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ईडी प्रमुख का कार्यकाल अनिश्चितकाल तक बढ़ाना जारी नहीं रख सकतेः सुप्रीम कोर्ट

एनजीओ कॉमन कॉज़ ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर ईडी प्रमुख संजय कुमार मिश्रा के कार्यकाल को बढ़ाकर 18 नवंबर 2021 तक किए जाने के केंद्र सरकार के फ़ैसले को चुनौती दी है. 19 नवंबर 2018 को उनका कार्यकाल दो साल तय किया गया था. नवंबर 2020 में कार्यकाल के कुछ ही दिन शेष रहने पर सरकार ने वास्तविक नियुक्ति आदेश में संशोधन कर उसे तीन साल कर दिया था.

(फोटो: पीटीआई)

नई दिल्लीः  सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि सभी महत्वपूर्ण मामलों की जांच पूरी होने तक केंद्र सरकार प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) प्रमुख के कार्यकाल में विस्तार को जारी नहीं रख सकती.

अदालत को इससे पहले बताया गया था कि ईडी के मौजूदा प्रमुख की अगुवाई में मनी लॉन्ड्रिंग के महत्वपूर्ण मामलों में सफलता एक साल के लिए उनके कार्यकाल विस्तार के प्रमुख कारणों में से एक है.

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अदालत गैर सरकारी संगठन ‘कॉमन कॉज’ की याचिका पर सुनवाई कर रही थी.

‘कॉमन कॉज’ ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर ईडी प्रमुख संजय कुमार मिश्रा के कार्यकाल को बढ़ाकर 18 नवंबर 2021 तक किए जाने के केंद्र सरकार के 13 नवंबर 2020 के फैसले को चुनौती दी थी.

19 नवंबर 2018 के आदेश में उनका कार्यकाल दो साल का तय किया गया था. नवंबर 2020 में उनके कार्यकाल में कुछ ही दिन शेष रहने पर सरकार ने वास्तविक नियुक्ति आदेश में उनके कार्यकाल में संशोधन कर तीन साल कर दिया.

मई 2020 में मिश्रा को रिटायर होना था.

याचिका पर सुनवाई के दौरान जस्टिस एल. नागेश्वर राव और जस्टिस बीआर गवई की पीठ ने कहा कि इसकी जांच होनी चाहिए कि क्या मिश्रा के तीन साल के कार्यकाल का फैसला सुप्रीम कोर्ट के 1997 के फैसले के विपरीत है, जिसमें ईडी और केंद्रीय जांच ब्यूरो के प्रमुखों के लिए न्यूनतम दो साल का कार्यकाल निर्धारित किया है.

पीठ ने इस पर भी विचार किया कि क्या सेवानिवृत्ति के बाद कार्यकाल में विस्तार ऑल इंडिया सर्विस रूल्स के नियम 56 के खिलाफ है, जिसमें कहा गया है कि सभी सरकारी कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति उम्र 60 वर्ष है.

मामले में सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, ‘ केंद्रीय सतर्कता आयोग अधिनियम में बना और अदालत का 1997 के फैसले को धारा 25 (डी) में शामिल किया गया है, जिसमें कहा गया है, विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम 1999 या इस समय लागू किसी भी कानून में प्रवर्तन निदेशक पदभार संभाले जाने के बाद से कम से कम दो वर्ष की अवधि तक पद पर बने रहेंगे.’

उन्होंने कहा कि 1997 के फैसले में न्यूनतम कार्यकाल का प्रावधान है, इसमें दो साल से अधिक के कार्यकाल को लेकर कुछ नहीं कहा गया है.

मेहता ने कहा कि केंद्रीय सतर्कता आयोग अधिनियम की धारा 25 (डी) नियम 56 को निरस्त करती है.

मेहता ने कहा कि नियुक्ति अकस्मात और सरकार की इच्छाओं पर भी आधारित नहीं थी, जैसा कि याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में बताया है.

उन्होंने कहा कि मिश्रा के कार्यकाल विस्तार की सिफारिश से पहले केंद्रीय सतर्कता आयोग की अध्यक्षता में एक समिति ने उनके दस सालों के पेशेवर रिकॉर्ड की जांच की थी.

पीठ ने कहा, ‘हम सराहना करते हैं कि वह अच्छा काम कर रहे हैं लेकिन जब तक इन सभी मामलों की जांच पूरी नहीं हो जाती, आप उनका कार्यकाल लगातार जारी नहीं रख सकते. ईडी का काम बहुत महत्वपूर्ण है. इसे पूरा करने के लिए आप इसकी जिम्मेदारी सिर्फ एक शख्स पर नहीं डाल सकते.’