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गौरी लंकेश और कलबुर्गी की हत्या एक जैसी पिस्तौल से की गई: फॉरेंसिक जांच

वरिष्ठ पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या पांच सितंबर को बेंगलुरु स्थित उनके घर में कर दी गई थी.

Gauri Lankesh MM Karburgi Facebook PTI

गौरी लंकेश और एमएम कलबुर्गी. (फोटो: फेसबुक/पीटीआई)

फॉरेंसिक जांच के मुताबिक़ वरिष्ठ पत्रकार गौरी लंकेश और कर्नाटक के जाने-माने तर्कवादी और शोधकर्ता एमएम कलबुर्गी की हत्या एक जैसी पिस्तौल से की गई है.

इसके अलावा हत्या करने के तरीक़े, समय और जगह में भी समानता पाई गई है. इस मामले को सीपीआई नेता और तर्कवादी गोविंद पानसरे और डॉ. नरेंद्र दाभोलकर की हत्या से भी जोड़ कर देखा जा रहा है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि गौरी लंकेश की हत्या की जांच कर रहे विशेष जांच दल (एसआईटी) को फॉरेंसिक जांच के बाद जानकारी दी गई है कि एमएम कलबुर्गी और गौरी लंकेश की हत्या में इस्तेमाल की गई गोलियां और पिस्तौल एक जैसे ही हैं.

पांच सितंबर को वरिष्ठ पत्रकार गौरी लंकेश की बेंगलुरु स्थित घर में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. हिंदुत्ववादी सांप्रदायिक राजनीति की कट्टर विरोधी गौरी लंकेश कर्नाटक से निकलने वाली साप्ताहिक पत्रिका ‘गौरी लंकेश पत्रिके’ की संपादक थीं.

रिपोर्ट के अनुसार, गौरी लंकेश की हत्या के बाद मिलीं गोलियां और कारतूस, दो साल पहले मारे गए कलबुर्गी की हत्या में इस्तेमाल की गईं गोलियों और कारतूस से मेल खाती हैं. प्राथमिक फॉरेंसिक जांच में पता चला है कि दोनों ही मामलों में गोलियां 7.65 मिलीमीटर की देसी पिस्तौल से चलाई गई हैं.

वरिष्ठ पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या बेंगलुरु स्थित उनके घर में बाइकसवार अज्ञात हमलावरों द्वारा बीते 5 सितंबर को की गई थी. गौरी लंकेश को करीब शाम 8:00 बजे 7.65 मिमी देसी पिस्तौल से मारा गया था जब वह कार पार्क करने के लिए अपने घर का दरवाज़ा खोल रहीं थी.

इसी तरह 30 अगस्त 2015 को शाम करीब 8:40 बजे पर कन्नड़ शोधकर्ता कलबुर्गी की भी एक अज्ञात व्यक्ति द्वारा गोली मारकर उनके घर में हत्या कर दी गई थी.

पुलिस ने घटना के बाद गौरी लंकेश के दिल और फेफड़े से पार हो जाने वाली तीन गोलियों समेत एक और गोली बरामद की जो उन्हें लगने से चूक गई. पुलिस ने घटनास्थल से चार कारतूस बरामद किए थे, वहीं कुछ गोलियां मेटल डिटेक्टर से खोजने के बाद मिली थीं.

इससे पहले इस बात की भी पुष्टि की गई थी कि साल 2015 के फरवरी में गोविंद पंसारे और साल 2013 के अगस्त महीने में नरेंद्र दाभोलकर की भी हत्या इसी तरह की देसी पिस्तौल से की गई थी.

पोस्टमॉर्टम में गौरी लंकेश के शव से मिलीं तीन गोलियों के निशान से इससे पहले हुए हादसों से जुड़ी कड़ी और भी साफ हो गई. पुलिस सूत्रों के मुताबिक, गोलियां उनकी छाती और सिर पर चलाई गई थीं और हमलावर मोटरसाइकिल पर सवार थे. ठीक उसी तरह से जैसे पानसरे, कलबुर्गी और दाभोलकर की हत्या मामले में हुआ था.

कर्नाटक की सीआईडी टीम ने साल 2015 में कलबुर्गी और पानसरे की हत्या में मिले सबूतों के आधार पर दोनों मामलों में समानता की पुष्टि की थी.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, गौरी लंकेश और एमएम कलबुर्गी की हत्या मामले में बैलिस्टिक सबूतों की फॉरेंसिक जांच की तुलना जब महाराष्ट्र के कोल्हापुर में 16 फरवरी 2015 को मारे गए तर्कवादी गोविंद पानसरे से की जाती है तो पता चलता है कि 30 महीने के दौरान इन तीन हत्याओं में एक ही पिस्तौल का इस्तेमाल किया गया है.

गोविंद पानसरे और उनकी पत्नी उमा पानसरे पर 7.65 मिलीमीटर की देसी पिस्तौल से पांच गोलियां मारी गई थी. इस हमले में उमा पानसरे को बचा लिया गया था.

साथ ही पानसरे और दाभोलकर की हत्या के मामलों में पाया गया कि पानसरे की हत्या में इस्तेमाल की गई दूसरी बंदूक से दाभोलकर की हत्या की गई थी.

पानसरे, कलबुर्गी और दाभोलकर की हत्या की मामलों की जांच कर रही एजेंसियां अब तक खाली हाथ हैं. वहीं एक सीआईबी जांच में ये बात भी सामने आई है कि पानसरे की हत्या में दक्षिणपंथी संगठन सनातन संस्था का हाथ था.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार गौरी लंकेश की हत्या के मामले में कर्नाटक का विशेष जांच दल दूसरे पहलुओं को भी ध्यान में रखते हुए जांच कर रहा है.

बीते बुधवार को गौरी लंकेश के परिवारवालों से भी सवाल जवाब किया गया. पुलिस ने उन सहयोगियों से भी पूछताछ की जिनकी गौरी लंकेश ने नक्सल आंदोलन से निकलकर मुख्यधारा में प्रवेश करने में मदद की थी.