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अमेरिका पर अफ़ग़ान पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की ज़िम्मेदारी: सीपीजे

बीते 15 अगस्त को तालिबान के अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल में प्रवेश करने के बाद से ही ‘अफ़ग़ानिस्तान नेशनल रेडियो और टेलीविजन’ (आरटीए) ने सीधा प्रसारण बंद कर कर्मचारियों को घर भेज दिया था. शमशाद टीवी और तोलो टीवी के सुरक्षा गार्डों को नि:शस्त्र कर दिया गया और तोलो टीवी का सीधा प्रसारण या कार्यक्रम नहीं हो रहे हैं.

अफ़ग़ानिस्तान के काबुल में गृह मंत्रालय के बाहर तैनात तालिबानी लड़ाके. (फोटो रॉयटर्स)

नई दिल्ली/न्यूयॉर्क: अफगानिस्तान में तालिबान के तेजी से सत्ता पर कब्जा जमाने के कारण समाचार संगठन इस घटना को कवर करने के साथ ही अपने पत्रकारों और परिवारों की रक्षा करने तथा पिछले दो दशकों में उनके साथ काम करने वाले लोगों की मदद करने की कोशिश कर रहे हैं.

‘कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स’ (सीपीजे) नामक संगठन ने कहा है कि अमेरिका पर अफगान पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की विशेष जिम्मेदारी है और इसलिए पत्रकारों को आपातकालीन वीजा देने जैसे कदम उठाने चाहिए.

सीपीजे ने इस पर जोर दिया कि अफगानिस्तान में जो कुछ भी हो रहा है उसे समझने के लिए यह जरूरी है कि उस प्रेस की सुरक्षा की जाए, जो एक समय वहां स्वतंत्र थी.

सोमवार को जारी एक प्रेस वक्तव्य में सीपीजे ने कहा कि वह सैकड़ों स्थानीय पत्रकारों और मीडियाकर्मियों की सुरक्षा के प्रति चिंतित है, जिन्हें तालिबान अपना निशाना बना सकता है.

पिछले महीने, तालिबान ने पुलित्जर पुरस्कार विजेता फोटो पत्रकार दानिश सिद्दीकी को मार दिया था, जो समाचार एजेंसी रॉयटर्स के लिए काम करते थे. उस समय सिद्दीकी, दक्षिणी कंधार प्रांत में तालिबान और अफगान सुरक्षा बलों के बीच झड़प को कवर कर रहे थे जब उन्हें मार दिया गया.

तालिबान ने 15 अगस्त को अफगानिस्तान की राजधानी काबुल पर कब्जा कर लिया और अफगान राष्ट्रपति अशरफ गनी देश छोड़ भाग गए थे.

खामा न्यूज के मुताबिक, तालिबान के काबुल में प्रवेश करने के बाद से ही ‘अफगानिस्तान नेशनल रेडियो और टेलीविजन’ (आरटीए) ने सीधा प्रसारण बंद कर दिया था और कर्मचारियों को घर भेज दिया गया था.

शमशाद टीवी और तोलो टीवी के सुरक्षा गार्डों को निशस्त्र कर दिया गया और तोलो टीवी का सीधा प्रसारण या कार्यक्रम नहीं हो रहे हैं.

खबर के अनुसार, चैनलों पर तालिबान का कब्जा हो गया है, इसलिए प्रवेश पर गार्ड रखने की कोई जरूरत नहीं है.

सीपीजे ने कहा कि अफगान पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अमेरिका को और अधिक प्रयास करना होगा, क्योंकि देश अब तालिबान के कब्जे में है.

सीपीजे ने कहा कि अमेरिका को पत्रकारों को देश से सुरक्षित बाहर निकालना चाहिए और उन्हें आपातकालीन वीजा दिया जाना चाहिए.

बयान में कहा गया है कि प्रमुख अमेरिकी प्रकाशनों- द न्यूयॉर्क टाइम्स, द वॉशिंगटन पोस्ट और द वॉल स्ट्रीट जर्नल के साथ काम करने वाले अफगान पत्रकार देश से बाहर जाने वाले विमान में सवार हो पाने में असमर्थ रहे हैं.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, सीपीजे की आपात निदेशक मारिया सालाज़ार-फेरो ने कहा कि उन्होंने अफगानिस्तान में 475 पत्रकारों- जो स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय दोनों समाचार संगठनों के लिए काम करते हैं, को वहां से निकालने के लिए सरकारों से अनुरोध किया है.

उन्होंने कहा कि सीपीजे कनाडा, फ्रांस, जर्मनी और ब्रिटेन की सरकारों के साथ अमेरिकी सेना के साथ काम कर रहा है, ताकि इनमें से कुछ पत्रकारों और उनके परिवारों के लिए लैंडिंग प्लेस की तलाश की जा सके.

उन्होंने कहा कि उन्होंने तालिबान सैनिकों के एक विशिष्ट अफगान पत्रकार की तलाश में घरों में जाने की दो रिपोर्ट सुनी है. वह पत्रकारों को देश छोड़ने की सलाह दे रही हैं, लेकिन उड़ानें बंद होने की वजह से अभी सबसे अच्छी सलाह यह है कि वे सुरक्षित जगह पर रहें और प्रतीक्षा करें कि स्थितियां कैसे बदल रही हैं.

समाचार एजेंसी एपी ने कहा कि अस्थिर देशों में पत्रकारों के लिए सुरक्षा हमेशा एक चिंता का विषय है. अब अफगानिस्तान में, पहले इराक में खतरा था. न केवल पत्रकार बल्कि ड्राइवर, अनुवादक और अन्य- जिन्होंने 20 वर्षों से विभिन्न बिंदुओं पर समाचार संगठनों की मदद की, सुरक्षा की जरूरत है.

एपी वर्तमान और पूर्व कर्मचारियों, फ्रीलांसरों और उनके परिवारों सहित सैकड़ों लोगों के लिए वीजा की मांग कर रहा है.

एपी के उपाध्यक्ष इयान फिलिप्स ने कहा, ‘यह एक नैतिक कर्तव्य है, अंतरराष्ट्रीय समाचार के लिए वे अब हमारे लिए काम नहीं कर सकते हैं, लेकिन उन्होंने कठिन वर्षों में हमारे लिए काम किया है.’

एपी ने सोमवार को अमेरिका के बाइडन प्रशासन से काबुल में और अधिक वाणिज्यिक उड़ानों को उतरने अनुमति देने और पत्रकारों, सहायक कर्मचारियों और उनके परिवारों को देश से निकालने के लिए चार्टर उड़ानों के लिए हवाईअड्डे के सैन्य पक्ष तक पहुंच की अनुमति देने की मांग की.

एपी के पाकिस्तान और अफगानिस्तान के समाचार निदेशक कैथी गैनन ने कहा कि कई पूर्व कर्मचारी अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं. कुछ इस बात से भी चिंतित हैं कि तालिबान के नियंत्रण में उनके देश के लिए आर्थिक रूप से भविष्य क्या होगा.

गैनन ने कहा, ‘मुझे लगता है कि लोगों को यह नहीं पता कि कितने कठिन निर्णय हैं- वास्तव में कठिन निर्णय है.’

सीपीजे की सालाज़ार-फेरो ने कहा, ‘अभी पत्रकारों के लिए वहां रहना सुरक्षित नहीं है, खासकर कर महिला पत्रकारों के लिए.’

अफगानिस्तान से एक साक्षात्कार में सीएनएन की रिपोर्टर क्लेरिसा वार्ड ने कहा कि कुछ तालिबान लड़ाके भी यह देखकर हैरान है कि देश कितनी जल्दी उनके सामने पस्त हो गया.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, देश के भविष्य को लेकर काबुल की सड़कों पर साफ दिख रही अनिश्चितताओं पर क्लेरिसा वार्ड रिपोर्ट कर रही थीं. एक जगह, वो ये बोलती हैं कि उस रिपोर्ट को शूट करने के लिए तालिबान ने सीएनएन को अनुमति दी थी. लेकिन उन्हें बगल में खड़े रहने के लिए कहा गया, क्योंकि ‘वो महिला हैं’.

उन्होंने अपने पहनावे को यूं बदल लिया जो सांस्कृतिक तौर पर ज्यादा परंपरागत ताकतों द्वारा कब्जे को प्रतिबिंबित कर रहा था. उन्होंने सिर को कपड़े से यूं कस लिया, जिससे कि उनके बाल छुप जाएं.

समाचार संगठन लगातार अपनी सुरक्षा आवश्यकताओं का आकलन कर रहे हैं.

एनबीसी न्यूज के रिचर्ड एंजल ने कहा कि उनके कर्मचारी अपने कार्यालय से बाहर एक सुरक्षित स्थान पर आ गए हैं. सीबीएस न्यूज की रोक्साना साबेरी ने सोमवार को अपने होटल के कमरे से काम किया.

सोमवार को वॉशिंगटन पोस्ट के प्रकाशक और सीईओ फ्रेड रयान ने बाइडन प्रशासन से 200 से अधिक कर्मचारियों और उनके लिए काम करने वाले लोगों के परिवारों की तरफ से मदद की गुहार लगाई. सुरक्षा कारणों से वे काबुल हवाईअड्डे के असैन्य क्षेत्र से सैन्य क्षेत्र में जाना चाहते हैं.

‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ के अध्यक्ष और प्रकाशक एजी सुल्जबर्जर ने कहा कि घटनाक्रम ने खतरनाक स्थिति पैदा कर दी है. उन्होंने कहा, ‘मैं आपको आश्वस्त करना चाहता हूं कि हम अपने कर्मचारियों और उनके परिवारों को बाहर निकालने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहे हैं.’

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)