राजनीति

छत्तीसगढ़: अपनी ही सरकार से नाराज़ होकर विधानसभा छोड़कर बाहर निकले टीएस सिंहदेव

बीते 25 जुलाई को कांग्रेस विधायक बृहस्पत सिंह ने आरोप लगाया था कि उनके काफिले पर 24 जुलाई की शाम छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव पर के इशारे पर हमला किया गया था. इस संबंध में सिंहदेव विधानसभा में कहा है कि वह सदन की कार्यवाही में तब तक शामिल नहीं होंगे, जब तक राज्य सरकार विधायक द्वारा लगाए गए आरोपों पर स्पष्ट जवाब नहीं दे देती है.

बहस्पत सिंह, टीएस सिंहदेव और भूपेश बघेल. (फोटो: पीटीआई/फेसबुक)

रायपुर: छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव और कांग्रेस विधायक बृहस्पत सिंह के बीच कथित विवाद के मुद्दे को लेकर विधानसभा में दूसरे दिन भी हंगामा हुआ, वहीं गृहमंत्री के बयान के बाद मंत्री सिंहदेव सदन से उठकर चले गए.

सिंहदेव ने कहा है कि वह सदन की कार्यवाही में तब तक शामिल नहीं होंगे, जब तक राज्य सरकार विधायक द्वारा लगाए गए आरोपों पर स्पष्ट जवाब नहीं दे देती है.

इधर इस मुद्दे को लेकर राज्य के मुख्य विपक्षी दल भाजपा के सदस्यों ने मामले की विधानसभा की समिति से जांच कराए जाने की मांग की और हंगामा मचाया, जिसके बाद सदन की कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित कर दी गई.

राज्य के उत्तर क्षेत्र के रामानुजगंज विधानसभा सीट से सत्तारूढ़ दल कांग्रेस के विधायक बृहस्पत सिंह ने रविवार को आरोप लगाया था कि उनके काफिले पर 24 जुलाई की शाम सिंहदेव के इशारे पर अंबिकापुर शहर में हमला किया गया था.

सिंह का कहना था कि उन्होंने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की प्रशंसा की थी, जिसे लेकर सिंहदेव नाराज थे. विधायक ने यह भी आरोप लगाया था कि मंत्री से उनकी जान को खतरा है.

पुलिस के एक अधिकारी ने बताया था कि वाहन चालक की शिकायत के आधार पर तीन आरोपियों- सचिन सिंह देव, धन्नो उराव और संदीप रजक को रविवार को गिरफ्तार कर लिया गया. उन्होंने बताया कि घटना के सही कारणों का तत्काल पता नहीं चल पाया है और आगे की जांच की जा रही है.

विधायक के आरोप के बाद सिंहदेव ने कहा था कि उनके क्षेत्र और राज्य के लोग उनके बारे में तथा उनकी छवि के बारे में अच्छी तरह से जानते हैं. उनके पास इस विषय पर कहने के लिए और कुछ नहीं है. सिंहदेव अंबिकापुर विधानसभा सीट से विधायक हैं.

कांग्रेस विधायक का मंत्री पर आरोप के बाद राज्य के मुख्य विपक्षी दल भाजपा ने विधानसभा में मानसून सत्र के पहले दिन सोमवार को इस मुद्दे पर जमकर हंगामा मचाया और मामले की सदन की कमेटी से जांच कराने की मांग की.

मंगलवार को राज्य के गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू ने इस महीने की 24 तारीख को विधायक सिंह के काफिले के साथ हुई घटना के संबंध में सदन में बयान दिया.

गृहमंत्री के जवाब से असंतुष्ट विपक्ष के नेता धरमलाल कौशिक और भाजपा के अन्य विधायकों ने कहा कि गृह मंत्री के जवाब में स्वास्थ्य मंत्री पर कांग्रेस विधायक द्वारा लगाए गए आरोपों का संदर्भ नहीं है. दोनों नेताओं को इस मामले पर सदन में बयान देने के लिए कहा जाना चाहिए.

तब विधानसभा अध्यक्ष चरण दास महंत ने कहा कि उन्हें विधायक या स्वास्थ्य मंत्री की ओर से कोई शिकायत नहीं मिली है. वह किस आधार पर उन्हें इस मुद्दे पर बोलने के लिए कह सकते हैं.

सदन में इस मुद्दे पर हंगामे के बीच अचानक सिंहदेव अपने स्थान पर खड़े हुए और कहा, ‘अब बहुत हो गया. मैं भी एक इंसान हूं. मेरी छवि के बारे में सभी जानते हैं.’

सिंहदेव ने विधानसभा अध्यक्ष की ओर से कहा कि आपके निर्देश पर कल (सोमवार को) मुख्यमंत्री ने हमें अपने कक्ष में बुलाया था और चर्चा (कथित विवाद पर) हुई थी. उसके बाद भी इतना सीमित बयान (गृह मंत्री की ओर से) सदन के सामने आया है.

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा, ‘मैं इस स्थिति में हूं कि जब तक सरकार इस मुद्दे पर स्पष्ट जवाब पेश नहीं करती है, तब तक मैं सदन में उपस्थित नहीं हो सकता हूं.’

उन्होंने कहा कि मैं खुद को इस सदन की कार्यवाही में भाग लेने के लिए तब तक योग्य नहीं मानता जब तक कि सरकार मेरे संदर्भ में एक स्पष्ट उत्तर न दे दे.

इसके बाद सिंहदेव सदन से बाहर निकल गए और बाद में वह मीडिया को बयान देने से इनकार कर दिया और विधानसभा परिसर से भी निकल गए.

मंत्री सिंहदेव के सदन से जाने के बाद भाजपा सदस्यों ने इन विषय को लेकर जमकर हंगामा मचाया, जिससे सदन की कार्यवाही 10 मिनट के लिए स्थगित कर दी गई.

बाद में जब सदन की कार्यवाही शुरू हुई भाजपा सदस्य अजय चंद्राकर, बृजमोहन अग्रवाल और अन्य सदस्यों ने मामले को उठाया और कहा कि किसी विधायिका के इतिहास में ऐसी घटना कभी नहीं हुई है जब किसी मंत्री ने अपनी ही सरकार के जवाब पर असंतोष व्यक्त किया हो.

भाजपा सदस्यों ने कहा कि जब तक इस मुद्दे का समाधान नहीं होता है, तब तक विधानसभा में कोई अन्य कार्य नहीं किया जाना चाहिए.

विधानसभा में विपक्ष के नेता धरमलाल कौशिक और पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह ने कहा कि यह सदन और उसके सदस्यों की गरिमा का मामला है और इस मर्यादा को बनाए रखने के लिए इस मामले की जांच सदन की कमेटी से की जानी चाहिए.

भाजपा के सदस्यों ने अपनी मांग को लेकर सदन में नारेबाजी शुरू कर दी और गर्भगृह पहुंच गए. बाद में विधानसभा अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित कर दी.

कुछ देर बाद विधानसभा लौटे मंत्री सिंहदेव ने संवाददाताओं से कहा कि उन्हें उनके कैबिनेट सहयोगियों का फोन आया है इसलिए वह फिर से विधानसभा आए हैं. इसके बाद उन्हें विधानसभा में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के कक्ष के भीतर जाते देखा गया.

बाद में सिंहदेव ने संवाददाताओं को बताया कि उनकी मुख्यमंत्री बघेल और प्रदेश प्रभारी पीएल पुनिया से बातचीत हुई. हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि दोनों नेताओं से उनकी क्या बात हुई है.

कांग्रेस ने विधायक को नोटिस जारी कर 24 घंटे में मांगा जवाब

छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव पर सत्ताधारी दल के विधायक बृहस्पति सिंह के आरोपों के बाद प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने विधायक से 24 घंटे के भीतर स्पष्टीकरण मांगा है.

छत्तीसगढ़ में रामानुजगंज विधानसभा क्षेत्र के विधायक बृहस्पति सिंह और स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव के मध्य कथित विवाद के बाद छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने विधायक को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है. विधायक सिंह ने मंत्री सिंहदेव पर हमला करवाने का आरोप लगाया था.

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रभारी महामंत्री (प्रशासन) रवि घोष के हस्ताक्षर से बृहस्पति सिंह को जारी नोटिस में कहा गया है कि 24 जुलाई की घटना के संदर्भ में कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता और मंत्री टीएस सिंहदेव पर जो कथन-1. टीएस सिंहदेव महाराजा हैं, मेरी हत्या करवा सकते हैं (प्रिंट मीडिया) और कथन-2. कुर्सी पाने के लिए टीएस सिंहदेव 4-5 विधायकों की हत्या कर सकते हैं (इलेक्ट्रानिक मीडिया), यह आरोप आपके द्वारा सार्वजनिक रूप से मीडिया के माध्यम से लगाया गया है, इसका आधार क्या है. आपने किन तथ्यों के आधार पर यह आरोप लगाया है.

नोटिस में सिंह को कहा गया है कि मेरा यह मानना है कि आपको इस प्रकार की बातें पहले पार्टी मंच में रखनी थीं, जबकि छत्तीसगढ़ प्रभारी पीएल पुनिया, सह प्रभारी चंदन यादव और सप्तगिरि उल्का घटना के दौरान रायपुर में थे.

प्रदेश कांग्रेस कमेटी से जारी नोटिस में कहा गया है कि आपके इस प्रकार के सार्वजनिक बयान और कृत्यों से पार्टी की छवि धूमिल हुई है. कृपया इस संदर्भ में आप अपना लिखित स्पष्टीकरण 24 घंटे के भीतर दें.

ढाई साल के फॉर्मूले को लेकर बघेल और सिंहदेव में चल रहा विवाद

बता दें कि छत्तीसगढ़ में सत्तारूढ़ कांग्रेस के भीतर कथित तौर पर ढाई साल में सत्ता साझा करने के फॉर्मूले को लेकर विवाद चल रहा है.

रिपोर्ट के अनुसार, बघेल और पुनिया दोनों ही इस बात पर अड़े हैं कि ऐसा कोई वादा नहीं किया था. जबकि सिंहदेव खेमे का कहना है कि उन्हें ढाई साल के पद का वादा किया गया था.

इस बीच, टीएस सिंह देव ने कथित तौर पर जुलाई के पहले सप्ताह में दिल्ली में पूरे गांधी परिवार से मुलाकात की थी और उन्हें उनसे किए गए कथित वादे की याद दिलाई थी.

इस मामले पर गांधी परिवार की प्रतिक्रिया नहीं पता चल सकी, लेकिन बघेल को दिल्ली भी बुलाया गया था और गांधी परिवार से मिलने के बाद उन्होंने एक सार्वजनिक बयान दिया कि कोई बदलाव नहीं होने वाला है और यह गठबंधन सरकार नहीं है, जहां पद दो व्यक्तियों के बीच विभाजित है.

हालांकि, इस दौरान उन्होंने  कहा था कि अगर पार्टी आलाकमान उन्हें निर्देश देगा तो वह पद छोड़ देंगे.

वहीं, बाद में पुनिया ने अपने बयान को दोहराते हुए कहा था कि सिंहदेव को ऐसा कोई वादा नहीं किया गया था.

रिपोर्ट के अनुसार, सूत्रों के मुताबिक, तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने संकेत दिया था कि दिल्ली में रहने वाले दोनों नेता बघेल और सिंहदेव पांच साल के कार्यकाल को समान रूप से साझा करेंगे, जिसमें बघेल पहली बार जाएंगे. हालांकि, पिछले महीने पद पर ढाई साल पूरे करने वाले बघेल ने इस तरह के किसी भी समझौते से बार-बार इनकार किया है.

पिछले तीन वर्षों में उनके बीच लगातार खींचतान चलती रही है. ग्रामीण क्षेत्रों में निजी स्वास्थ्य सेवा को सब्सिडी देने, अधिकारियों के परिवर्तन और शक्तियों पर प्रतिबंध और हाल में लेमरू हाथी रिजर्व के क्षेत्र उन प्रमुख मुद्दों में से हैं जिन पर उनमें मतभेद रहे हैं.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)