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बॉम्बे हाईकोर्ट के बाद मद्रास उच्च न्यायालय ने नए आईटी नियमों के कुछ प्रावधानों पर रोक लगाई

डिजिटल न्यूज़ पब्लिशर्स एसोसिएशन, पत्रकार मुकुंद पद्मनाभन और संगीतकार टीएम कृष्णा की नए आईटी नियमों की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली जनहित याचिकाओं पर अदालत ने नियम 9 के उपबंध (1) एवं (3) पर रोक लगाई है. ये उप-खंड आचार संहिता के पालन को निर्धारित करते हैं.

मद्रास हाईकोर्ट. (फोटो साभार: फेसबुक/@Chennaiungalkaiyil)

नई दिल्ली: मद्रास हाईकोर्ट ने बीते गुरुवार को हाल ही में लागू  सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021, जिसे नए आईटी नियम के नाम से भी जाना जाता है, के कुछ प्रावधानों पर रोक लगा दी.

पिछले महीने ऐसे ही मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने ऐसा ही आदेश पारित किया था.

अदालत ने नियम 9 के उपबंध (1) एवं (3) पर रोक लगा दी. ये उप-खंड आचार संहिता के पालन को निर्धारित करते हैं. इन उपबंधों को इस साल फरवरी में मूल आईटी नियमों में शामिल किया गया था.

बॉम्बे हाईकोर्ट ने 14 अगस्त को सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) नियम, 2021 के कुछ हिस्सों पर अंतरिम रोक लगा दी थी. नियम के तहत यह जरूरी है कि सभी ऑनलाइन प्रकाशक ‘आचार संहिता’ का पालन करें.

मद्रास उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश संजीव बनर्जी और जस्टिस पीडी ऑडिकेसवालु की पीठ ने प्रख्यात संगीतकार टीएम कृष्णा, पत्रकार मुकुंद पद्मनाभन और डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन की जनहित याचिकाओं पर अंतरिम आदेश पारित करते हुए यह रोक लगाई है.

इस एसोसिएशन में 13 मीडिया संस्थान और अन्य लोग शामिल हैं. इन याचिकाओं में नए नियमों की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई है. इन याचिकाओं में विशेष रूप से आईटी नियम 2021 के नियम 9 को चुनौती दी गई थी, जो केंद्र सरकार को निगरानी तंत्र स्थापित करने की अनुमति देता है.

इसके पहले चरण में प्रकाशकों द्वारा स्वत: विनियमन, दूसरे चरण में प्रकाशकों के स्वत: विनियामक निकायों द्वारा स्वत: विनियमन और तीसरे चरण में केंद्रीय सरकार द्वारा निरीक्षण तंत्र स्थापित करने का प्रावधान है.

पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ताओं की इस दलील में प्रथमदृष्टया आधार है कि सरकार द्वारा मीडिया को नियंत्रित करने का तंत्र प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक दोनों मीडिया को उनकी आजादी और लोकतांत्रिक सिद्धांतों से वंचित कर सकता है.

दूसरी ओर वरिष्ठ अधिवक्ता राजशेखर राव द्वारा यह भी अदालत के ध्यान में लाया गया कि आईटी नियमों के नियम 3 और 7 सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के मूल कानून में शामिल किए बिना ही लागू कर दिए गए हैं.

अदालत को बताया गया कि उच्चतम न्यायालय में इसी तरह के मामले लंबित हैं और उन पर अगले महीने के पहले सप्ताह में सुनवाई होनी है. इस पर उच्च न्यायालय ने मामले की सुनवाई अक्टूबर के अंतिम सप्ताह के लिए स्थगित कर दी.

बता दें कि सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 (आईटी नियम) को चुनौती देने वाली कई याचिकाएं दिल्ली और मद्रास हाईकोर्ट सहित विभिन्न उच्च न्यायालयों में लंबित हैं.

याचिकाएं आईटी नियमों की संवैधानिक वैधता को चुनौती देती हैं, जिसमें विशेष रूप से नियमों के भाग III को चुनौती दी गई है, जो डिजिटल मीडिया प्रकाशनों को विनियमित करना चाहता है.

याचिकाओं का तर्क है, नियमों का भाग III आईटी अधिनियम (जिसके तहत नियमों को फ्रेम किया गया है) द्वारा निर्धारित अधिकार क्षेत्र से परे है और यह संविधान के विपरीत भी है.

कई व्यक्तियों और संगठनों- जिनमें द वायर, द न्यूज मिनट की धन्या राजेंद्रन, द वायर के एमके वेणु, द क्विंट, प्रतिध्वनि और लाइव लॉ अपने-अपने राज्यों में विशेष रूप से महाराष्ट्र, केरल, दिल्ली और तमिलनाडु के उच्च न्यायालयों का रुख कर चुके हैं.

वहीं, डिजिटल न्यूज में बड़ी हिस्सेदारी रखने वाले 13 परंपरागत अखबार और टेलीविजन मीडिया की कंपनियों ने भी डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन (डीएनपीए) के तहत मद्रास हाईकोर्ट में एक रिट याचिका दायर करते हुए इंफॉरमेशन टेक्नोलॉजी (इंटरमीडियरी गाइडलाइंस एंड डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड) रूल्स, 2021 को संविधान विरोधी, अवैध और संविधान के अनुच्छेद 14, अनुच्छेद 19 (1) क और अनुच्छेद 19 (1) छ का उल्लंघन करने वाला घोषित करने की मांग की है.

पत्रकार निखिल वागले और वेबसाइट द लीफलेट ने नियमों को बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी है. कन्नड समाचार आउटलेट प्रतिध्वनि ने कर्नाटक उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है. भारत की सबसे बड़ी समाचार एजेंसी प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (पीटीआई) ने भी नियमों के खिलाफ दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख किया है.

बीते 9 जुलाई को लाइव लॉ को दी गई इसी तरह की सुरक्षा का हवाला देते हुए केरल उच्च न्यायालय ने यह भी आदेश दिया कि सरकार द्वारा आईटी नियमों के तहत न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन (एनबीए) के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जा सकती है. एनबीए कई समाचार चैनलों का प्रतिनिधित्व करता है.

इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने आईटी नियमों को चुनौती देने वाले मामलों की विभिन्न हाईकोर्टों में चल रही कार्यवाही पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)