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गौरी लंकेश हत्या: आरोप तय करने के लिए आरोपियों को बेंगलुरु सेंट्रल जेल भेजने का आदेश

बेंगलुरु के सत्र न्यायालय ने कहा कि चूंकि आरोपी अलग-अलग जेलों में बंद हैं और उन्हें सुनवाई के दौरान एक साथ पेश नहीं किया जा सका है, जिसके चलते बार-बार आरोप तय करने की कार्यवाही टाली जाती रही है, इसलिए उन्हें एक जगह ट्रांसफर किया जाए.

(फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: कर्नाटक में बेंगलुरु के प्रधान सत्र कोर्ट ने आदेश दिया है कि पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या मामले में अलग-अलग जेलों में बंद आरोपियों को एक जेल (बेंगलुरु स्थित सेंट्रल जेल, पाराप्पना अग्रहारा) में ट्रांसफर किया जाए. न्यायालय ने आरोप तय करने के लिए ये निर्देश दिया है.

लाइव लॉ के मुताबिक, बीते 22 सितंबर को जारी अपने आदेश में कोर्ट ने कहा कि चूंकि आरोपी अलग-अलग जेलों में बंद हैं और उन्हें सुनवाई के दौरान एक साथ पेश नहीं किया जा सका है, जिसके चलते बार-बार आरोप तय करने की कार्यवाही टाली जाती रही है, इसलिए बाल्लारी, तुमकुर, मैसूर और शिवमोगा की जेलों में बंद आरोपियों को बेंगलुरु स्थित सेंट्रल जेल, पाराप्पना अग्रहारा में लाया जाए.

इसके अलावा कोर्ट ने जांच अधिकारी को ये निर्देश दिया कि वे ऑर्थर रोड जेल, बॉम्बे का आईपी एड्रेस साझा करें, ताकि इस जेल में बंद आरोपी की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा की जा सके.

न्यायालय ने इस बात का संकेत भी दिया है कि वे अगली सुनवाई में आरोप तय कर सकते हैं. अदालत ने कहा, ‘जांच अधिकारी और संबंधित जेल अधिकारियों को जरूरी सूचनाओं से अवगत करा दिया जाए और 25/10/2021 को आरोप तय करने और जमानत याचिका सुनने के लिए सूचीबद्ध किया जाए.’

गौरतलब है कि पांच सितंबर, 2017 को  बेंगलुरु स्थित घर के पास ही लंकेश को रात करीब 8:00 बजे गोली मार दी गई थी. उन्हें हिंदुत्व के खिलाफ आलोचनात्मक रुख रखने के लिए जाना जाता था.

गौरी लंकेश हत्याकांड की जांच कर रही एसआईटी ने अब तक इस मामले में 17 लोगों को गिरफ्तार किया है और ये सभी लोग अति दक्षिणपंथी हिंदू समूहों से जुड़े हुए हैं.

उनकी बहन कविता लंकेश ने हाईकोर्ट के उस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें आरोपी मोहन नायक के खिलाफ जांच के लिए कर्नाटक संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (केसीओसीए) के प्रावधान का इस्तेमाल करने के पुलिस प्राधिकार के 14 अगस्त, 2018 के आदेश को रद्द कर दिया गया था.

कविता के बाद कर्नाटक पुलिस ने भी केसीओसीए के आरोप हटाए जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वह हाईकोर्ट के इस आदेश का एक हिस्सा रद्द करना चाहता है.

इस मामले को लेकर पहली चार्जशीट 30 मई को आरोपी नवीन कुमार के खिलाफ दायर की गई थी. 23 नवंबर, 2018 को एसआईटी ने प्रधान दीवानी और सत्र अदालत में 9,235 पन्नों की अतिरिक्त चार्जशीट पेश की थी. दूसरी चार्जशीट में 18 लोगों को हत्या का आरोपी बताया गया है.