राजनीति

‘घोर सांप्रदायिकता और नफ़रत’ के सहारे चुनाव लड़ना भाजपा का एकमात्र एजेंडा: उमर अब्दुल्ला

नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता और जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने योगी आदित्यनाथ के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मेरा मानना रहा है कि भाजपा का सारा ज़हर मुस्लिमों के प्रति होता है. यहां एक मुख्यमंत्री हैं, जो दोबारा यह दावा कर चुनाव जीतना चाहते हैं कि मुस्लिमों ने हिंदुओं के हिस्से का पूरा राशन खा लिया. योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि वर्ष 2017 से पहले सिर्फ़ ‘अब्बा जान’ कहने वालों को ही राशन मिलता था.

जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला. (फोटो: पीटीआई)

श्रीनगर: नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने रविवार को कहा कि भारतीय जनता पार्टी की ‘घोर सांप्रदायिकता और नफरत’ के अलावा किसी और एजेंडे पर चुनाव लड़ने की कोई मंशा नहीं है और उसका सारा ‘जहर’ मुस्लिमों के प्रति होता है.

उनकी यह टिप्पणी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उस बयान के बाद आई है, जिसमें कहा गया है कि वर्ष 2017 से पहले सिर्फ ‘अब्बा जान’ कहने वालों को ही राशन मिलता था.

बीते रविवार को आदित्यनाथ ने कुशीनगर में कहा था, ‘प्रधानमंत्री (नरेंद्र) मोदी के नेतृत्व में तुष्टिकरण की राजनीति का कोई स्थान नहीं है. वर्ष 2017 से पहले क्या सभी राशन ले पाते थे? पहले केवल अब्बा जान कहने वाले ही राशन हजम कर रहे थे.’

उमर ने ट्वीट किया, ‘मेरा हमेशा से मानना रहा है कि भाजपा की मंशा घोर सांप्रदायिकता और नफरत के अलावा किसी अन्य एजेंडे पर चुनाव लड़ने की नहीं है और उसका सारा जहर मुस्लिमों के प्रति होता है. यहां एक मुख्यमंत्री हैं, जो दोबारा यह दावा कर चुनाव जीतना चाहते हैं कि मुस्लिमों ने हिंदुओं के हिस्से का पूरा राशन खा लिया.’

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में विकास परियोजनाओं की आधारशिला रखने और उद्घाटन कार्यक्रमों को संबोधित करते हुए कहा था कि अयोध्या में राम जन्मभूमि पर राम मंदिर का निर्माण तभी शुरू हुआ, जब केंद्र और राज्य में भाजपा सत्ता में आई और पूछा कि क्या सपा, बसपा या कांग्रेस ने मंदिर बनाया होता.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा करते हुए आदित्यनाथ ने कहा था कि उन्होंने देश के राजनीतिक एजेंडे को बदल दिया है, जो पहले जाति, धर्म, स्थान, भाषा और परिवार तक सीमित था. परिणामस्वरूप आज हर वर्ग के लोगों को विकास का लाभ मिल रहा है. आज सबका विकास है और तुष्टिकरण किसी का नहीं है. पहले जब तुष्टिकरण की राजनीति होती थी, तब विकास नहीं होता था, बल्कि दंगे, भ्रष्टाचार, अराजकता, आतंकवाद, उत्पीड़न और अन्याय होता था.

आदित्यनाथ ने कहा था, ‘आज आपको राशन मिल रहा है. क्या आपको यह राशन 2017 से पहले मिल रहा था? क्योंकि तब ‘अब्बा जान’ कहने वाले राशन पचा लेते थे. उस समय कुशीनगर को दिया जाने वाला राशन नेपाल और बांग्लादेश पहुंचा दिया जाता था. आज अगर कोई गरीबों के लिए राशन निगलने की कोशिश करता है तो उसे जेल की हवा खानी पड़ेगी. हम इस प्रतिबद्धता के साथ काम कर रहे हैं.’

उन्होंने कहा था, ‘पहले ‘अब्बा जान’ कहने वाले गरीबों की नौकरी लूटते थे. पिछले 4.5 साल में हमने 4.5 लाख युवाओं को रोजगार दिया है. इस दौरान यहां खड़ी इन महिला कॉन्स्टेबलों को नियुक्ति मिली. उनमें से किसी को भी कोई सिफारिश नहीं लानी पड़ी और न ही कोई रिश्वत देनी पड़ी. लेकिन वे निश्चित रूप से रोमियों को ‘अब्बा जान’ कहकर सबक सिखाती हैं.’

उन्होंने कहा था, ‘क्या आपको लगता है कि राम भक्तों पर गोलियां चलाने वालों ने राम मंदिर बनाया होता? गोली चलाने और दंगे कराने वालों ने कश्मीर से धारा 370 हटाया होता? तालिबान का समर्थन करने वालों ने तीन तलाक को खत्म कर दिया होता? इस राज्य के लोगों को कभी भी इस जातिवादी और वंशवादी मानसिकता को स्वीकार नहीं करना चाहिए. याद रखें, बिच्छू चाहे जहां भी हो, डंक मारेगा.’

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)