राजनीति

गुजरात के उपमुख्यमंत्री नितिन पटेल ने कहा- हिंदू बहुसंख्यक नहीं रहे तो ख़त्म हो जाएगा लोकतंत्र

गुजरात के गांधीनगर में विश्व हिंदू परिषद द्वारा आयोजित भारत माता के मंदिर में मूर्ति स्थापना समारोह को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री नितिन पटेल ने कहा कि अगर अगले 1,000-2,000 वर्षों में हिंदुओं की संख्या कम हो जाती है और दूसरे धर्म के लोगों की संख्या बढ़ जाती है, तो कोई अदालत नहीं होगी, लोकसभा, संविधान, धर्मनिरपेक्षता, ये सब कुछ हवाहवाई हो जाएगा, कुछ भी नहीं रहेगा.

नितिन पटेल. (फोटो साभार: फेसबुक)

अहमदाबाद: गुजरात के उपमुख्यमंत्री नितिन पटेल ने एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि भारत के संविधान, कानून और धर्मनिरपेक्षता की बातें तभी तक की जाएंगी, जब तक देश में हिंदू बहुसंख्यक हैं और अगर अगले 1,000-2000 वर्षों में घटकर हिंदू अल्पसंख्यक हो जाएं तो देश की ‘अदालतें, लोकसभा, संविधान, धर्मनिरपेक्षता’ कुछ नहीं रहेगी.

उन्होंने कहा, ‘संविधान, कानून, धर्मनिरपेक्षता की बात करने वाले ऐसा तब तक करते रहेंगे, जब तक इस देश में हिंदू बहुसंख्यक हैं. भगवान न करे कि ऐसा हो, लेकिन अगर अगले 1,000-2,000 वर्षों में हिंदुओं की संख्या कम हो जाती है, और दूसरे धर्म के लोगों की संख्या बढ़ जाती है, तो कोई अदालत नहीं होगी, लोकसभा, संविधान, धर्मनिरपेक्षता, ये सब कुछ हवाहवाई हो जाएगा, कुछ भी नहीं रहेगा.’

गांधीनगर में विश्व हिंदू परिषद (विहिप) द्वारा आयोजित भारत माता के मंदिर में मूर्ति स्थापना समारोह को मनाने के लिए शुक्रवार (28 अगस्त) को एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि वह सभी मुसलमानों या ईसाइयों के बारे में बात नहीं कर रहे, क्योंकि उनमें से बड़ी संख्या में लोग देशभक्त हैं.

पटेल ने कहा, ‘मैं सबके बारे में बात नहीं कर रहा हूं. हजारों और लाखों मुसलमान, ईसाई देशभक्त हैं. हजारों मुस्लिम भारतीय सेना में हैं, सैकड़ों मुस्लिम गुजरात पुलिस बल में हैं. वे सभी देशभक्त हैं, लेकिन मैं उनकी बात कर रहा हूं जो देशभक्त नहीं हैं.’

पटेल ने अंतरधार्मिक विवाह के माध्यम से धर्मांतरण को रोकने के उद्देश्य से लाए गए गुजरात धर्म स्वतंत्रता (संशोधन) अधिनियम, 2021 को चुनौती देने के लिए एक मुस्लिम संगठन (जमीयत उलेमा-ए-हिंद) की आलोचना की और आश्चर्य जताया कि उसे कानून से परेशानी क्यों है, जबकि यह धर्म-विशिष्ट नहीं है.

उन्होंने कहा कि लव जिहाद के बढ़ते मामलों पर चिंता के कारण काफी विचार-विमर्श के बाद सरकार कानून में यह संशोधन लेकर आई है.

उन्होंने कहा, ‘अदालत में याचिका लगाने वालों से मैं पूछना चाहता हूं अगर कोई (दूसरे धर्म का) आपकी बेटी (जबरन शादी करके और धर्म परिवर्तन कराकर) को भी ले जाता है, क्या तब भी आप कानून को चुनौती देंगे? मुझे उस संगठन से पूछना है कि उन्हें हिंदू लड़कियों के हिंदुओं से शादी करने, मुस्लिम लड़कियों से मुसलमानों से शादी करने, ईसाई लड़कियों को ईसाइयों से शादी करने, सिख लड़कियों को सिखों से शादी करने में क्या आपत्ति है.’

उल्लेखनीय है कि गुजरात हाईकोर्ट ने मामला लंबित रहने तक इस विवादास्पद कानून की कई धाराओं पर यह देखते हुए रोक लगा दी है कि उनका इस्तेमाल अंतरधार्मिक दंपतियों को परेशान करने के लिए किया जा सकता है.

मुख्य न्यायाधीश विक्रम नाथ ने कहा, ‘हमारी यह राय है कि आगे की सुनवाई लंबित रहने तक धारा तीन, चार, चार (ए) से लेकर धारा चार (सी), पांच, छह एवं छह (ए) को लागू नहीं किया जाएगा. यदि एक धर्म का व्यक्ति किसी दूसरे धर्म व्यक्ति के साथ बल प्रयोग किए बिना, कोई प्रलोभन दिए बिना या कपटपूर्ण साधनों का इस्तेमाल किए बिना विवाह करता है, तो ऐसे विवाहों को गैरकानूनी धर्मांतरण के उद्देश्य से किया गया विवाह करार नहीं दिया जा सकता.’

विवाह के माध्यम से जबरन या धोखाधड़ी से धर्म परिवर्तन के लिए दंडित करने वाले गुजरात धर्म स्वतंत्रता (संशोधन) अधिनियम, 2021 को राज्य सरकार ने 15 जून को अधिसूचित किया गया था.

इन राज्यों में सत्ताधारी पार्टी भाजपा के नेता इसे लव जिहाद या शादी के माध्यम से हिंदू महिलाओं का धर्म परिवर्तन करने का षड्यंत्र बताते हैं.

इसी तरह नवंबर 2020 में उत्तर प्रदेश सरकार ने  ‘उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अध्यादेश 2020’ को मंजूरी दी थी. इस अध्यादेश के तहत शादी के लिए छल-कपट, प्रलोभन या बलपूर्वक धर्म परिवर्तन कराए जाने पर अधिकतम 10 साल के कारावास और जुर्माने की सजा का प्रावधान है.

इस साल जनवरी में मध्य प्रदेश सरकार ने धार्मिक स्वतंत्रता अध्यादेश 2020 प्रदेश में लागू किया है. इसमें धमकी, लालच, जबरदस्ती अथवा धोखा देकर शादी के लिए धर्मांतरण कराने पर कठोर दंड का प्रावधान किया गया है.

इस कानून के जरिये शादी तथा किसी अन्य कपटपूर्ण तरीके से किए गए धर्मांतरण के मामले में अधिकतम 10 साल की कैद एवं 50 हजार रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है.

इसके अलावा दिसंबर 2020 में भाजपा शासित हिमाचल प्रदेश में जबरन या बहला-फुसलाकर धर्मांतरण या शादी के लिए धर्मांतरण के खिलाफ कानून को लागू किया था. इसका उल्लंघन करने के लिए सात साल तक की सजा का प्रावधान है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)