सुलझ नहीं सका है.

त्रिपुरा विधानसभा चुनाव: मानिक सरकार होंगे वाममोर्चा के उम्मीदवार

अगरतला: माकपा की त्रिपुरा इकाई ने शनिवार को कहा कि यदि सत्तारूढ़ वाममोर्चा अगले साल विधानसभा चुनाव जीतता है तो माणिक सरकार लगातार पांचवीं बार मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार होंगे.

प्रदेश माकपा सचिव बिजान धर ने कहा, हमें अगली सरकार बनाने के बारे में कोई संदेह नहीं है. त्रिपुरा में यदि आठवीं बार वाममोर्चा की सरकार बनी तो माणिक सरकार मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार होंगे. वह शारीरिक रूप से मजबूत हैं और कुशलतापूर्वक सरकार चलाने में सक्षम है.

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त्रिपुरा के मुख्यमंत्री मानिक सरकार. (फोटो: पीटीआई)

राज्य विधानसभा चुनाव अगले साल फरवरी में होने वाले हैं. एक प्रश्न के उत्तर में धर ने कहा कि पार्टी संविधान में ऐसी कोई पाबंदी नहीं है कि कोई व्यक्ति दो या तीन बार से अधिक चुनाव लड़ने या मुख्यमंत्री बनने के लिए पात्र नहीं होगा.

जब उनका ध्यान इस ओर आकृष्ट किया गया कि वरिष्ठ पार्टी नेता सीताराम येचुरी को दो बार से ज्यादा राज्यसभा के लिए चुनाव नहीं लड़ने दिया गया है तो उन्होंने कहा कि माकपा में यह परिपाटी है कि कोई सदस्य राज्यसभा के लिए दो बार से ज्यादा चुनाव नहीं लड़ता.

धर ने कहा, इसके अलावा, पार्टी महासचिव कोई संसदीय पद नहीं रख सकता, क्योंकि उसे पार्टी संगठन पर ज्यादा ध्यान देना होता है. हरकिशन सिंह सुरजीत पार्टी महासचिव चुने गए थे और उन्होंने कभी राज्यसभा के लिए चुनाव नहीं लड़ा.

त्रिपुरा: कांग्रेस के पूर्व विधायक भाजपा में शामिल

अगरतला: राज्य के ढलाई जिले के कमालपुर सबडिविजन से विपक्षी कांग्रेस के एक पूर्व विधायक मनोज कांति देव भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष विप्लव देव की मौजूदगी में बीते 7 सितंबर को पार्टी में शामिल हो गए.

राज्य मीडिया प्रभारी विक्टर सोम ने संवाददाताओं से कहा, देव प्रदेश भाजपा अध्यक्ष की मौजूदगी में कमालपुर में हमारी पार्टी में शामिल हो गए. एक कार्यक्रम में कांग्रेस और सत्तारूढ़ माकपा के 2374 समर्थक भी हमारी पार्टी में शामिल हुए. देव ने कहा कि लोगों की आकांक्षा के अनुरूप भाजपा में शामिल होना जरूरी था.

उन्होंने कहा कि माकपा को सत्ता से हटाना आसान नहीं है क्योंकि कांग्रेस और माकपा के बीच संबंध बहुत गहरा है. प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने देव का स्वागत किया और कहा कि सत्तारूढ़ वाम मोर्चा सरकार सभी मोर्चे पर नाकाम रही है.

मिजोरम: बलात्कार और हत्या के मामले में बीएसएफ के दो कर्मी गिरफ्तार

आइजोल: मिजोरम पुलिस ने ममित जिले में एक महिला से कथित तौर पर बलात्कार करने और उसके चेहरे पर तेजाब फेंकने तथा उसकी सेहली की हत्या के आरोप में बीएसएफ के दो कांस्टेबलों को गिरफ्तार किया है.

ममित के पुलिस अधीक्षक नारायण थापा ने बताया कि बीएसएफ के दो कर्मियों को जिले के सिलसुरी गांव में उनकी तैनाती के स्थान से गिरफ्तार किया गया है. जिले की सरहद त्रिपुरा और बांग्लादेश से लगती है.

थापा ने कहा कि बीएसएफ की 181वीं बटालियन के अधिकारियों ने पहले दो कांस्टेबलों की गिरफ्तारी की इजाजत नहीं दी. एसपी ने कहा कि जिला अदालत द्वारा उनके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी करने के बाद उन्हें पुलिस के हवाले किया गया.

चकमा समुदाय की एक महिला ने आरोप लगाया कि पिछली 16 जुलाई को बीएसएफ के दो कांस्टेबलों ने कथित तौर पर उसके साथ बलात्कार किया, लेकिन उसकी सहेली उस दिन मौके से भाग गई थी. दो महिलाएं बांस की लकड़ी लेने के लिए जंगल गई थीं.

थापा ने कहा कि 22 जुलाई को पास के जंगल से उसकी सहेली का शव बुरी तरह से गली हुई हालत में मिला. थापा ने कहा कि पीड़िता ने हाल में ममित थाने में शिनाख्त परेड के दौरान दोनों आरोपियों की पहचान की.

उन्होंने कहा कि शिनाख्त की कवायद पहले इसलिए नहीं की जा सकी थी कि आरोपियों ने पीड़िता के चेहरे पर तेजाब फेंक दिया था जिससे एक महीने से ज्यादा वक्त तक उसकी आंखों की रौशनी प्रभावित रही थी.

ऐक्ट ईस्ट नीति का पूर्वोत्तर क्षेत्र पर अभी स्पष्ट प्रभाव नहीं : साइनरम

शिलांग: पूर्वोत्तर परिषद के आर्थिक सलाहकार डब्ल्यू साइनरम ने बीते 5 सितंबर को कहा कि भारत की ऐक्ट ईस्ट नीति का पूर्वोत्तर क्षेत्र पर अब तक कोई स्पष्ट प्रभाव नहीं दिखता है.

साइनरम ने एनर्जाइजिंग नॉर्थ ईस्ट पर आयोजित सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि दक्षिण पूर्वी एशिया भारत के सबसे बड़े व्यापारिक भागीदार के रूप में उभरकर सामने आया है. इसके बाद भी पूर्वोत्तर क्षेत्र को इसका अभी स्पष्ट लाभ नहीं दिख रहा है जबकि यह क्षेत्र दक्षिणपूर्व एशियायी अर्थव्यवस्था के मुहाने पर है. इसका कारण है कि उस क्षेत्र के साथ व्यापार परंपरागत रूप से समुद्री मार्ग से होता है.

उन्होंने कहा कि ऐक्ट ईस्ट नीति के तहत पूर्वोत्तर क्षेत्र को सरकार तरजीह दे रही है क्योंकि यह क्षेत्र पड़ोसी देशों के साथ आर्थिक संबंधों के विकास का वैकल्पिक रास्ता है. उन्होंने पूर्व और दक्षिण पूर्व एशिया में पड़ोसी देशों को बिजली बेचने की संभावना पर जोर देते हुए कहा कि इससे पूर्वोत्तर क्षेत्र के जरिये सहयोग बढ़ाने के नये आयाम खुल सकते हैं.

सार्वजनिक तेल विपणन कंपनी तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम ओएनजीसी के महाप्रबंधक सौगत सेन ने कहा, भारत की आर्थिक वृद्धि पूर्वोत्तर भाग के विकास के बिना सोची नहीं जा सकती है क्योंकि यह बांग्लादेश, भूटान, चीन, नेपाल और म्यांमार के साथ नजदीकी की वजह से एक रणनीतिक स्थिति में है.

भारत और बांग्लादेश सीमा के बीच नई बाड़ लगाने का 95 प्रतिशत काम पूरा : बीएसएफ प्रमुख

नई दिल्ली: भारत और बांग्लादेश ने सीमा के आर-पार अपराध को रोकने और अंतरराष्ट्रीय सरहद के बीच पड़ने वाले 250 से ज्यादा गांवों की सुरक्षा के लिए नई बाड़ लगाने का 95 प्रतिशत काम पूरा कर लिया है. अधिकतर गांव पश्चिम बंगाल में है जबकि कुछ भारत के अन्य प्रदेशों में हैं जिनकी सरहद बांग्लादेश से लगती है.

बीएसएफ के महानिदेशक केके शर्मा ने कहा कि इस महत्वाकांक्षी योजना पर पिछले साल बीएसएफ के समकक्ष बीजीबी के साथ बैठक में विचार किया गया था और इसे कार्यान्वित किया गया है. बीएसएफ के महानिदेशक ने बीते 5 सितंबर को एक साक्षात्कार में कहा, 95 प्रतिशत स्थान नई बाड़ के दायरे में आ गए हैं. बचे हुए स्थानों पर काम चल रहा है.

उन्होंने कहा कि दोनों बल जहां तक हो सके सरहद के आर-पार अपराधों पर लगाम लगाने की कोशिश कर रहे हैं. भारतीय पक्ष भी सरहद पर हत्याओं की घटनाओं को कम करने की कोशिश कर रहा है. भारत और बांग्लादेश तथा सीमा की रखवाली करने वाले दोनों बलों के बीच रिश्ते अभी बेहतरीन हैं. जब ऐसी घटनाएं होती हैं तो यह संबंधों में बेचैनी पैदा करते हैं.

पशु तस्करी की घटनाएं प्रतिवर्ष 23 लाख से घटकर पांच-छह लाख हो गई हैं. उन्होंने कहा, हम जितना इसे कम कर सकते हैं उतना कम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

पिछले साल अक्टूबर में सीमा सुरक्षा बल और बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश के बीच यहां हुई महानिदेशक स्तर की साल में दो बार होने वाली वार्ता में नई बाड़ लगाने का प्रमुख फैसला किया गया था. दोनों देशों की बीच 4,096 किलोमीटर लंबी सरहद है.

मणिपुर: राज्य के पूर्व नौकरशाह के घर की तलाशी

इंफाल : पुलिस ने बीते 4 सितंबर को मणिपुर के एक पूर्व नौकरशाह के घर की तलाशी ली. एक पूर्व मुख्यमंत्री और पांच अन्य के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी में इस नौकरशाह का नाम भी शामिल होने के कारण यह तलाशी ली गई है. प्राथमिकी में इन सभी पर कथित रूप से वित्तीय गड़बड़ियों में संलिप्त होने का आरोप लगाया गया है. यह जानकारी पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने दी.

पुलिस अधिकारी ने बताया कि एक अदालत द्वारा सर्च वारंट जारी करने के बाद इंफाल के पश्चिमी जिले में मणिपुर डेवलपमेंट सोसायटी के पूर्व परियोजना निदेशक वाई निंगथेम के घर पर छापा मारा. उन्होंने बताया कि तलाशी में क्या कुछ मिला है इसका पता नहीं चल सका है.

एमडीएस में कथित वित्तीय अनियमितताओं के आरोप में मणिपुर के पूर्व मुख्यमंत्री ओ इबोबी सिंह और राज्य के पांच पूर्व शीर्ष नौकरशाहों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी जिसमें निंगथेम का नाम सामने आया है. इन पांच पूर्व शीर्ष नौकरशाहों में तीन पूर्व मुख्य सचिवों और एमडीएस के दो अधिकारियों का नाम है.

वहीं, कांग्रेस विधायक एन लोकेन सिंह ने एक कार्यक्रम के दौरान प्राथमिकी दर्ज कराने के इस कार्य को राजनीतिक प्रतिशोध बताया है. ओ इबोबी सिंह वर्ष 2002 से 2017 तक मुख्यमंत्री रहे.

अरुणाचल प्रदेश: राज्य के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जोमदे केना का निधन

(जोमेद केना,फोटो:पीटीआई)

(जोमेद केना,फोटो:पीटीआई)

ईटानगर: अरुणाचल प्रदेश के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जोमदे केना का लंबी बीमारी के बाद गुवाहाटी के एक निजी अस्पताल में बीते 5 सितम्बर को निधन हो गया. परिवार ने उनकी मृत्यु की जानकारी दी . वह निम्न सियांग जिले के गेंसी गांव के रहने वाले थे और उनका पिछले एक महीने से गुवाहाटी में इलाज चल रहा था.

लिकाबाली निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले केना वर्ष 2004 में पहली बार विधानसभा सभा में निर्वाचित हुए थे. वह वर्ष 2009 और 2014 में इसी निर्वाचन क्षेत्र से सदन में निर्वाचित हुए.

केना को नबम टुकी सरकार के दौरान उपाध्यक्ष चुना गया. उन्होंने दोर्जी खांडू तथा जारबोम गैमलिन के मंत्रालयों में संसदीय सचिव की भूमिका निभाई. उनके परिवार में उनकी पत्नी, चार बेटियां और दो बेटे हैं. मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने केना के निधन पर शोक और दुख जताया. एक आधिकारिक बैठक के लिए राष्ट्रीय राजधानी में मौजूद खांडू ने शोक संतप्त परिवार के सदस्यों और लोगों के लिए गहरी संवेदनाएं व्यक्त की.

अरुणाचल प्रदेश: सेना प्रमुख ने अरुणाचल में अभियान को सामान्य बताया

नई दिल्ली: सेना प्रमुख जनरल विपिन रावत ने भारत-म्यांमा सीमा पर एनएससीएनके के खिलाफ सुरक्षा बलों द्वारा चलाये गए हालिया अभियान को ज्यादा महत्व नहीं देने की अपील करते हुए बीते 4 सितंबर को कहा कि इस तरह की कार्यवाई नियमित रूप से की जाती रही है. गृह राज्य मंत्री किरेन रिजिजू के साथ यहां एक बैठक के बाद उन्होंने पत्रकारों से कहा  यह एक सामान्य मुठभेड़ है. इस तरह के अभियान प्रतिदिन चलाये जाते हैं. इस अभियान में कुछ भी बड़ा नहीं है.

म्यांमार के साथ लगती सीमा पर अरूणाचल प्रदेश के लोंगडिंग जिले में सैनिकों और नागा उग्रवादी समूह एनएससीएन के खापलांग धड़े के बीच मुठभेड़ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के म्यांमा की यात्रा पर जाने से ठीक एक दिन पहले हुयी. मुठभेड़ में एनएससीएन के का कम से कम एक उग्रवादी मारा गया और एक अन्य घायल हो गया. इस दौरान इस संगठन के एक ठिकाने को भी नष्ट कर दिया गया.

ईटानगर में रक्षा प्रवक्ता कर्नल चीरंजीत कोनवर ने बताया कि जिले के वोतनू गांव के निकट एनएससीएन के उग्रवादियों की मौजूदगी के बारे में एक गोपनीय सूचना मिलने के बाद सुरक्षा बलों ने अभियान चलाया था. उग्रवादियों ने सैनिकों पर भारी गोलीबारी की और सुरक्षा बलों ने भी जवाबी कार्यवाई की.