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मध्य प्रदेश: ज़हरीली शराब के मामलों में मृत्युदंड देने के प्रस्ताव को मंत्रिमंडल की मंज़ूरी

मंत्रिमंडल ने मध्य प्रदेश आबकारी अधिनियम (संशोधन) विधेयक 2021 को मंज़ूरी दी है. इसमें ज़हरीली शराब के सेवन से हुई मौतों से संबंधित मामलों में मृत्युदंड, आजीवन कारावास और 20 लाख रुपये के जुर्माने का प्रावधान किया गया है.

(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

भोपाल: मध्य प्रदेश मंत्रिमंडल ने मंगलवार को आबकारी अधिनियम में संशोधन को मंजूरी देते हुए जहरीली शराब के सेवन से हुई मौतों से संबंधित मामलों में मृत्युदंड और आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान किया है.

इस संशोधन प्रस्ताव में 20 लाख रुपये के जुर्माने का भी प्रावधान किया गया है. विधानसभा में अनुमोदन होने और उसके बाद राज्यपाल द्वारा इसको मंजूरी देने के बाद यह कानून बन जाएगा.

हाल में मंदसौर और इंदौर में कथित रूप से जहरीली शराब पीने से कम से कम 11 लोगों की मौत की पृष्ठभूमि में राज्य सरकार ने यह कदम उठाया है. इसके पहले बीते जनवरी महीने में मुरैना में जहरीली शराब पीने से 24 लोगों की मौत हो गई थी.

प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने मंत्रिमंडल की बैठक के बाद यहां संवाददाताओं को बताया, ‘मंत्रिमंडल ने मध्य प्रदेश आबकारी अधिनियम (संशोधन) विधेयक 2021 को मंजूरी दी है.’

उन्होंने कहा, ‘इसमें मुख्यत: धारा 49 (ए) के अंतर्गत जहरीली शराब से संबंधित अपराधों के लिए दंड का प्रावधान है. यदि जहरीली शराब के सेवन से किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है तो इस अपराध के लिए दोषी को आजीवन कारावास या मृत्युदंड और न्यूनतम 20 लाख रुपये तक का जुर्माना का प्रावधान किया गया है.’

मिश्रा ने बताया कि इससे अवैध शराब के व्यापार और जहरीली शराब से होने वाली मौत से संबंधित अपराधों पर नियंत्रण बढ़ेगा.

उन्होंने कहा कि मौजूदा कानून में जहरीली शराब के सेवन से होने वाली मौत से संबंधित मामलों में दोषियों को पांच से अधिकतम दस साल कैद की सजा दी जा सकती है तथा जुर्माना की राशि भी 10 लाख रुपये तक है.

मिश्रा ने कहा, ‘इस संशोधन के जरिए प्रदेश के आबकारी कानून को और सख्त बनाया जा रहा है.’

इसी बीच, मध्य प्रदेश जनसंपर्क विभाग की विज्ञप्ति के अनुसार इस संशोधन विधेयक में मानवीय उपयोग के लिए अनुपयुक्त अपमिश्रित मदिरा सेवन से शारीरिक क्षति होने पर पहली बार में न्यूनतम दो वर्ष और अधिकतम आठ वर्ष तक का कारावास और न्यूनतम दो लाख रुपये तक का जुर्माना तथा दूसरी बार अपराध करने पर न्यूनतम 10 वर्ष और अधिकतम 14 वर्ष तक का कारावास और न्यूनतम 10 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया है.

इसी तरह मानवीय उपयोग के लिए अनुपयुक्त अपमिश्रित मदिरा मिलने पर पहली बार में न्यूनतम छह माह और अधिकतम छह वर्ष तक का कारावास और न्यूनतम एक लाख रुपये तक का जुर्माना तथा दूसरी बार अपराध करने पर न्यूनतम छह वर्ष और अधिकतम 10 वर्ष तक का कारावास और न्यूनतम पांच लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है.

विज्ञप्ति के अनुसार, किसी आबकारी अधिकारी द्वारा किसी भी ऐसे व्यक्ति को जो अधिनियम के अंतर्गत कर्तव्य निष्पादन में बाधा डाले या हमला करे, उसे गिरफ्तार भी किया जा सकेगा.

प्रदेश में महुआ आधारित मदिरा को मुख्य धारा में लाने के लिए उसे हैरिटेज (पारंपरिक) मदिरा का दर्जा दिए जाने का निर्णय लिया गया है. इसके नियंत्रित निर्माण एवं विक्रय के लिए विभाग द्वारा नियम निर्धारित किए जाएंगे.

इससे महुआ से निर्मित मदिरा के लघु उद्योग प्रोत्साहित होंगे. अधिनियम में पहले से प्रावधानित आदिवासियों के अधिकार यथावत सुरक्षित रखे जायेंगे.

गृहमंत्री ने कहा, ‘ये प्रावधान अवैध शराब के कारोबार में शामिल लोगों को हतोत्साहित करेंगे और इससे लोगों की जान बचाई जा सकती है.’

इससे पहले मध्य प्रदेश सरकार ने सोमवार को नकली शराब की तस्करी और कारोबार को रोकने के लिए शराब की बोतलों पर 20 से अधिक सुरक्षा मानकों वाले क्यूआर कोड होलोग्राम लगाने का निर्णय लिया था.

इसी बीच, मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने ट्वीट कर कहा कि केवल कानून बनाने से माफियाओं का खात्मा नहीं हो जाता, उसका क्रियान्वयन भी बहुत जरूरी है.

उन्होंने ट्वीट कर कहा, ‘केवल कानून बनाने से माफिया कभी खत्म नहीं होगा. कानून का क्रियान्वयन बेहद आवश्यक है. सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति नज़र आना चाहिए. कड़े क़ानून की बात तो बहन-बेटियों की सुरक्षा को लेकर भी सरकार द्वारा वर्षों से की जा रही है लेकिन प्रदेश में आज भी बहन-बेटियां सुरक्षित नहीं हैं.’

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)