स्कूली बच्चों के सामानों पर मुख्यमंत्री, नेताओं की फोटो न छापें: मद्रास हाईकोर्ट

हाईकोर्ट ने नाराज़गी ज़ाहिर करते हुए कहा कि ये बेहद घृणित है कि इस तरह की प्रथा चल रही है. अदालत ने यह भी कहा कि जिन सामानों पर फोटो छापे जा चुके हैं, उसे बर्बाद न किया जाए क्योंकि उन पर काफी धन ख़र्च किया गया था.

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मद्रास हाईकोर्ट. (फोटो साभार: फेसबुक/@Chennaiungalkaiyil)

हाईकोर्ट ने नाराज़गी ज़ाहिर करते हुए कहा कि ये बेहद घृणित है कि इस तरह की प्रथा चल रही है. अदालत ने यह भी कहा कि जिन सामानों पर फोटो छापे जा चुके हैं, उसे बर्बाद न किया जाए क्योंकि उन पर काफी धन ख़र्च किया गया था.

मद्रास हाईकोर्ट. (फोटो साभार: फेसबुक/@Chennaiungalkaiyil)

नई दिल्ली: मद्रास उच्च न्यायालय ने तमिलनाडु सरकार से कहा है कि वे बच्चों के उपयोग वाले स्कूल बैग, पाठ्यपुस्तकों और स्टेशनरी जैसी वस्तुओं पर मुख्यमंत्रियों और अन्य सार्वजनिक पदाधिकारियों की तस्वीरें छापना बंद करें.

कोर्ट ने नाराजगी जाहिर करते हुए इस प्रथा को ‘घृणित’ बताया है.

हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक, कोर्ट ने कहा कि बच्चों को वोट देने का अधिकार नहीं होता है, इसलिए उनकी किताबें या बैग पर किसी सरकारी पदाधिकारी की तस्वीर नहीं होनी चाहिए, मुख्यमंत्री की भी नहीं.

मुख्य न्यायाधीश संजीब बनर्जी और जस्टिस पीडी ऑडिकेसावालु की पीठ ने कहा, ‘राज्य को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि भविष्य में इस तरह की प्रथा जारी न रहे.’

कोर्ट उस जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई कर रही थी जिसमें इस तरह की प्रथा पर रोक लगाने की मांग की गई थी. याचिकाकर्ताओं ने कहा था कि बच्चों की किताबें, स्कूल बैग और स्टेशनरी पर मुख्यमंत्रियों की तस्वीरें लगाकर करदाताओं के पैसों की बर्बादी की जा रही है.

द न्यूज मिनट के अनुसार, अदालत ने यह भी कहा कि बैग और अन्य सामग्री, जिस पर पिछले मुख्यमंत्रियों के फोटो लगी है, को वर्तमान सरकार द्वारा बर्बाद नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि उन पर काफी धन खर्च किया गया था. सरकार ने कहा कि इन वस्तुओं का उपयोग किया जाएगा.

महाधिवक्ता आर. शुन्मुगासुंदरम ने कहा कि निवर्तमान मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने फैसला किया है कि भविष्य में ऐसी सामग्री पर उनकी तस्वीरें प्रकाशित नहीं की जाएंगी.

डीएमके सरकार के इस निर्णय को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि आगे कोई और आदेश देने की जरूरत नहीं है. हालांकि इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि जनता के पैसे को खर्च करते समय अत्यधिक सावधानी बरती जानी चाहिए, ताकि ये राशि राजनीतिक नेताओं के प्रचार में न खर्च हो जाए.

कोर्ट ने कहा कि मुख्यमंत्री की तस्वीर अखबार या होर्डिंग्स पर छापी जा सकती है, लेकिन इनका इस्तेमाल किताबों या किसी शैक्षणिक चीजों पर नहीं किया जा सकता है.

तमिलनाडु में कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से वितरित विभिन्न वस्तुओं पर मुख्यमंत्रियों की तस्वीरें छापने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है.

बीते अगस्त महीने में स्कूल शिक्षा मंत्री अन्बिल महेश पोय्यामोझी ने विधानसभा को बताया था कि पूर्व मुख्यमंत्रियों दिवंगत जे. जयललिता और ई. पलानीस्वामी की तस्वीरों को 65 लाख स्कूल बैग और 10 लाख स्टेशनरी आइटम पर बनाए रखने के स्टालिन के फैसले ने राज्य के खजाने को 13 करोड़ रुपये के अतिरिक्त खर्च से बचाया है.

डीएमके और एआईडीएमके दोनों पार्टियों ने मुफ्त और भारी सब्सिडी वाली योजनाएं शुरू की हैं और स्कूली छात्रों के लिए रंगीन टीवी, ग्राइंडर, पंखे, साइकिल और बैग जैसी मुफ्त सामग्री की पेशकश की है, जिस पर अक्सर किसी पार्टी के नाम और तस्वीरें होती हैं.

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