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असम में बाढ़ की स्थिति और बिगड़ी, दो की मौत और 3.63 लाख लोग प्रभावित

असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, बारपेटा ज़िले के चेंगा और मोरीगांव के मायोंग में बाढ़ के पानी में एक-एक बच्चे डूब गए. राज्य के 17 ज़िलों में 3.63 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं. लखीमपुर में सर्वाधिक 1.3 लाख से अधिक बाढ़ से प्रभावित हैं. 950 गांव जलमग्न हैं और 30,333.36 हेक्टेयर फसल क्षेत्र को नुकसान पहुंचा है.

असम के मोरीगांव ज़िले के एक गांव में आई बाढ़ के बाद नाव से सुरक्षित स्थानों की ओर जाते लोग. (फोटो: पीटीआई)

गुवाहाटी: असम में बाढ़ की स्थिति बीते सोमवार को और बिगड़ गई, जिससे दो लोगों की जान चली गई और 17 जिलों में 3.63 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं. यह जानकारी एक आधिकारिक बुलेटिन में दी गई.

असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एएसडीएमए) के अनुसार, बारपेटा जिले के चेंगा और मोरीगांव के मायोंग में बाढ़ के पानी में एक-एक बच्चे डूब गए.

उसने कहा कि बारपेटा, विश्वनाथ, कछार, चिरांग, दरांग, धेमाजी, धुबरी, डिब्रूगढ़, गोलाघाट, जोरहाट, कामरूप, पश्चिम कार्बी आंगलोंग, लखीमपुर, माजुली, मोरीगांव, नगांव, नलबाड़ी, शिवसागर, सोनितपुर, दक्षिण सलमारा और तिनसुकिया जिलों में बाढ़ से 3,63,100 से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं.

लखीमपुर सबसे अधिक प्रभावित जिला है, जहां 1.3 लाख से अधिक बाढ़ से प्रभावित हैं, इसके बाद माजुली में लगभग 65,000 लोग और दरांग में 41,300 से अधिक लोग प्रभावित हैं. रविवार तक राज्य के 14 जिलों में बाढ़ से 2.58 लाख से अधिक लोग प्रभावित थे.

एएसडीएमए ने कहा कि इस समय 950 गांव जलमग्न हैं और पूरे असम में 30,333.36 हेक्टेयर फसल क्षेत्र को नुकसान पहुंचा है.

उसने कहा कि अधिकारी 10 जिलों में 44 राहत शिविर और वितरण केंद्र चला रहे हैं, जहां 321 बच्चों सहित 1,619 लोग शरण लिए हुए हैं.

बुलेटिन में कहा गया है कि विभिन्न राहत एजेंसियों ने राज्य के विभिन्न हिस्सों से 470 लोगों को निकाला है.

प्राधिकारियों ने 621.34 क्विंटल चावल, दाल और नमक, 578.82 लीटर सरसों तेल, 100 क्विंटल पशु चारा और अन्य बाढ़ राहत सामग्री वितरित की है.

बुलेटिन में कहा गया है कि बारपेटा, विश्वनाथ, बोंगाईगांव, डिब्रूगढ़, गोलपारा, मोरीगांव, नलबाड़ी और दक्षिण सलमारा जिले में बड़े पैमाने पर कटाव हुआ है.

एएसडीएमए ने कहा कि बारपेटा, दरांग, गोलाघाट, मोरीगांव, नगांव, शिवसागर, लखीमपुर और तिनसुकिया में बाढ़ के पानी से सड़कें और अन्य बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है. उसने कहा कि बाढ़ से कुल 2,56,144 घरेलू जानवर और कुक्कुट प्रभावित हुए हैं.

केंद्रीय जल आयोग द्वारा जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, डिब्रूगढ़, जोरहाट, सोनितपुर, गोलपारा, कामरूप और धुबरी जिलों में ब्रह्मपुत्र सामान्य से ऊपर से गंभीर बाढ़ की स्थिति में बह रही है.

उसने कहा, ‘इसके अलावा ब्रह्मपुत्र की सहायक नदियां, अर्थात बारपेटा में बेकी, सोनितपुर में जिया भराली, शिवसागर में दिखाऊ, धुबरी में संकोश, लखीमपुर में सुबनसिरी, गोलाघाट में धनसिरी, कोकराझार में गौरांग और कामरूप जिले में पुथिमारी सामान्य से लेकर गंभीर बाढ़ की स्थिति में बह रही हैं.’

उसने कहा कि करीमगंज में कुशियारा नदी (बराक और अन्य) सामान्य से ऊपर बाढ़ की स्थिति में बह रही है.

द हिंदू के मुताबिक, राज्य वन विभाग के अनुसार, काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान और पोबितोरा वन्यजीव अभयारण्य- आंशिक रूप से जलमग्न हो गए हैं.

काजीरंगा के निदेशक पी. शिवकुमार ने कहा, ‘पार्क का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा जलमग्न हो गया है और 223 अवैध शिकार विरोधी शिविरों में से 125 जलमग्न हो गए हैं, लेकिन पिछले कुछ घंटों में जलस्तर घट रहा है.’

बाढ़ के कारण माल ढुलाई का मार्ग बदलना पड़ा. रविवार को पुलिस ने काजीरंगा में बाढ़ के कारण राष्ट्रीय राजमार्ग 715 के पार कार्बी आंगलोंग जिले की पहाड़ियों से दक्षिण की ओर पार्क से जानवरों के प्रवास के कारण माल ढुलाई के मार्ग को फिर से चलाने का आदेश दिया.

यह निर्देश मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा द्वारा पहाड़ियों की ओर प्रवास कर रहे तीन हिरणों की राजमार्ग पर तेज गति से दौड़ रहे वाहनों की टक्कर से मरने पर आई प्रतिक्रिया के बाद दिया गया.

डिब्रूगढ़ और तिनसुकिया जिलों से भारी वाणिज्यिक वाहनों को ब्रह्मपुत्र के उत्तरी तट पर एनएच 15 के माध्यम से डायवर्ट किया गया है. यह डिब्रूगढ़ के पास बोगीबील ब्रिज और तेजपुर के पास कलियाभोमोरा ब्रिज से होकर गुजरेगा.

जब तक बाढ़ की स्थिति में काफी सुधार नहीं हो जाता, तब तक यही रूटीन लागू रहेगा.

शिवकुमार ने कहा, ‘इससे वाहनों में 30 प्रतिशत की कमी आई है, हमारे लिए जानवरों और यातायात का प्रबंधन करना आसान होगा. लेकिन कई ड्राइवरों को धीमी गति से गाड़ी चलाने की आवश्यकता होती है.’

परिवहन विभाग ने काजीरंगा के साथ राजमार्ग के महत्वपूर्ण हिस्सों पर सात स्पीड गन स्थापित की हैं और वाहनों को एक चरम बिंदु से दूसरे तक 40 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से या उससे आगे तक पहुंचने के लिए टाइम कार्ड जारी किए हैं.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)