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त्रिपुरा: मीडिया दफ़्तरों में तोड़फोड़ पर पत्रकारों का प्रदर्शन, क्राइम ब्रांच को सौंपी गई जांच

बुधवार को त्रिपुरा में भाजपा और माकपा कार्यकर्ताओं के बीच संघर्ष के दौरान दो अख़बारों और दो टीवी चैनलों के दफ़्तरों में तोड़फोड़ की गई. तीन ज़िलों में दोनों दलों के कार्यकर्ताओं में हुई झड़पों में कम से कम दस घायल हो गए, दो पार्टी कार्यालय जल गए, कई अन्य में तोड़फोड़ की गई और छह वाहनों में आग लगा दी गई.

8 सितंबर को अगरतला में भाजपा-माकपा कार्यकर्ताओं के बीच हुई हिंसा के बीच कई वाहनों को आग लगा दी गई. (फोटो: पीटीआई)

अगरतला/नई दिल्ली: त्रिपुरा में भाजपा और माकपा कार्यकर्ताओं के बीच संघर्ष के दौरान दो अखबारों औ दो टीवी चैनलों के दफ्तरों में तोड़फोड़ किए जाने के एक दिन बाद दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर पत्रकारों ने गुरुवार को त्रिपुरा पुलिस मुख्यालय के सामने धरना दिया.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, बुधवार को विभिन्न जिलों में माकपा पार्टी के कुछ कार्यालयों पर हमले के दौरान अखबार और टीवी चैनल के कार्यालयों में तोड़फोड़ की गई.

तीन जिलों में भाजपा और माकपा कार्यकर्ताओं के बीच हुई झड़पों में कम से कम दस लोग घायल हो गए थे, दो पार्टी कार्यालय जल गए, कई अन्य में तोड़फोड़ की गई और छह वाहनों में आग लगा दी गई.

इन प्रदर्शनों के दौरान त्रिपुरा में माकपा का मुखपत्र डेली देशेर कथा का दफ्तर, स्थानीय मीडिया हाउस प्रतिवादी कलम और उसकी टीवी शाखा पीबी24 और गोमती जिले के उदयपुर का एक स्थानीय टीवी चैनल दुरंता टीवी हमले का शिकार हुए.

एक स्थानीय मीडिया अधिकार संगठन फोरम फॉर डेवलपमेंट एंड प्रोटेक्शन ऑफ मीडिया कम्युनिटी के संयोजक सेबक भट्टाचार्य ने एक बयान में कहा कि हमले में प्रतिबादी कलम अखबार और पीबी 24 न्यूज चैनल के तीन पत्रकार घायल हो गए. पत्रकार प्रसेनजीत साहा को सिर में चोट लगी और बाद में उन्हें कई टांके लगे.

मीडिया संस्था ने हमले में शामिल लोगों को कड़ी से कड़ी सजा देने और मीडियाकर्मियों की सुरक्षा की मांग की है.

प्रदर्शन के बाद एक संयुक्त पत्रकार प्रतिनिधिमंडल ने महानिरीक्षक (कानून व्यवस्था) अरिंदम नाथ से मुलाकात कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की.

अगरतला प्रेस क्लब के सचिव प्रणब सरकार ने कहा, ‘प्रतिबादी कलम के संपादक ने पहले एक औपचारिक शिकायत देते हुए कहा कि उनके मीडिया हाउस पर हमले एक पुलिस थाना प्रभारी की उपस्थिति में किए गए थे. पुलिस ने मामले की जांच क्राइम ब्रांच को सौंपने का फैसला किया है और वे जल्द से जल्द जरूरी कार्रवाई करेंगे.’

आईजी अरिंदम ने बताया कि स्थानीय मीडिया हाउस प्रतिबादी कलम और उसकी टीवी शाखा पीबी 24 पर हमले की जांच राज्य अपराध शाखा को सौंपी गई है, क्योंकि इसके संपादक ने अपनी शिकायत में दावा किया है कि मौके पर मौजूद पश्चिम अगरतला थाने के प्रभारी ने कोई कार्रवाई नहीं की. वरिष्ठ अधिकारी ने आगे बताया कि राज्य में स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है.

हालांकि, चूंकि अन्य मीडिया कार्यालयों ने ऐसी कोई शिकायत नहीं की, इसलिए उनकी जांच पुलिस अधिकारियों द्वारा जांच की जाएगी.

क्राइम ब्रांच की एक टीम ने गुरुवार शाम हमले की चपेट में आए अखबार कार्यालयों का दौरा किया और स्थिति का जायजा लिया.

एक अन्य मीडिया अधिकार संगठन असेंबली जर्नलिस्ट के सचिव शनित देबरॉय ने दोपहर में आईजी के दौरे के बाद कहा, ‘बुधवार से पुलिस हमला किए गए मीडिया कार्यालयों में नहीं गई. इसलिए हमने मांग की कि वे हमला किए गए कार्यालयों का दौरा करें. अधिकारियों ने कार्यालयों का दौरा करने और प्रक्रिया में हुए नुकसान का अनुमान लगाने और आवश्यक कार्रवाई करने पर सहमति व्यक्त की है.’

राज्य के एक वरिष्ठ पत्रकार जयंत भट्टाचार्य ने कहा कि अधिकारियों ने उन्हें हमलों से उपलब्ध फुटेज के आधार पर मीडिया कार्यालयों पर हमला करने वालों की पहचान करने और उनके खिलाफ कार्रवाई करने का आश्वासन दिया.

इस बीच, हिंसा की छिटपुट घटनाओं में उत्तरी त्रिपुरा जिले के धर्मनगर और पश्चिम त्रिपुरा के गांधीग्राम में माकपा के दो स्थानीय कार्यालय क्षतिग्रस्त हो गए.

राज्य पुलिस के एक अधिकारी ने बुधवार शाम बताया कि धर्मनगर और गांधीग्राम के मिशनटिला क्षेत्र से उसी दोपहर पार्टी कार्यालयों में तोड़फोड़ की सूचना मिली है. हालिया रिपोर्ट आने तक कोई शिकायत दर्ज नहीं की गई थी.

येचुरी ने त्रिपुरा में माकपा कार्यालयों पर ‘भाजपा के लोगों की भीड़’ के हमले का आरोप लगाया

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के महासचिव सीताराम येचुरी ने गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर आरोप लगाया कि त्रिपुरा में आठ सितंबर को उनकी पार्टी के दफ्तरों पर ‘भाजपा की के लोगों की भीड़’ द्वारा हमला किया गया.

पत्र में येचुरी ने कहा कि माकपा के प्रदेश मुख्यालय और कई कार्यालयों पर सुनियोजित ढंग से हमला किया गया तथा हमलावरों ने जिस तरह से यह सब किया उससे राज्य सरकार की ’मिलीभगत’ भी दिखाई देती है.

उन्होंने कहा, ‘सुनियोजित ढंग से माकपा के कई कार्यालयों पर भाजपा के लोगों की भीड़ ने हमला किया… माकपा के कई नेताओं एवं कार्यकर्ताओं के घरों में भी तोड़फोड़ की गई और आग लगाई गई.’

माकपा महासचिव ने आरोप लगाया कि पार्टी समर्थित अखबार ‘डेली देशरकथा’ के कार्यालय पर भी हमला किया गया. उन्होंने प्रधानमंत्री से आग्रह कि वह मामले में हस्तक्षेप करें और माकपा एवं वाम मोर्चे के खिलाफ हिंसा को रोकें.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)