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गौरी लंकेश हत्याकांडः हाईकोर्ट के फ़ैसले के ख़िलाफ़ याचिका पर सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट

वरिष्ठ पत्रकार गौरी लंकेश हत्या के मामले में उनकी बहन कविता लंकेश ने आरोपियों में से एक मोहन नायक के ख़िलाफ़ कर्नाटक संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम के तहत लगाए गए आरोपों को ख़ारिज करने के कर्नाटक हाईकोर्ट के निर्णय को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है.

तस्वीर: पीटीआई

नई दिल्लीः सुप्रीम कोर्ट वरिष्ठ पत्रकार गौरी लंकेश हत्या के मामले में उनकी बहन कविता लंकेश की याचिका पर सुनवाई करेगा. गौरी लंकेश की 2017 में बेंगलुरू में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी.

इस मामले में उनकी बहन कविता लंकेश ने आरोपियों में से एक मोहन नायक के खिलाफ कर्नाटक संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (केसीओसीए) के तहत लगाए गए आरोपों को खारिज करने के कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी है.

सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई आठ सितंबर को सूचीबद्ध की है.

जस्टिस एएम खानविलकर की अध्यक्षता में पीठ ने जून महीने में कर्नाटक सरकार को नोटिस जारी किया था. उसी समय अदालत ने यह भी कहा था कि जब तक कविता की याचिका पर फैसला नहीं हो जाता, तब तक आरोपी को तब तक जमानत नहीं दी जानी चाहिए.

आरोपी के वकील ने मामले पर जल्द सुनवाई की मांग करते हुए कहा था कि उनका मुवक्किल तीन सालों से जेल में बंद हैं.

बता दें कि पांच सितंबर 2017 को बेंगलुरू में अपने घर के बाहर ही गौरी को गोली मार दी गई थी.

लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, उनकी बहन ने अपनी याचिका में कहा है कि आरोपी के खिलाफ से केसीओसीए के आरोप नहीं हटाए जाने चाहिए थे.

कविता लंकेश ने कहा कि विशेष जांच दल (एसआईटी) की जांच से स्पष्ट तौर पर पता चला है कि आरोपी संगठित अपराध सिंडिकेट में शामिल थे.

एसआईटी के मुताबिक, यही सिंडिकेट नरेंद्र दाभोलकर और गोविंद पानसरे की हत्या के लिए भी जिम्मेदार है.

गौरी लंकेश हत्या मामले में आरोपी नायक को अमोल काले और राजेश बांगेरा का करीबी सहयोगी माना जाता है और दोनों ही इस मामले में मुख्य आरोपी हैं.

कविता लंकेश की याचिका के मुताबिक, नायक ने सक्रिय तौर पर मुख्य आरोपियों को पनाह दी थी और वह लगातार अवैध गतिविधियों में शामिल था.

अप्रैल 2021 में कर्नाटक हाईकोर्ट ने बेंगलुरू के पुलिस आयुक्त की रिपोर्ट और मामले में पूरक चार्जशीट रद्द कर दी थी, जिसकी वजह से नायक पर लगे केसीओसीए के आरोप हटा लिए गए थे.

कविता की याचिका में कहा गया है कि हाईकोर्ट ने धारा 24 केसीओसीए की जांच नहीं करके गलती की. इसमें कहा गया है कि अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक के पद से नीचे के किसी भी अधिकारी को पूर्व मंजूरी नहीं दी जानी चाहिए.

याचिका में यह भी कहा गया कि हाईकोर्ट इस तथ्य को समझने में असफल रहा कि धारा 24 (2) केसीओसीए के तहत मंजूरी आदेश को चुनौती नहीं दी गई और केवल धारा 24 (1) (ए) के तहत आदेश को चुनौती दी गई है.

कविता के बाद कर्नाटक पुलिस ने भी केसीओसीए के आरोप हटाए जान के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है.

गौरी लंकेश हत्याकांड की जांच कर रही एसआईटी ने अब तक इस मामले में 17 लोगों को गिरफ्तार किया है और ये सभी लोग अति दक्षिणपंथी हिंदू समूहों से जुड़े हुए हैं.

हाईकोर्ट द्वारा केसीओसीए के आरोप हटाए जाने के बाद नायक ने जमानत के लिए इसी अदालत का रुख किया था. याचिका को जुलाई में खारिज किया गया था. अदालत ने कहा था कि जिन आधारों पर आरोपी जमानत चाहते हैं, वे लागू नहीं होते.

गौरतलब है कि पांच सितंबर, 2017 को  बेंगलुरु स्थित घर के पास ही लंकेश को रात करीब 8:00 बजे तब गोली मार दी गई थी जब वे कार पार्क करने के लिए अपने घर का दरवाज़ा खोल रहीं थी. उन्हें हिंदुत्व के खिलाफ आलोचनात्मक रुख रखने के लिए जाना जाता था.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.)