भारत

राजस्थान: पुलिस हिरासत में आरोपी की मौत, पूरा थाना लाइनहाज़िर

घटना कोटा ज़िले की है, जहां नयापुरा थाने में एक 32 वर्षीय शख़्स को सार्वजनिक व्यवस्था बाधित करने के आरोप में रखा गया था. पुलिस के अनुसार, उन्होंने कथित रूप से बैरक में बने शौचालय में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली. परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने हिरासत में उनकी जान ली है. राज्य मानवाधिकार आयोग ने एसपी सिटी से हफ्ते भर के अंदर इस घटना पर रिपोर्ट देने को कहा है.

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

कोटा: राजस्थान के कोटा जिले में 32 वर्षीय व्यक्ति की पुलिस हिरासत में हुई मौत के मामले में थाने के सभी कर्मचारियों को गुरुवार को लाइनहाजिर कर दिया गया.

पुलिस ने बताया कि एक व्यक्ति ने थाने के अंदर कथित तौर पर आत्महत्या कर ली, जहां उसे सार्वजनिक व्यवस्था को बाधित करने के आरोप में रखा गया था.

पुलिस के मुताबिक, 32 वर्षीय कमल लोढ़ा को उसकी मौसी और उनके बेटे रवि की शिकायत पर बुधवार शाम करीब पांच बजे नयापुरा पुलिस स्टेशन लाया गया. कमल ने कथित रूप से पुलिस थाने के बैरक में बने शौचालय में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली.

पुलिस का कहना है कि वह नशे की हालत में उपद्रव कर रहे थे. मृतक के परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने हिरासत में उनकी जान ली है.

एएसपी (सिटी) प्रवीण जैन ने मीडिया को बताया कि इस मामले में दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 176 के तहत न्यायिक जांच चल रही है और थाने के पूरे स्टाफ को पुलिस लाइन भेज दिया गया है. नयापुरा थाने के थाना प्रभारी मुकेश मीणा को निलंबित कर दिया गया है.

पुलिस उपाधीक्षक भागवत सिंह हिंगद ने कहा कि लोढ़ा को बुधवार शाम करीब पांच बजे नयापुरा पुलिस स्टेशन लाया गया. लोढ़ा के रिश्तेदारों ने आरोप लगाया था कि वह नशे की हालत में उपद्रव कर रहे थे.

सिंह ने कहा कि मस्जिद नयापुरा इलाके के निवासी लोढ़ा के साथ उसकी मां भी थी, जो बाद में कानूनी औपचारिकताओं के लिए उसकी आईडी और फोटो लेने के लिए घर चली गईं.

पुलिस अधिकारी ने बताया कि जब लोढ़ा की गिरफ्तारी की औपचारिकताएं चल रही थीं, तो उसने पूछा कि क्या वह शौचालय जा सकता है. उसे थाने के बैरक के भीतर एक शौचालय में ले जाया गया जहां उसने कथित तौर पर शाम करीब सवा सात बजे अपनी कमीज को लोहे की ग्रिल से बांधकर उसमें लटककर आत्महत्या कर ली.

उन्होंने कहा कि मामले की न्यायिक जांच के आदेश दे दिए गए हैं. राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग ने  इस बारे में मीडिया में आई खबरों का संज्ञान लिया है.

जस्टिस गोपाल कृष्ण व्यास की अध्यक्षता वाली आयोग की एकल पीठ ने आईजी कोटा रेंज और कोटा (सिटी) पुलिस अधीक्षक को एक सप्ताह के भीतर मामले में तथ्यात्मक रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश जारी किया.

वहीं, लोढ़ा के परिवार के सदस्यों ने भाजपा के पूर्व विधायक प्रह्लाद गुंजाल के साथ थाने के बाहर धरना दिया और थाने के कर्मचारियों को निलंबित करने और उनके खिलाफ हत्या का मामला दर्ज करने की मांग की.

उन्होंने परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने और 10 लाख रुपये मुआवजे की भी मांग की.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, गुंजाल ने आत्महत्या पर सवाल उठाते हुए कहा कि 5 फीट 9 इंच लंबे लोढ़ा के लिए बैरक के 4 फीट 3 इंच ऊंचे गेट पर शर्ट बांधकर आत्महत्या करना संभव नहीं था. यह कैसे हो सकता है. पूर्व विधायक ने आरोप लगाया कि लोढ़ा को पुलिस ने मार डाला.

परिजनों ने शव लेने या पोस्टमार्टम कराने से इनकार कर दिया था. बाद में प्रशासन की ओर से मुख्यमंत्री राहत कोष से दो लाख रुपये मुआवजा देने का आश्वासन मिलने और लोढ़ा की पत्नी को छह लाख रुपये की अन्य सहायता व अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर ट्रस्ट (यूआइटी) में ठेका नौकरी देने का विशेष प्रस्ताव मिलने पर परिजन शव को वहां से ले जाने पर राजी हो गए.

कोटा शहर के पुलिस अधीक्षक विकास पाठक स्थिति का जायजा लेने के लिए मौके पर पहुंचे.

लोढ़ा के खिलाफ चोरी के चार और अवैध हथियार रखने के पांच मामले दर्ज हैं. हिंगद ने बताया कि उसके खिलाफ 26 अगस्त को उसी थाने में नशे की हालत में हंगामा करने का मामला दर्ज किया गया था.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)