भारत

500 से अधिक कार्यकर्ताओं, वकीलों ने सीजेआई को पत्र लिखा- केंद्र से पूछें पेगासस खरीदा या नहीं

द वायर सहित एक अंतरराष्ट्रीय मीडिया कंसोर्टियम ने सिलसिलेवार रिपोर्ट्स में बताया है कि देश के केंद्रीय मंत्रियों, 40 से ज़्यादा पत्रकारों, विपक्षी नेताओं, एक मौजूदा जज, कई कारोबारियों व कार्यकर्ताओं समेत 300 से अधिक भारतीय फोन नंबर उस लीक डेटाबेस में थे, जिनकी पेगासस से हैकिंग हुई या वे संभावित निशाने पर थे.

नई दिल्लीः प्रख्यात लेखकों, पत्रकारों, वकीलों, शिक्षाविदों और कार्यकर्ताओं सहित 500 से अधिक लोगों ने सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस एनवी रमना को पत्र लिखकर मिलिट्री ग्रेड के पेगासस स्पायवेयर के इस्तेमाल से देश के कई नामचीन लोगों के मोबाइल फोन के संभावित सर्विलांस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है.

द वायर  सहित वैश्विक स्तर पर 17 मीडिया संगठनों ने पेगासस प्रोजेक्ट के नाम से एक श्रृंखला प्रकाशत की.

पेगासस प्रोजेक्ट केंद्रीय मंत्रियों, 40 से अधिक पत्रकारों, विपक्षी नेताओं, एक मौजूदा जज, कई कारोबारियों और कार्यकर्ताओं सहित 300 से अधिक भारतीयों के फोन नंबर के लीक डेटाबेस पर आधारित है, जिनकी पेगासस से हैकिंग की गई या वे संभावित रूप से निशाने पर थे.

लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, इस पत्र पर अरुणा रॉय, अंजलि भारद्वाज, कविता कृष्णन और हर्ष मंदर जैसे कार्यकर्ताओं, वृंदा ग्रोवर, झूमा सेन जैसी वकील जयती घोष, सुकांत चौधरी, जोया हसन और रोमिला थापर जैसे शिक्षाविद, अरुंधति रॉय, वी. गीता, गीता हरिहरन जैसे लेखकों,  अनुराधा भसीन, पेट्रिशिया मुखिम और जॉन दयाल जैसे पत्रकारों सहित विभिन्न क्षेत्रों की कई हस्तियों ने हस्ताक्षर किए हैं.

इन लोगों ने इस खुले पत्र में चार प्रमुख सवाल उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट से कहा कि वह केंद्र सरकार को इनका जवाब देने का निर्देश दें.

1. क्या किसी भारतीय इकाई ने पेगासस खरीदा था? अगर हां तो वह इकाई कौन सी थी और इसके लिए भुगतान (इसकी लागत का अनुमान कथित तौर पर प्रति फोन 1.5 करोड़ है) किस तरह किया गया?

2. अगर इसे वास्तव में खरीदा गया तो संभावित हैकिंग के लक्ष्यों का चुनाव किस तरह किया गया और हैकिंग से मिली सूचना का क्या उपयोग किया गया?
3. इस तरह के लक्ष्यों के चुनाव का औचित्य क्या था और उन्हें किस संवैधानिक प्राधिकरण के समक्ष पेश किया गया?

4. किस संवैधानिक प्राधिकरण ने पत्रकारों, नेताओं, वकीलों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और शिक्षाविदों (सुप्रीम कोर्ट के कर्मचारी और उनके परिवार के सदस्यों) सहित इन व्यक्तियों की निजता के आपराधिक उल्लंघन की निगरानी या समीक्षा की ताकि इन्हें पेगासस की संभावित सर्विलांस सूची में शामिल किया जा सके?

इन हस्ताक्षरकर्ताओं ने कहा, ‘हमारा मानना है कि सुप्रीम कोर्ट भारत में पेगासस के इस्तेमाल से संबंधित सभी जवाबों की केंद्र से मांगकर और उन्हें सार्वजनिक कर लोगों में विशेष रूप से महिलाओं में विश्वास बहाल कर सकता है.’

इस पत्र में विशेष रूप से सुप्रीम कोर्ट की एक कर्मचारी द्वारा पूर्व सीजेआई रंजन गोगोई के खिलाफ कथित यौन उत्पीड़न का मामला उठाया गया है.

हस्ताक्षरकर्ताओं ने दुख जताया कि यौन उत्पीड़न पीड़िता को कथित तौर पर सर्विलांस सूची में रखा गया. इसके साथ ही गोगोई के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट की आंतरिक जांच की वैधता पर भी सवाल उठाए गए.

पत्र में पेगासस स्पायवेयर हमलों के बारे में कहा गया, ‘हमें उम्मीद है कि आपका कार्यालय इस मामले पर संज्ञान लेने में अधिक समय नहीं लेगा और हमारे अधिकारों और स्वतंत्रता की रक्षा करने, एक संस्था के तौर पर सुप्रीम कोर्ट की विश्वसनीयता की रक्षा करने और हमारे संविधान की रक्षा करते हुए केंद्र सरकार से समय पर जवाब मांगेगा.’

बीते लगभग एक हफ्ते से एक अंतरराष्ट्रीय मीडिया कंसोर्टियम लगातार पेगासस सर्विलांस को लेकर रिपोर्ट प्रकाशित कर रहा है. इनमें बताया गया कि केंद्रीय मंत्रियों, 40 से अधिक पत्रकारों, विपक्षी नेताओं, एक मौजूदा जज, कई कारोबारियों और कार्यकर्ताओं सहित 300 से अधिक भारतीयों के मोबाइल नंबर उस लीक किए गए डेटाबेस में शामिल थे जिनकी पेगासस से हैकिंग की गई या वे संभावित रूप से निशाने पर थे. द वायर  भी इस कंसोर्टियम का हिस्सा है.

द वायर  ने फ्रांस की गैर-लाभकारी फॉरबिडन स्टोरीज और अधिकार समूह एमनेस्टी इंटरनेशनल सहित द वॉशिंगटन पोस्ट, द गार्जियन और ल मोंद जैसे 16 अन्य अंतरराष्ट्रीय मीडिया संगठनों के साथ मिलकर ये रिपोर्ट्स प्रकाशित की हैं.

यह जांच दुनियाभर के 50,000 से ज्यादा लीक हुए मोबाइल नंबर पर केंद्रित थी, जिनकी इजरायल के एनएसओ समूह के पेगासस सॉफ्टेवयर के जरिये सर्विलांस की जा रही थी. इसमें से कुछ नंबरों की एमनेस्टी इंटरनेशनल ने फॉरेंसिक जांच की है, जिसमें ये साबित हुआ है कि उन पर पेगासस स्पायवेयर से हमला हुआ था.

(इस पत्र को पूरा पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.)