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केंद्र ने जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट में जज की नियुक्ति के लिए कॉलेजियम की सिफारिश खारिज की

केंद्र सरकार द्वारा पिछले दो सालों में जम्मू और कश्मीर हाईकोर्ट में नियुक्ति पर सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिशों को वापस करने का यह चौथा मामला है.

जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट. (फोटो साभार: फेसबुक)

नई दिल्लीः केंद्र सरकार ने जम्मू और कश्मीर हाईकोर्ट के जज के पद पर अधिवक्ता मोक्ष खजुरिआ-काजमी की नियुक्ति करने की सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश को खारिज कर दिया है.

केंद्र सरकार का दो सालों में जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट में नियुक्ति पर सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिशों को वापस करने का यह चौथा मामला है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, 15 अक्टूबर 2019 को चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता में सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट में जजों के लिए दो वकीलों खजुरिआ-काजमी और रजनीश ओसवाल की नियुक्ति की सिफारिश की थी. सरकार ने ओसवाल के नाम को मंजूरी दे दी थी, जो अप्रैल 2020 में जज के तौर पर नियुक्त हुए जबकि काजमी की फाइल लंबित थी.

सूत्रों ने पिछले महीने बताया था कि कानून मंत्रालय ने बिना कोई कारण बताए पुनर्विचार के लिए खजुरिआ काजमी का नाम सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम को लौटा दिया था.

खजुरिआ-काजमी वरिष्ठ अधिवक्ता हैं, जो साल 2016 में राज्यपाल शासन के दौरान एडिशनल एडवोकेट जनरल के तौर पर नियुक्त किए गए थे और बाद में जम्मू कश्मीर में महबूबा मुफ्ती की अगुवाई में पीडीपी-भाजपा सरकार के दौरान भी कार्यरत थे.

मार्च 2019 में जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट की तत्कालीन चीफ जस्टिस गीता मित्तल की अध्यक्षता में जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट कॉलेजियम ने चार अधिवक्ताओं खजुरिआ-काजमी, ओसवाल, जावेद इकबाल वानी और राहुल भारती की नियुक्ति के लिए प्रक्रिया शुरू की थी.

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने सबसे पहले 15 अक्टूबर 2019 को खजुरिआ-काजमी और ओसवाल, 22 जनवरी 2019 को वानी फिर दो मार्च 2021 को राहुल भारती की नियुक्ति की सिफारिश की थी.

वानी जून 2020 में हाईकोर्ट के जज नियुक्त किए गए थे जबकि राहुल भारती की फाइल अभी भी केंद्र सरकार के पास लंबित पड़ी है.

इस बीच खजुरिआ-काजमी के बाद तीन अन्य न्यायिक अधिकारियों की भी सिफारिश की गई और जज विनोद कौल, संजय धर और पुनीत गुप्ता को हाईकोर्ट में नियुक्त किया गया.

इससे पहले केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की तीन अन्य सिफारिशें भी लौटा दी थी, जिसमें अधिवक्ता वसीम सादिक नारगल, नजीर अहमद बेग, शौकत अहमद मकरू की हाईकोर्ट में नियुक्ति की सिफारिश की गई थी.

अप्रैल 2018 में तत्कालीन सीजेआई दीपक मिश्रा, जस्टिस जे. चेलमेश्वर और गोगोई सहित सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने हाईकोर्ट जज के रूप में नियुक्ति के लिए चार वकीलों और एक न्यायिक अधिकारी की सिफारिश की थी.

नरगल, बेग और मकरु के अलावा सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने अधिवक्ता सिंधु शर्मा और न्यायिक अधिकारी राशिद अली धर की नियुक्ति की भी सिफारिश की थी. धर और शर्मा को जज के पद पर नियुक्त किया गया, जबकि केंद्र सरकार अन्य तीन की फाइलें लौटा दी थीं.

हाईकोर्ट के जज की नियुक्ति के लिए प्रस्ताव हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस द्वारा शुरू किया जाता है और चीफ जस्टिस के प्रस्ताव की कॉपी राज्यपाल को भेजी जाती है और इसे सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस और केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री के पास भी भेजा जाता है.

राज्यपाल की सिफारिशों सहित पूरी सामग्री कानून मंत्रालय द्वारा सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम के समक्ष रखी जाती है, जो नामों की सिफारिशों के लिए अंतिम विचार करता है और इन जजों की नियुक्ति के लिए नाम राष्ट्रपति को भेजता है.

अगर सरकार फाइल लौटा देती है तो कॉलेजियम या तो अपने फैसले पर अडिग रहता है या उसे वापस ले लेता है, लेकिन अगर कॉलेजियम अपने फैसले पर बना रहता है तो इसे मानना सरकार के लिए बाध्यकारी हो जाता है.

जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट में 13 स्थाई जजों और चार अतिरिक्त न्यायाधीशों सहित 17 जज होते हैं लेकिन वर्तमान में हाईकोर्ट में 11 जज ही हैं.