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महामारी के दौरान आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के ख़िलाफ़ हिंसा की शिकायत की कोई सूचना नहीं: सरकार

महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने लोकसभा में कहा कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना राज्य प्रशासन का कर्तव्य है. एक अन्य प्रश्न के जवाब में उन्होंने बताया कि देश में बाल विकास परियोजना अधिकारी के 2,191 पद और आंगनवाड़ी महिला निरीक्षक के 16,970 पद रिक्त हैं.

महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: देश में बाल विकास परियोजना अधिकारी (सीडीपीओ) के 2,191 पद और आंगनवाड़ी महिला निरीक्षक के 16,970 पद रिक्त हैं. महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी द्वारा लोकसभा में राहुल गांधी के प्रश्न के लिखित उत्तर में पेश किए गए आंकड़ों से यह जानकारी मिली है.

स्मृति ईरानी ने अपने लिखित उत्तर में यह भी बताया कि किसी राज्य ने मंत्रालय को महामारी के दौरान आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के खिलाफ हिंसा की शिकायत की कोई सूचना नहीं दी है. उन्होंने कहा कि यह राज्य प्रशासन का कर्तव्य है कि वह आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायकों की सुरक्षा सुनिश्चित करे.

उन्होंने कहा कि आंगनवाड़ी सेवाएं केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसे राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा लागू किया जाता है.

वायनाड से सांसद राहुल गांधी ने जानना चाहा था कि क्या आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायकों को कोविड से जुड़े कार्यों के लिए अतिरिक्त मानदेय दिया जाता है?

उन्होंने यह भी पूछा था कि क्या महामारी के दौरान आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के खिलाफ हिंसा की कोई शिकायत मिली है, साथ ही देश में बाल विकास परियोजना अधिकारी और आंगनवाड़ी महिला सुपरवाइजर के कितने पद रिक्त हैं.

इसके जवाब में केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा, ‘किसी राज्य ने मंत्रालय को ऐसी किसी घटना (महामारी के दौरान आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के खिलाफ हिंसा की शिकायत) की सूचना नहीं दी है. हालांकि आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायकों की सुरक्षा का दायित्व राज्य प्रशासन पर है.’

ईरानी द्वारा सदन में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, बाल विकास परियोजना अधिकारी (सीडीपीओ) के कुल मंजूर 7,075 पदों में से 2,191 पद रिक्त हैं, जबकि आंगनवाड़ी महिला निरीक्षक के कुल मंजूर 51,312 पदों में से 16,970 पद रिक्त हैं.

उन्होंने कहा कि समय-समय पर राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों को रिक्त पदों को भरने का सुझाव दिया जाता है, ताकि योजना को प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके.

महिला एवं बाल विकास मंत्री ने बताया कि सरकार ने एक अक्तूबर 2018 को आंगनवाड़ी कर्मियों के मानदेय को 3,000 रुपये प्रति माह से बढ़ाकर 5,000 रुपये प्रति माह कर दिया और आंगनवाड़ी सहायकों का मानदेय 1,500 रुपये प्रति माह से बढ़ाकर 2,250 रुपये प्रति माह कर दिया गया था तथा प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन राशि के रूप में 250 रुपये प्रति माह देने का प्रावधान भी किया गया.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, एक अन्य प्रश्न के उत्तर में ईरानी ने कहा कि एकीकृत बाल विकास सेवा- रैपिड रिपोर्टिंग सिस्टम पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार, 31 दिसंबर, 2020 तक आंगनवाड़ी सेवाओं (तत्कालीन एकीकृत बाल विकास योजना) तक पहुंचने वाले आदिवासी बच्चों की संख्या 83,91,638 थी.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)