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सरकार मीडिया उद्योग को मदद करे, पत्रकारों के लिए वेजबोर्ड का कोई तुक नहीं है: आईएनएस

मीडिया मालिकों के संगठन इंडियन न्यूजपेपर सोसायटी ने कहा, नोटबंदी के कारण विज्ञापनों में कमी आने से अख़बार प्रभावित हुए हैं.

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फोटो: रॉयटर्स

बेंगलुरु: इंडियन न्यूजपेपर सोसायटी (आईएनएस) ने आज शुक्रवार को कहा कि नोटबंदी के कारण विज्ञापनों में कमी आने से अखबारों की वित्तीय स्थिति खराब हुई है. सोसायटी ने सरकार से इस उद्योग का समर्थन करने और इसे मजबूत करने की अपील की. आईएनएस मीडिया मालिकों का संगठन है जो अपने बारे में प्रेस की स्वतंत्रता को सुनिश्चित करने के लिए काम करने का दावा करता है.

इसने मीडिया कार्यालयों पर हमले और पत्रकारों के खिलाफ हिंसा की भी निंदा की और इसे नि:संदेह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को खतरा बताया. सोसायटी ने सरकार से अपील की कि पत्रकारों और गैर पत्रकारों के लिए अब किसी तरह के वेजबोर्ड का गठन नहीं किया जाए क्योंकि किसी दूसरे उद्योग में ऐसा चलन नहीं है.

आईएनएस के निवर्तमान अध्यक्ष सोमेश शर्मा ने यहां वार्षिक महासभा में कहा, भारतीय अखबार व्यवसाय विज्ञापन के राजस्व पर काफी निर्भर है और नोटबंदी ने स्थिति को और खराब कर दिया.

उन्होंने कहा कि मीडिया और खासकर अखबार निर्णायक मोड़ पर हैं. उन्होंने कहा, यह समय है कि समाचार पत्र उद्योग पर कर लगाने और उसकी राजस्व व्यवस्था पर प्रहार करने के बजाय अखबार जगत का समर्थन किया जाए और उसे मजबूत बनाया जाए.

उन्होंने कहा कि आईएनएस सरकार के समक्ष उचित राजस्व और श्रम नीतियों के लिए अनुरोध कर रहा है. असामाजिक तत्वों द्वारा मीडियाकर्मियों पर हमले की निंदा करते हुए उन्होंने राज्य सरकारों और कानून-व्यवस्था लागू करने वाली एजेंसियों से अपील की कि इस तरह की घटनाओं से सख्ती से निपटा जाए और प्रेस की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए.

वेजबोर्ड के बारे में उन्होंने कहा कि भारत में उदार अर्थव्यवस्था में अखबार कर्मियों के लिए आवश्यक वेजबोर्ड तय करने की जरूरत नहीं है. उन्होंने कहा, चूंकि किसी दूसरे उद्योग में वेजबोर्ड नहीं है इसलिए केवल प्रिंट मीडिया के लिए इस तरह के वेजबोर्ड बनाने का कोई तुक नहीं है. उन्होंने कहा, मैं सरकार से पुरजोर अपील करता हूं कि अखबारों के पत्रकारों एवं गैर पत्रकारों के लिए वेजबोर्ड का गठन नहीं करे.

आईएनएस की कार्यकारी समिति के सदस्यों में एल आदिमूलम (स्वास्थ्य एवं एंटीसेप्टिक), आशीष बग्गा (इंडिया टुडे), एस बालासुब्रमण्यम आदित्यन (दैनिक थांति), गिरीश अग्रवाल (दैनिक भास्कर), समाहित बाल (प्रगतिवादी), वीके चोपड़ा (दैनिक असम) और विजय कुमार चोपड़ा (पंजाब केसरी) शामिल हैं.

अन्य सदस्यों में विजय जवाहरलाल दर्डा (लोकमत), जगजीत सिंह दर्डी, विवेक गोयनका (इंडियन एक्सप्रेस), महेंद्र मोहन गुप्ता (दैनिक जागरण), संजय गुप्ता (दैनिक जागरण), मोहित जैन (इकनॉमिक टाइम्स) शामिल हैं.

अन्य सदस्यों में सीएच किरॉन, आर लक्ष्मीपति, राजुल माहेश्वरी, विलास ए मराठे, डीडी पुरकायस्थ, राकेश शर्मा, राजीव वर्मा, विनय वर्मा भी शामिल हैं

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)