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‘मोटी रकम वसूलने वाले स्कूल सुरक्षा निर्देशों का पालन नहीं कर रहे हैं’

बच्चों की सुरक्षा में लापरवाही पर स्कूल प्रबंधन की ज़िम्मेदारी तय होने और संबंद्धता रद्द होने तक के प्रावधान हैं, लेकिन सीबीएसई के दिशानिर्देशों का पालन नहीं हो रहा है.

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गुरुग्राम के रेयान इंटरनेशनल स्कूल के बाहर सुरक्षाकर्मी. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: दिल्ली के एक जाने माने स्कूल में एक पांच साल की बच्ची से कथित बलात्कार, गुरुग्राम के निजी स्कूल में मासूम छात्र की नृशंस हत्या और गाजियाबाद के एक अन्य निजी स्कूल की बस से कुचल कर एक बच्ची की मौत के बाद स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं और स्कूलों द्वारा सीबीएसई के दिशानिर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करने की व्यवस्था पर भी सवालिया निशाल लग रहे हैं.

बच्चों को स्कूल लाने और घर पहुंचाने के दौरान सुरक्षा के संबंध में कुछ स्कूलों की लापरवाही पर संज्ञान लेते हुए केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने फरवरी में एक परिपत्र जारी कर चेताया था कि बच्चों की सुरक्षा के संबंध में किसी लापरवाही के लिए स्कूल के प्रबंधन एवं प्रमुख को जिम्मेदार ठहराया जाएगा. इसके साथ ही दोषी पाये गए स्कूलों की बोर्ड से संबद्धता भी रद्द की जा सकती है.

लापरवाही पर कार्रवाई के लिए नहीं है तंत्र

शिक्षाविद पीके मित्तल ने सवाल उठाया कि क्या सीबीएसई की ओर से जारी दिशानिर्देशों का पालन किया जाता है. बोर्ड के दिशानिर्देश का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए क्या कोई तंत्र स्थापित किया गया है दिशानिर्देशों का अनुपालन नहीं होने पर किस तरह की कार्रवाई की जाती है? रेयान इंटरनेशनल स्कूल की यह निर्मम घटना अकेली नहीं है बल्कि यह घटना ऐसी श्रृंखला की कड़ी है. अभिभावकों को तो इन सवालों के जवाब चाहिए.

सेंटर फार लीगल ऐड रिसर्च एंड ट्रेंनिंग के संयोजक के के झा ने कहा कि निजी स्कूल अभिभावकों से मोटी रकम फीस एवं अन्य विकास मद में वसूलते हैं लेकिन आज स्कूलों में बच्चे सुरक्षित नहीं है. स्कूलों में सीसीटीवी कैमरा नहीं हैं, कर्मचारियों के सत्यापन की समुचित व्यवस्था नहीं है, बच्चों को बस से स्कूल की कक्षा तक जाने और फिर कक्षा से बस तक पहुंचाने का कोई व्यवस्थित प्रारूप नहीं है.

कागजी हैं सीबीएसई के दिशानिर्देश

उन्होंने आरोप लगाया कि इस बारे में सीबीएसई के दिशानिर्देश केवल कागजी कार्यवाही बन कर रह गए है और स्कूल इनका अनुपालन नहीं करते हैं. बहरहाल, सीबीएसई के उप सचिव के श्रीनिवासन की ओर से स्कूल बसों में बच्चों की सुरक्षा के संबंध में जारी परिपत्र में कहा गया था कि बोर्ड हमेशा से छात्र केंद्रित नीतियों को आगे बढाने की वकालत करता रहा है और उसका पाठ्यक्रम, पाठ्येत्तर विषयों, स्वास्थ्य संबंधी पहल के साथ बच्चों के व्यक्तित्व के सम्पूर्ण विकास पर जोर देता रहा है. वह इस संबंध में समय समय पर परिपत्र जारी करता है.

बोर्ड ने कहा था कि एमसी मेहता बनाम यूनियन आॅफ इंडिया एवं अन्य मामले में 16 दिसंबर 1997 को उच्चतम न्यायालय ने इस मुद्दे की गंभीरता को देखते हुए इस बारे में आदेश जारी किया था, जिसमें बच्चों को ले जाने वाली बसों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के बारे में दिशानिर्देश शामिल हैं.

हालांकि मीडिया में बच्चों को स्कूल लाने और घर पहुंचाने के दौरान सुरक्षा के संबंध में कुछ स्कूलों की लापरवाही की घटनाओं की खबरें आई हैं और इनसे स्कूली बच्चों की सुरक्षा के बारे में गहरी चिंताएं भी सामने आई हैं.

संबद्धता रद्द करने तक का है प्रावधान

सीबीएसई के परिपत्र में कहा गया था कि बच्चों की सुरक्षा के संबंध में किसी लापरवाही के लिए स्कूल के प्रबंधन एवं प्राचार्य को जिम्मेदार ठहराया जाएगा. इनके खिलाफ उपयुक्त कार्रवाई की जाएगी जिसमें नियमों के तहत स्कूलों की बोर्ड से संबद्धता भी रद्द की जा सकती है.

सीबीएसई ने कहा कि बोर्ड के संबद्धता नियमों एवं विभिन्न परिपत्रों में इस बारे में विस्तार से उल्लेख किया गया है और जिसमें स्कूलों को बच्चों को लाने और घर पहुंचाने के दौरान सुरक्षा अनुपालन की बात स्पष्ट की गई है.

इसमें कहा गया है कि अभिभावकों की ओर से स्कूलों में व्यक्त किया गया विश्वास, भरोसा और जिम्मेदारी पवित्र है और इसे देश के युवा नागरिकों के पोषण के संदर्भ में प्रत्येक स्कूल का मार्गदर्शक बनना चाहिए. परिपत्र में कहा गया है कि उच्चतम न्यायालय के आदेश को ध्यान में रखते हुए इन दिशानिर्देशों का पूरी तरह से पालन किया जाना चाहिए.

बोर्ड ने कहा है कि समय आ गया है कि स्कूलों को इस मुद्दे को गंभीरता से लेना चाहिए और बच्चों की सुरक्षा को सर्वोपरि मानते हुए स्कूल परिवहन में इस बारे में जरूरी उपाय सुनिश्चित करना चाहिए.

निजी स्कूल नहीं कराते हैं कर्मचारियों का पुलिस सत्यापन

गुरुग्राम के एक निजी स्कूल में सात साल के बच्चे की नृशंस हत्या के बाद राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) और बाल अधिकार संगठनों का कहना है कि ज्यादातर निजी स्कूल सुरक्षा दिशानिर्देशों का उल्लंघन करते हैं और अपने कर्मचारियों का पुलिस सत्यापन तक नहीं कराते हैं.

बीते शुक्रवार को गुरुग्राम के रेयान इंटरनेशनल स्कूल में सात साल के बच्चे की हत्या की सनसनीखेज घटना सामने आने के बाद एनसीपीसीआर के एक दल ने स्कूल का दौरा किया और पाया कि इस मामले में स्कूल प्रबंधन की लापरवाही स्पष्ट तौर पर नजर आती है.

एनसीपीसीआर के सदस्य प्रियांक कानूनगो ने कहा, यह बहुत अफसोसजनक है कि स्कूल बच्चों की सुरक्षा से जुड़े दिशानिर्देशों का सही से क्रियान्वयन नहीं कर रहे हैं. यह देखा गया कि इस स्कूल ने कर्मचारियों का पुलिस सत्यापन भी नहीं कराया था. निजी स्कूलों में यह बड़ी समस्या है और इस पर अंकुश लगाने की जरूरत है. उन्होंने कहा, बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़ को स्वीकार नहीं किया जा सकता. हम राज्य प्रशासनों और शिक्षा बोर्डों से कहना चाहते हैं कि वे स्कूलों में सुरक्षा दिशानिर्देशों का सख्ती से क्रियान्वयन सुनिश्चित करें.

कानूनगो ने कहा, सुरक्षा दिशानिर्देशों का उचित क्रियान्वयन नहीं हो पाने के लिए व्यवस्था से जुड़ी हर इकाई जिम्मेदार है. राज्य प्रशासन, जिला प्रशासन और शिक्षा बोर्डों तथा हम सभी कहीं न कहीं इसके लिए जिम्मेदार हैं. हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी बनती है, इसलिए हम सभी को इसके उचित क्रियान्वयन के लिए सामूहिक प्रयास करने होंगे. उन्होंने कहा कि आयोग की तरफ से सुरक्षा दिशानिर्देशों के अनुपालन के संदर्भ में प्रशासनों और बोर्डों को कई बार लिखा जा चुका है, लेकिन इसका कोई खास असर नहीं दिख रहा है.

बाल अधिकार कार्यकर्ता और वर्ल्ड फॉर इेलिटी नामक संगठन से जुड़े वरुण पाठक का कहना है कि निजी स्कूल सुरक्षा दिशानिर्देशों की सरेआम धज्जियां उड़ा रहे हैं. पाठक ने कहा, जिनको हम लोग नामी स्कूल कहते हैं वो सुरक्षा दिशानिर्देशों की सरेआम धज्जियां उड़ा रहे हैं. हमने जमीनी स्तर पर अध्ययन के दौरान पाया कि ज्यादातर निजी स्कूल अपने कर्मचारियों का पुलिस सत्यापन भी नहीं कराते ताकि उनको कम वेतन देना पड़े और उनको आसानी हो. यह सुरक्षा दिशानिर्देशों का स्पष्ट उल्लंघन है. अपनी सहूलियत और फायदे के लिए ये स्कूल बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़ कर रहे हैं.

रेयान इंटरनेशनल मामले में सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट

उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को कहा कि वह गुरुग्राम के रेयान इंटरनेशनल स्कूल में हुई सात वर्षीय बच्चे की हत्या के मामले में उसके पिता की अर्जी पर सुनवाई करेगा.

बच्चे के पिता वरुण ठाकुर इस मामले की जांच सीबीआई या विशेष जांच दल एसआईटी से कराए जाने की मांग कर रहे हैं. यह अर्जी प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए आई जिसने कहा कि न्यायालय की रजिस्ट्री से यदि मंजूरी मिल जाती है तो इस पर सुनवाई आज ही होगी.

इस पीठ में प्रधान न्यायाधीश के अलावा न्यायमूर्ति एएम खानविलकर और न्यायमूर्ति डीवाई चन्द्रचूड़ भी शामिल हैं. ठाकुर के वकील ने पीठ से कहा कि वह न्यायालय की रजिस्ट्री में अपनी याचिका डालने की प्रक्रिया में हैं.

न्यायालय ने एक पृथक जनहित याचिका पर भी सुनवाई की सहमति जताई है जिसमें देशभर के स्कूलों में सुरक्षा की कमी का मुद्दा उठाया गया है. गुरुग्राम स्थित रेयान इंटरनेशनल स्कूल के शौचालय में आठ सितंबर को बच्चे का गला रेता हुआ शव मिला था.

स्कूल के कंडक्टरों में से एक अशोक कुमार को इस सिलसिले में उसी दिन गिरफ्तार किया गया था. कुमार ने कथित रूप से बच्चे का यौन उत्पीड़न करना चाहा और इसी दौरान उसकी हत्या कर दी.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)