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सुप्रीम कोर्ट ने महिलाओं को इस साल की एनडीए प्रवेश परीक्षा में बैठने की इजाज़त दी

सुप्रीम कोर्ट ने एनडीए प्रवेश परीक्षा में महिला उम्मीदवारों को अगले साल से शामिल करने की अनुमति के लिए केंद्र सरकार का अनुरोध अस्वीकार करते हुए कहा कि शीर्ष अदालत नहीं चाहती कि महिलाओं को उनके अधिकार से वंचित किया जाए.

(फोटो: रॉयटर्स)

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने महिलाओं को नवंबर में एनडीए की परीक्षा में भाग लेने की अनुमति देते हुए बुधवार को कहा कि इसके लिए मई 2022 तक का इंतजार नहीं किया जा सकता.

जस्टिस संजय किशन कौल की अध्यक्षता वाली पीठ ने एनडीए की प्रवेश परीक्षा में महिला उम्मीदवारों को अगले साल से शामिल करने की अनुमति देने के लिए केंद्र का अनुरोध अस्वीकार कर दिया. पीठ ने कहा कि शीर्ष अदालत नहीं चाहती कि महिलाओं को उनके अधिकार से वंचित किया जाए.

केंद्र ने शीर्ष अदालत को बताया था कि महिला उम्मीदवारों को राष्ट्रीय रक्षा अकादमी में प्रवेश परीक्षा में बैठने की अनुमति देने वाली अधिसूचना अगले साल मई तक जारी की जाएगी.

केंद्र ने कहा था कि रक्षा सेवाओं ने एनडीए में महिला कैडेट के लिए व्यापक पाठ्यक्रम को तेजी से तैयार करने के लिए विशेषज्ञों के एक अध्ययन समूह का गठन किया गया है. साथ ही सभी प्रासंगिक पहलुओं को शामिल करते हुए एनडीए में महिला कैडेट के प्रशिक्षण के लिए एक समग्र तथा भविष्यवादी प्रस्ताव पेश करने के लिए एक बोर्ड ऑफ ऑफिसर्स का गठन किया गया है.

सुनवाई शुरू होते ही वरिष्ठ अधिवक्ता चिन्मय प्रदीप शर्मा ने पीठ को बताया कि एक साल में दो परीक्षाएं होती हैं- एनडीए I और एनडीए II

शर्मा ने कहा, ‘पहली परीक्षा के लिए, यूपीएससी जनवरी में अधिसूचना जारी करता है और दूसरी परीक्षा अधिसूचना मई और जून में जारी की जाती है. जनवरी में जारी अधिसूचना के तहत अप्रैल में परीक्षा होती है और जून में जारी अधिसूचना के तहत सितंबर में परीक्षा होती है. प्रक्रिया के तहत जॉइनिंग अगले साल होती है. इसलिए यदि सरकार के अनुसार, मई 2022 में अधिसूचना जारी की जाती है तो जॉइनिंग जून 2023 में होगी.’

उन्होंने कहा कि एनडीए परीक्षा में महिला उम्मीदवारों को भाग लेने की अनुमति देने वाला पीठ का अंतरिम आदेश बिल्कुल स्पष्ट है कि इस साल कोविड-19 के कारण नवंबर में होने वाली इस परीक्षा में लड़कियों को भाग लेने की अनुमति दी जानी चाहिए.

पीठ ने कहा कि केंद्र को इंतजाम करने के लिए कुछ समय चाहिए, लेकिन महिलाओं के परीक्षा में बैठने को एक साल तक नहीं टाला जा सकता.

केंद्र की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि पाठ्यक्रम, बुनियादी ढांचे, फिटनेस प्रशिक्षण, आवास सुविधाओं आदि के लिए रक्षा सेवाओं द्वारा अध्ययन समूह का गठन किया गया है.

उन्होंने 14 नवंबर को होने वाली आगामी एनडीए प्रवेश परीक्षा को छोड़ने की अपील की. हालांकि, पीठ ने एएसजी से कहा कि प्रक्रिया शुरू होनी चाहिए और अन्य कामकाज चरणबद्ध तरीके से पूरे किए जा सकते हैं.

पीठ ने कहा, ‘हम आपकी सभी समस्याओं को समझते हैं. लेकिन मुझे यकीन है कि आप लोग समाधान खोजने में सक्षम हैं और दूसरे बैच को वंचित नहीं होने देंगे. हमने अंतरिम आदेश में कहा था कि परीक्षा होनी चाहिए. योजना पर आगे बढ़ा जा सकता है.’

पीठ ने कहा, ‘सशस्त्र सेवाओं ने बहुत कठिन परिस्थितियों का सामना किया है. आपात स्थिति से निपटना उनके प्रशिक्षण का एक हिस्सा है. हमें यकीन है कि वे इस ‘आपातकालीन स्थिति’ से पार पाने में भी सक्षम होंगे.’

जस्टिस एसके कौल की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए सशस्त्र बल सबसे अच्छी प्रतिक्रिया टीम है और उम्मीद है कि बिना देरी किए महिलाओं को एनडीए में शामिल करने का मार्ग प्रशस्त करने के लिए आवश्यक व्यवस्था की जाएगी.

न्यायलय ने कहा कि रक्षा विभाग को यूपीएससी के सहयोग से जरूरी काम करना चाहिए.

शीर्ष अदालत ने याचिकाकर्ता कुश कालरा की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता चिन्मय प्रदीप शर्मा की दलीलों पर गौर किया और कहा कि वह महिलाओं को एनडीए में शामिल करने को एक साल तक प्रतीक्षा नहीं की जा सकती.

शीर्ष अदालत ने याचिका को लंबित रखा और कहा कि अब जरूरत पड़ने पर आगे के निर्देशों के लिए जनवरी, 2022 के तीसरे सप्ताह में सुनवाई की जाएगी.

पीठ के आदेश के बाद याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता मोहित पॉल ने कहा कि यूपीएससी ने अभी तक शुद्धिपत्र अधिसूचना जारी नहीं की है.

यूपीएससी की ओर से पेश वकील ने पीठ से कहा कि प्राधिकरण रक्षा मंत्रालय के कुछ निर्देशों का इंतजार कर रहा है. इस पर शीर्ष अदालत ने निर्देश दिया कि इस संबंध में रक्षा विभाग द्वारा यूपीएससी के सहयोग से आवश्यक कार्य किया जाए.

पीठ ने कहा, ‘यह संक्रमण का दौर है, हम परीक्षा को टालना नहीं चाहते. यह परीक्षा भले ही बेहतर परिणाम न दे. लेकिन हमें भविष्य की ओर देखना है.’

गौरतलब है कि इस महीने की शुरुआत में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि सशस्त्र बलों ने एनडीए में महिलाओं की भर्ती करने का फैसला किया है.

शीर्ष अदालत वकील कुश कालरा की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जहां उन्होंने एनडीए में लैंगिक आधार पर योग्य महिलाओं को भर्ती न करने का मुद्दा उठाते हुए इसे समानता के मौलिक अधिकार का कथित तौर पर उल्लंघन बताया था.

याचिका में कहा गया था कि प्राधिकारियों ने 12वीं पास अविवाहित पुरुष उम्मीदवारों को राष्ट्रीय रक्षा अकादमी और नौसेना अकादमी परीक्षा देने की अनुमति दी हुई है लेकिन योग्य और इच्छुक महिला उम्मीदवारों को केवल उनके लिंग के आधार पर यह परीक्षा देने की अनुमति नहीं है तथा इसके लिए संविधान में कोई तार्किक या न्यायोचित स्पष्टीकरण भी नहीं है.

इसमें आरोप गया है कि भेदभाव का यह कृत्य समान और गैर भेदभाव के संवैधानिक मूल्यों के प्रति संबंधित प्राधिकारियों द्वारा किया गया अपमान है. याचिका में कहा गया है कि इसके परिणामस्वरूप महिलाओं के पास अधिकारी के तौर पर सशस्त्र बल में प्रवेश करने का कोई माध्यम नहीं है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)