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गोरखपुर विश्वविद्यालय में छात्रा का शव मिला, एचओडी व सहयोगियों के ख़िलाफ़ हत्या का केस दर्ज

उत्तर प्रदेश के दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय की बीएससी तृतीय वर्ष की छात्रा का शव बीते 31 जुलाई को एक स्टोर रूम में फांसी से लटका मिला था. पहले पुलिस और विश्वविद्यालय प्रशासन मामले को आत्महत्या बता रहे थे. छात्रा के पिता की लिखित शिकायत पर एक अगस्त की देर शाम विश्वविद्यालय के गृह विज्ञान विभागाध्यक्ष और उनके सहायकों के ख़िलाफ़ हत्या का मामला दर्ज किया गया है.

गोरखपुर विश्वविद्यालय. (फोटो: धीरज मिश्रा/द वायर)

गोरखपुर: दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय की बीएससी तृतीय वर्ष की छात्रा का शव बीते 31 जुलाई को एक स्टोर रूम में फांसी से लटका मिलने के अगले दिन रविवार (एक अगस्त) देर शाम पुलिस ने गृह विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष और उनके सहयोगियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया है.

सूत्रों के अनुसार, पहले पुलिस और विश्वविद्यालय प्रशासन मामले को आत्महत्या बता रहे थे, लेकिन अब हत्या की प्राथमिकी दर्ज की गई है.

मृतक छात्रा की पहचान 24 वर्षीय प्रियंका कुमारी के रूप में हुई है.

गौरतलब है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण लटकने के चलते दम घुटना बताया गया है. मृतक के पिता की लिखित शिकायत पर रविवार देर शाम विश्वविद्यालय के गृह विज्ञान विभागाध्यक्ष और उनके सहायकों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया.

पुलिस ने बताया कि परिजनों ने बीते दो अगस्त को शव का अंतिम संस्कार कर दिया. पुलिस अधीक्षक (नगर) सोनम कुमार ने बताया कि पुलिस ने जांच शुरू कर दी है और जल्द ही सच्चाई सामने आ जाएगी.

गोरखपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक दिनेश कुमार पी. ने बताया कि पोस्टमार्टम दो डॉक्टरों के पैनल और वीडियोग्राफी के साथ किया गया था और रिपोर्ट के अनुसार ‘एंटीमार्टम हैंगिंग’ के कारण दम घुटने से मौत हुई है.

उन्‍होंने कहा कि परिवार की शिकायत के आधार पर हत्या का मामला दर्ज किया गया है और परिवार के अनुरोध पर मुख्‍य चिकित्‍सा अधिकारी द्वारा गठित पांच चिकित्सकों का पैनल पोस्टमार्टम वीडियो की समीक्षा करेगा.

उन्‍होंने कहा कि चौरी चौरा के क्षेत्राधिकारी को निष्पक्ष जांच कर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं.

पुलिस अधीक्षक (नगर) सोनम कुमार ने टाइम्स ऑफ इंडिया से कहा, ‘शिवपुर शाहबाजगंज (गोरखपुर) निवासी प्रियंका कुमारी के पिता विनोद कुमार द्वारा हमें दी गई लिखित शिकायत के आधार पर विश्वविद्यालय के गृह विज्ञान विभाग के प्रमुख और उसके सहयोगियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 302 (हत्या) के तहत मामला दर्ज किया गया है.’

जानकारी के अनुसार, छात्रा 31 जुलाई को परीक्षा देने विश्वविद्यालय गई थी और वहीं के एक स्‍टोर में उसका शव दुपट्टे से लटका मिला. उनके पिता ने अपनी शिकायत में कई सवाल उठाए हैं, ‘जैसे- क्यों लड़की के पैर जमीन को छू रहे थे, क्यों उसके कपड़े पर धूल और मिट्टी लगी थी, क्यों उसकी सैंडल कमरे में शरीर से दूर पड़ी थी?’

शिकायत में उसके पिता ने यह भी कहा कि उन्होंने छात्रा के सिर में चोट देखी और उसकी कलाई घड़ी गायब थी.

अमर उजाला के मुताबिक, 31 जुलाई की रात छात्रा के शव के पोस्टमार्टम को लेकर परिजनों व मोहल्लेवासियों ने मेडिकल कॉलेज में हंगामा किया था. इसके बाद देर रात डॉक्टरों की टीम गठित कर पोस्टमार्टम कराया गया. शव को घर लाने के बाद परिजनों और मोहल्लेवासियों ने हत्या की आशंका जाहिर की.

रिपोर्ट के मुताबिक, विश्वविद्यालय के गृह विज्ञान विभाग में सीसीटीवी कैमरे नहीं लगे हैं. पुलिस मामले की जांच को पहुंची तो सिर्फ दीक्षा भवन में ही सीसीटीवी कैमरा मिला.

वहीं, विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर राजेश सिंह ने कहा कि प्रशासन तीन विश्वविद्यालय कर्मचारियों के सदस्यों के साथ एक सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय के न्यायाधीश द्वारा जांच की सिफारिश करेगा. चार सदस्यीय समिति में सेवानिवृत्त न्यायाधीश, एक कार्यपरिषद सदस्य के साथ विश्वविद्यालय के दो वरिष्ठ अधिकारी होंगे.

विश्वविद्यालय के मीडिया सेल से मिली जानकारी के मुताबिक चार सदस्यीय समिति हर पहलू की जांच कर जल्द से जल्द रिपोर्ट विश्वविद्यालय प्रशासन को उपलब्ध कराएगी.

कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और भारतीय जनता पार्टी के नगर विधायक राधा मोहन दास अग्रवाल सहित विभिन्न राजनीतिक दलों की छात्र शाखा ने इस मामले में न्याय की मांग की है.

कांग्रेस पार्टी युवा शाखा के नेता मनीष ओझा ने मामले में सीबीआई जांच और मजिस्ट्रियल जांच की मांग की है. भाजपा विधायक राधा मोहन दास अग्रवाल छात्रा के घर पहुंचकर परिजनों से मिले और न्याय का भरोसा दिया है.

बसपा के महानगर अध्यक्ष सुरेश भारती ने इस प्रकरण में पुलिस की भूमिका को भी संदिग्ध बताया है. उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रा की पोस्टमार्टम रिपोर्ट से भी छेड़छाड़ कर घटना को हत्या की बजाय आत्महत्या बताया जा रहा है.

वहीं, छात्रा के मौत के मामले में उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हुए एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने अपर नगर मजिस्ट्रेट (एसीएम) पंकज दीक्षित को ज्ञापन दिया है.

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, मंगलवार को छात्रा की मौत की निष्पक्ष जांच की मांग के साथ छात्रों के दो गुटों ने विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार प्रदर्शन किया. पहले से मौजूद भारी पुलिस बल के साथ मौजूद अधिकारियों और विश्वविद्यालय नियंता मंडल ने छात्रों को समझा-बुझाकर शांत किया. इस दौरान छात्रों ने मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन मुख्य नियंता प्रो. सतीश चंद्र पांडेय सौंपा और उसे शासन-प्रशासन पहुंचाने की मांग की. मुख्य नियंता के आश्वासन के बाद छात्र नारेबाजी करते हुए वहां से चले गए.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)