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आसाराम की आयुर्वेदिक इलाज के लिए सज़ा निलंबित करने की याचिका ख़ारिज

बलात्कार मामलों में उम्रक़ैद की सज़ा काट रहे आसाराम ने सुप्रीम कोर्ट से आयुर्वेदिक इलाज के लिए सज़ा कुछ महीने के लिए निलंबित करने का अनुरोध किया था. शीर्ष अदालत ने उनकी याचिका ख़ारिज करते हुए कहा कि उनका अपराध कोई साधारण अपराध नहीं है. उन्हें जेल में ही आयुर्वेदिक उपचार मुहैया करा दिया जाएगा.

फाइल फोटो: पीटीआई

नयी दिल्लीः सुप्रीम कोर्ट ने बलात्कार मामलों में उम्रकैद की सजा काट रहे आसाराम की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने आयुर्वेदिक इलाज के लिए अपनी सजा को कुछ महीने के लिए निलंबित करने का अनुरोध किया था.

अदालत ने आसाराम की याचिका खारिज करते हुए कहा कि उनका अपराध कोई साधारण अपराध नहीं है.

जस्टिस इंदिरा बनर्जी, जस्टिस वी. रामसुब्रमण्यन और जस्टिस बेला एम त्रिवेदी की पीठ ने राजस्थान सरकार के इस जवाब का संज्ञान लिया कि दोषी (आसाराम) को आवश्यक उपचार उपलब्ध कराया गया है.

पीठ ने याचिका खारिज करते हुए मौखिक रूप से कहा, ‘माफ कीजिएगा, यह किसी भी तरह से कोई साधारण अपराध नहीं है. आपको जेल में ही पूरा आयुर्वेदिक उपचार दिया जाएगा.’

आसाराम की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता आर. बसंत ने कहा कि उनके मुवक्किल को उनकी बीमारियों के इलाज के लिए दो महीने की अंतरिम जमानत देने पर विचार किया जा सकता है.

मामले में राज्य की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मनीष सिंघवी ने कहा था कि दोषी को जेल में ही अच्छा उपचार मिल रहा है और याचिका खारिज की जानी चाहिए.

बता दें कि एक अवकाशकालीन पीठ ने चार जून को आसाराम की याचिका पर राज्य सरकार से जवाब मांगा था.

याचिका में आसाराम ने कहा था कि हरिद्वार के पास प्रकाश दीप इंस्टिट्यूट ऑफ आयुर्वेद में चल रहे उनके इलाज के लिए उनकी सजा को दो महीने के लिए निलंबित किया जाए.

राज्य सरकार ने अपने जवाब में कहा था कि आसाराम को अस्पताल में भर्ती कराया गया था और वह इलाज के लिए आईसीयू में थे इसलिए उनको ट्रांसफर करने की उनकी याचिका अनावश्यक है.

इससे पहले राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि आसाराम फिट हैं लेकिन वह मेडिकल इलाज के बहाने अपनी कस्टडी का स्थान बदलने की कोशिश कर रहे हैं.

बता दें कि बलात्कार के दो मामलों में आजीवान कारावास सहित कई मामलों में जेल में हैं.

राज्य सरकार ने अपने हलफनामे में कहा था, ‘याचिकाकर्ता मेडिकल इलाज के नाम पर अपने हिरासत स्थान को बदलने का प्रयास कर रहा है. इस तरह के बदलाव कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग है. वह (आसाराम) स्वस्थ नहीं होने का हवाला देकर जानबूझकर गांधी नगर और जोधपुर में लंबित सुनवाई में देरी कर रहे हैं जबकि वह फिट हैं.’

राज्य सरकार ने कहा था कि जोधपुर उन दुर्लभ स्थानों में से एक है, जहां एलोपैथिक और आयुर्वेदिक दोनों तरह के इलाज कराए जा सकते हैं.

हलफनामे में कहा गया कि छह मई को आसाराम कोविड-19 संक्रमित पाए गए थे, उनमें कोरोना के हल्के लक्षण थे.

जोधपुर की अदालत ने 25 अप्रैल 2018 को नाबालिग के बलात्कार का दोषी बताते हुए उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई थी. आसाराम ने 2013 में अपने आश्रम में नाबालिग का बलात्कार किया था.

उनके सहयोगियों शरद और शिल्पी को भी अपराध में अपनी भूमिका के लिए 20 साल जेल की सजा सुनाई गई थी.

उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर की रहने वाली नाबालिग पीड़िता ने अपनी शिकायत में कहा था कि आसाराम ने 15 अगस्त 2013 की रात उसे जोधपुर के पास मणाई के अपने आश्रम बुलाया था. उस समय 16 वर्षीय पीड़िता मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में आसाराम के आश्रम में पढ़ती थी.

आसाराम को 2002 के बलात्कार मामले में भी दोषी पाया गया और 20 साल जेल की सजा सुनाई गई. आसाराम गुजरात के सूरत में भी बलात्कार के मामले का सामना कर रहे हैं.

मालूम हो कि आसाराम को 2013 में इंदौर से गिरफ्तार किया गया था और एक सितंबर 2013 को जोधपुर लाया गया था. वह दो सितंबर 2013 से न्यायिक हिरासत में है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)