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जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क में टाइगर सफारी के लिए 163 नहीं, 10,000 पेड़ काटे गए: याचिका

डिस्कवरी चैनल के शो ‘मैन वर्सेज़ वाइल्ड’ की शूटिंग के लिए साल 2019 में उत्तराखंड के जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने टाइगर सफारी प्रोजेक्ट की घोषणा की थी. इसके लिए राज्य सरकार ने पर्यावरण मंत्रालय से 163 पेड़ काटने की मंज़ूरी मांगी थी. अब सुप्रीम कोर्ट के एक वकील व कार्यकर्ता गौरव बंसल ने राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण में दायर एक याचिका में दस हज़ार पेड़ काटे जाने का दावा किया है.

(फोटो साभार: corbettparkonline.com)

नई दिल्ली: उत्तराखंड के जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क में टाइगर सफारी, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट है, को लेकर एक नया विवाद सामने आया है, जिसमें ये आरोप लगाया गया है कि सफारी के लिए 163 पेड़ नहीं, बल्कि 10,000 पेड़ काटे गए हैं.

साल 2019 में नरेंद्र मोदी की मौजूदगी वाले डिस्कवरी चैनल के मशहूर शो ‘मैन वर्सेज वाइल्ड’ की शूटिंग के दौरान इस तरह के सफारी प्रोजेक्ट की परिकल्पना की गई थी.

इसे लेकर उस समय कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि जब पूरा देश पुलवामा हमले में जान गंवाने वाले जवानों को लेकर शोक मना रहा था उस समय प्रधानमंत्री जिम कॉर्बेट पार्क में शाम को एक फिल्म की शूटिंग में व्यस्त थे.

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट वकील और कार्यकर्ता गौरव बंसल ने पिछले महीने 26 अगस्त को राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) में एक याचिका दायर कर दावा किया था कि कॉर्बेट नेशनल पार्क में टाइगर सफारी की व्यवस्था करने के लिए 10,000 पेड़ काटे गए हैं.

इसे लेकर बीते शुक्रवार को केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण की उप महानिरीक्षक वन सोनाली घोष ने उत्तराखंड वन विभाग को पत्र लिखकर इस मामले की वास्तविक स्थिति बताने को कहा है.

उत्तराखंड के वन क्षेत्र प्रमुख राजीव भरतरी ने कहा कि उन्होंने प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) से एक हफ्ते में रिपोर्ट मांगी है.

साल 2019 में उत्तराखंड सरकार ने टाइगर सफारी प्रोजेक्ट लागू करने के लिए पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से मंजूरी मांगी थी. उन्होंने अपने आवेदन में कहा था कि इसमें 163 पेड़ काटे जाएंगे.

इसके बाद पार्क के पाखरो जोन में सफारी शुरू करने की इजाजत दी गई और काम शुरू किया गया.

हालांकि अब बंसल ने अपने याचिका में मांग की है कि काटे गए पेड़ों की वास्तविक संख्या बताई जाए. उन्होंने इस परियोजना को राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण और केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण से मिली मंजूरी को भी रद्द करने की मांग की है.

बंसल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन करते हुए इतने पेड़ काटे गए हैं. उन्होंने कहा, ‘सुप्रीम कोर्ट ने साल 2001 में अपने एक आदेश में कहा था कि कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में किसी भी स्थिति में कोई भी पेड़ नहीं काटा जाना चाहिए.’

बंसल ने कहा कि कॉर्बेट के पाखरो ब्लॉक में गैर-वन कार्यों के लिए वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980 की धारा दो के तहत वन सलाहकार समिति से मंजूरी की आवश्यकता होती है.

डिविजनल वन अधिकारी (कालागढ़) किशनचंद, जिनके अधिकार क्षेत्र में टाइगर सफारी का क्षेत्र आता है, ने आरोपों को खारिज कर दिया और कहा कि वन निगम द्वारा केवल 163 पेड़ों को चिह्नित किया था और इन्हें ही काटा गया था.

हालांकि टाइम्स ऑफ इंडिया ने सूत्रों के हवाले से ये पुष्टि की है कि अधिकारियों को पता था कि 10,000 से 12,000 पेड़ काटे जाएंगे.