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एनएचआरसी ने गुजरात सरकार से कहा- हर छह माह पर क़ैदियों की टीबी व एड्स की जांच कराएं

एक मजिस्ट्रेट जांच रिपोर्ट में सूरत के एक केंद्रीय कारागार में कई क़ैदियों को टीबी होने की जानकारी सामने आने के बाद एनएचआरसी के एक दल ने जेल का दौरा किया था. बताया गया था कि जेल में उचित चिकित्सा के अभाव में 21 साल के एक विचाराधीन क़ैदी की 15 जुलाई 2020 को टीबी से मौत हो गई थी. अप्रैल 2019 में  जेल में आने के वक़्त यह व्यक्ति स्वस्थ था.

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

नई दिल्ली: गुजरात में सूरत के एक केंद्रीय कारागार में क्षय रोग (टीबी) के अधिक मामले सामने आने के बाद राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने राज्य सरकार और जेलों के प्रमुख से कारागार में बंद कैदियों की हर छह महीने पर टीबी और एचआईवी की जांच कराने को कहा है. अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी.

एनएचआरसी ने एक बयान में कहा कि आयोग ने सुझाव दिया है कि बीमारी के कारण जिन कैदियों की हालत नाजुक है, सरकार को उनकी सजा कम करने पर प्राथमिकता से विचार करना चाहिए.

आयोग ने राज्य सरकार से लाजपुर केंद्रीय कारागार और अस्पताल में कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने और जल्द से जल्द रिक्त पदों को भरने को कहा है.

बयान में कहा गया, ‘लाजपुर केंद्रीय कारागार, सूरत में टीबी के मरीजों की अधिक संख्या के मद्देनजर एनएचआरसी ने जेल महानिदेशक और राज्य सरकार को सुझाव दिया है कि बंदियों की हर छह महीने पर टीबी और एचआईवी/एड्स की जांच कराई जाए ताकि समय रहते उनका उपचार हो सके और बीमारी को फैलने से रोका जा सके.’

आयोग ने यह भी सुझाव दिया है कि जिन कैदियों की हालत नाजुक है, सरकार को उनकी सजा कम करने पर प्राथमिकता से विचार करना चाहिए.

एक मजिस्ट्रेट जांच की रिपोर्ट में जेल में कई कैदियों को टीबी होने की जानकारी सामने आने के बाद आयोग की सदस्य ज्योतिका कालरा के नेतृत्व में एनएचआरसी के एक दल ने जेल का दौरा किया था.

बयान के अनुसार, उक्त जेल में उचित चिकित्सा नहीं मिलने के कारण 21 साल के एक विचाराधीन कैदी की 15 जुलाई 2020 टीबी से मौत हो गई थी जो 27 अप्रैल 2019 को जेल में आने के वक्त स्वस्थ था.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, आयोग ने यह भी सिफारिश की कि सरकार को प्राथमिकता के आधार पर अंतिम रूप से बीमार रोगियों की सजा को कम करने पर विचार करना चाहिए. सजा को कम करने के लिए सरकार को सीआरपीसी की धारा 433 के तहत प्रदान किए गए सभी मामलों पर विचार करना चाहिए, न कि केवल सीआरपीसी की धारा 433 ए के तहत आने वाले मामलों पर.

आयोग ने यह भी कहा है कि प्रत्येक कैदी के प्रवेश या जेल में प्रवेश के समय एनएचआरसी द्वारा निर्धारित प्रारूप के अनुसार उसकी प्रारंभिक स्वास्थ्य जांच पर ध्यान दिया जाना चाहिए.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)