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केंद्र ने पर्यावरण और बाल अधिकारों पर काम कर रहे 10 एनजीओ की फंडिंग रोकीः रिपोर्ट

भारतीय रिज़र्व बैंक के इस साल जुलाई के नोटिस में कहा गया है कि विदेशी एनजीओ को विदेशी योगदान विनियमन अधिनियम, 2010 की पूर्व संदर्भ श्रेणी (पीआरसी) में रखा गया है. इसका अर्थ है कि जब कोई विदेशी दानकर्ता भारत में प्राप्तकर्ता एसोसिएशन को राशि भेजेगा, तब इसके लिए उसे केंद्रीय गृह मंत्रालय से पूर्व में मंज़ूरी लेनी होगी.

(फोटोः रॉयटर्स)

नई दिल्लीः केंद्र सरकार ने पर्यावरणीय मुद्दों, जलवायु परिवर्तन और बाल अधिकार मामलों पर काम कर रहे दस अंतर्राष्ट्रीय गैर सरकारी संगठनों (एनजीओ) की फंडिंग पर रोक लगा दी है.

द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय रिजर्व बैंक (आरीबीआई) के इस साल एक जुलाई के नोटिस में कहा गया है कि विदेशी एनजीओ को विदेशी योगदान नियमन अधिनियम (एफसीआरए) 2010 की पूर्व संदर्भ श्रेणी (पीआरसी) में रखा गया है.

इसका मतलब है कि जब एक विदेशी दानकर्ता भारत में प्राप्तकर्ता एसोसिएशन (जो अब पीआरसी के तहत है) को पैसा ट्रांसफर करेगा तो इसके लिए अब दानकर्ता को केंद्रीय गृह मंत्रालय से पूर्व में मंजूरी लेनी होगी.

इन एनजीओ में अमेरिका के ओमिदयार नेटवर्क इंटरनेशनल, द स्टारडस्ट फाउंडेशन, ह्यूमैनिटी इंटरनेशनल, ऑस्ट्रेलिया के वॉक फ्री फाउंडेशन और मिंडेरू फाउंडेशन, ब्रिटेन के चिल्ड्रेन इनवेस्टमेंट फंड फाउंडेशन, द फ्रीडम फंड और लॉडेस फाउंडेशन, यूके के लेगाटम फंड और यूरोपियन क्लाइमेट फाउंडेशन है.

बता दें कि पीआरसी में पहले से ही 80 एनजीओ शामिल हैं. द हिंदू ने एक नोटिस का हवाला दिया है, जिसे एक निजी बैक ने हाल ही में अपनी शाखाओं को भेजा था.

इस नोटिस में आरबीआई के दिशानिर्देशों का हवाला देते हुए कहा है कि भारत में किसी संगठन या व्यक्ति को दानकर्ता एजेंसियों द्वारा दिए गए फंड के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय के विदेशी प्रभाग के एफसीआरए विंग से मंजूरी लेना अनिवार्य है.

जब एक सरकारी अधिकारी से पूछा गया कि सूची में इतने जलवायु संगठनों को क्यों रखा गया है? इसके जवाब में कहा गया कि जलवायु एनजीओ कोयले के इस्तेमाल के खिलाफ अपने पक्ष को बहुत मुखर तरीके से रखते हैं.

अधिकारी ने इसे एफसीआरए प्रावधानों का उल्लंघन माना है.

बता दें कि एफसीआरए में 20 सितंबर 2020 को संशोधन किया गया था, जिसके बाद कई अग्रणी संगठनों ने कहा था कि नए प्रावधानों से छोटे एनजीओ के कामगारों की आजीविका गंभीर रूप से प्रभावित होगी और इससे इस पूरे सेक्टर को गंभीर नुकसान होगा.

इन संशोधनों में एक प्रावधान को जोड़ा गया है, जिसमें विदेशी फंड को ऐसे किसी शख्स को पास जाने से रोकने की व्यवस्था की गई है, जो विदेशी फंड स्वीकार करने के लिए आधिकारिक तौर पर पंजीकृत नहीं है. इसका मतलब है कि अब विदेशी फंड जमीनी स्तर पर काम कर रहे छोटे एनजीओ को ट्रांसफर नहीं किया जा सकेगा.

नए संशोधनों में प्रशासनिक उद्देश्यों से विदेशी फंड के इस्तेमाल पर भी प्रतिबंध लगाया गया है. इसे पचास फीसदी से घटाकर 20 फीसदी किया गया है.

इसके अलावा जिस अवधि में सरकार किसी शख्स का पंजीकरण रद्द कर सकती है, उस 180 दिन की अवधि में अतिरिक्त 180 दिन जोड़े गए हैं.