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केरल: ‘नारकोटिक जिहाद’ बयान पर मुख्यमंत्री बोले- यह सामाजिक समस्या, कोई धार्मिक पहलू नहीं

साइरो-मालाबार चर्च से संबंधित बिशप जोसेफ कल्लारंगत ने गुरुवार को कहा था कि केरल में ग़ैर मुस्लिम, ख़ासकर ईसाई लड़कियां ‘लव और नारकोटिक जिहाद’ का शिकार बन रही हैं. कांग्रेस ने इसकी आलोचना की है, वहीं भाजपा बिशप के समर्थन में है. इस बीच मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने कहा है कि नारकोटिक्स का कोई पहलू है तो वो है समाज-विरोधी. कोई भी धर्म ड्रग्स की बिक्री और इस्तेमाल को बढ़ावा नहीं देता.

केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन. (फोटो: पीटीआई)

तिरुवनंतपुरम: कैथोलिक बिशप जोसेफ कल्लारंगत द्वारा कथित ‘लव और नारकोटिक जिहाद द्वारा गैर मुस्लिमों को निशाना बनाने’ पर दिए गए विवादास्पद बयान से केरल में शुक्रवार को राजनीतिक तूफान खड़ा हो गया है. विपक्षी दल कांग्रेस ने इसकी आलोचना करते हुए कहा कि बिशप ने अपनी टिप्पणी से ‘हदें पार कर दी हैं.’

वहीं, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कल्लारंगत को पूरा समर्थन देते हुए समाज से उनके बयान पर चर्चा करने का आग्रह किया. इस बीच मुख्यमंत्री ने कहा कि नारकोटिक एक सामाजिक समस्या है.

इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने कहा कि नारकोटिक (मादक पदार्थ) की समस्या का कोई धार्मिक पहलू नहीं है.

एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस बारे में सवाल पूछे जाने पर मुख्यमंत्री विजयन ने कहा, ‘मेरे ख्याल से यह नारकोटिक जिहाद शब्द हम सबने पहली बार सुना है. नारकोटिक्स की समस्या किसी धर्म विशेष को प्रभावित नहीं करती है. यह पूरे समाज को प्रभावित करती है और हमें इसकी चिंता है और इसे रोकने के लिए हम प्रयास कर रहे हैं. कानूनी तरीकों को मजबूत किया जा रहा है.’

उन्होंने आगे कहा, ‘नारकोटिक्स का कोई धार्मिक पहलू नहीं है. इसका कोई पहलू है तो वो है समाज-विरोधी. कोई भी धर्म ड्रग्स की बिक्री और इस्तेमाल को बढ़ावा नहीं देता.’

उल्लेखनीय है कि साइरो-मालाबार चर्च से संबंधित बिशप जोसेफ कल्लारंगत ने गुरुवार को कहा था कि केरल में ईसाई लड़कियां ‘लव और नारकोटिक जिहाद’ का शिकार बन रही हैं तथा जहां भी हथियारों का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता, वहां दूसरे धर्मों के युवाओं को बर्बाद करने के लिए चरमपंथी ऐसे तरीके अपना रहे हैं.

जिले के एक चर्च में श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए बिशप ने कहा था कि ‘लव जिहाद’ के तहत गैर मुस्लिम, विशेषकर ईसाई समुदाय की लड़कियों को बड़े स्तर पर प्रेम संबंध में फंसाकर उनका धर्म परिवर्तन कराया जा रहा है और आतंकवाद जैसे कृत्यों के लिए उनका इस्तेमाल किया जा रहा है.

उन्होंने आरोप लगाया था, ‘इस तरह की दो चीजें लव जिहाद और नारकोटिक (मादक पदार्थ) जिहाद हैं. चूंकि जिहादी जानते हैं कि हमारे जैसे लोकतांत्रिक देश में हथियारों के जरिए अन्य धर्मों के लोगों को बबार्द करना आसान नहीं है, इसलिए वे अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए इस तरह के अन्य हथकंडे अपना रहे हैं.’

उन्होंने पूर्व पुलिस महानिदेशक लोकनाथ बेहरा के हालिया बयानों करते हुए कहा था कि केरल आंतकवादियों का एक भर्ती केंद्र बन गया है और इस राज्य में चरमपंथी समूहों का एक भूमिगत प्रकोष्ठ मौजूद है.

बिशप ने दावा किया कि राज्य की ईसाई और हिंदू लड़कियों का धर्मांतरण किया गया और उन्हें हाल ही में अफगानिस्तान में आतंकवादी शिविरों में भेजा गया. उन्होंने कहा कि इस विषय की गंभीरता से पड़ताल होनी चाहिए.

उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग यह कह रहे हैं कि राज्य में ‘लव जिहाद एवं  नारकोटिक जिहाद’ नहीं है वे सच्चाई से आंखें मूंद रहे हैं. जो राजनेता, सामाजिक-सांस्कृतिक नेता व पत्रकार, इस तथ्य से इनकार कर रहे हैं, ऐसा करने में उनके निहित स्वार्थ हो सकते हैं.’

उनके इस बयान को लेकर राज्य में बवाल मच गया. बड़े स्तर पर इसकी आलोचना हुई है, हालांकि कुछ दलों ने इससे हामी भरी है.

विधानसभा में नेता विपक्ष वीडी सतीशन ने फेसबुक पर लिखा कि समुदाय के लोगों और आध्यात्मिक नेताओं को ऐसे बयान देने से बचना चाहिए जिससे केरल में शांति के वातावरण या आमजन के बीच भरोसे की भावना को क्षति पहुंचे. उन्होंने कहा कि अपराध का जाति या लिंग से कोई संबंध नहीं होता.

सतीशन ने कहा कि मानसिक बीमारी के लिए जाति और धर्म को देखना नस्ली भेदभाव है. उन्होंने कहा, ‘जाति और धर्म के आधार पर अपराधों को देखना तथा इसके लिए किसी समुदाय विशेष को दोषी ठहराना बड़ी भूल है. बिशप जोसेफ कल्लारंगत के बयान ने हदें पार कर दी हैं.’

नेता विपक्ष ने यह भी कहा कि धर्मिक नेताओं को आत्म नियंत्रण और संयम का पालन करना चाहिए.

इस बीच सत्तारूढ़ दल मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने अब तक उसकी ओर से इस मुद्दे पर कोई बयान नहीं दिया है.

दूसरी ओर, बिशप की बातों से सहमति जताने वालों में भाजपा नेता शामिल हैं. पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष के. सुरेन्द्रन ने बिशप का समर्थन करते हुए कहा कि उन्होंने जो कुछ भी बोला है, वह ‘गंभीर मुद्दा’ है जिस पर समाज को चर्चा और विश्लेषण करना चाहिए.

उन्होंने कहा, ‘बिशप ने जो कहा है, वह उनके अपने अनुभव पर आधारित है. यह गंभीर मुद्दा है जिस पर बिना किसी पूर्वाग्रह के चर्चा होनी चाहिए. कुछ लोग बहस से क्यों बचना चाहते हैं?’

कल्लारंगत के दावों का समर्थन करते हुए प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि राज्य में ‘नारकोटिक जिहाद’ एक सच्चाई है और जिन लोगों को रेव पार्टियों के संबंध में गिरफ्तार किया जा रहा है, उनके आतंकवादी नेटवर्क से करीबी संपर्क हैं.

उन्होंने कहा कि केरल या भारत में ही नहीं, विश्वभर में ड्रग माफिया का आतंकवादी संगठनों से गहरा नाता है. सुरेंद्रन ने कहा, ‘बिशप ने सच बोला और इसके लिए उनपर हर ओर से हमला नहीं किया जाना चाहिए. उन्होंने जो कहा, वह नई चीज नहीं है. उन्होंने किसी समुदाय विशेष पर आरोप नहीं लगाया, बल्कि केवल उन्हें दोष दिया जो समाज विरोधी गतिविधियों में शामिल हैं.’

इस बीच कोट्टायम स्थित मुस्लिम संगठन महल्लु मुस्लिम समन्वय समिति ने बिशप के विरुद्ध पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है.

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कल्लारंगत ने जानबूझकर समाज का सांप्रदायिक आधार पर ध्रुवीकरण करने के लिए बयान दिया.

वहीं, मुस्लिम संगठनों ने बिशप कल्लारंगत के बयान का विरोध करते हुए आरोप लगाया कि इसका उद्देश्य केरल के समाज में सांप्रदायिक विभाजन पैदा करना है.

बिशप पर प्रहार करते हुए समस्त केरल सुन्नी स्टूडेंट्स फेडरेशन ने मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाने वाले उनके आरोपों को साबित करने के लिए साक्ष्य देने को कहा.

फेडरेशन समस्त केरल जमियतुल उलेमा का उच्चतर छात्र संगठन है. फेडरेशन के महासचिव सतार पंथल्लूर ने संवाददाताओं से कहा कि बिशप को लव जिहाद और नारकोटिक जिहाद के आरोपों का साक्ष्य देना चाहिए.

उन्होंने बिशप के आरोपों को बेबुनियाद करार दिया और राज्य सरकार से इसका गंभीर संज्ञान लेने का अनुरोध किया.

बिशप के बयान की निंदा करते हुए केरल मुस्लिम जमात काउंसिल कोट्टायम जिला समिति ने कहा कि दो समुदायों के बीच विभाजन पैदा करने की कोशिश करने को लेकर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)