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असमः बेदख़ली अभियान के दौरान हिंसा भड़काने के आरोप में दो लोग गिरफ़्तार

असम के दरांग ज़िले के सिपाझार में 23 सितंबर को राज्य सरकार द्वारा एक कृषि परियोजना के लिए अधिग्रहीत ज़मीन से कथित ‘अवैध अतिक्रमणकारियों’ को हटाने के दौरान पुलिस और स्थानीय लोगों के बीच झड़प हो गई थी. इस दौरान पुलिस की गोलीबारी में 12 साल के बच्चे सहित दो लोगों की मौत हुई, जबकि नौ पुलिसकर्मियों सहित 15 लोग घायल हुए थे.

बीते 24 सितंबर 2021 को दरांग जिले के गोरुखुटी में एक बेदखली अभियान के दौरान ध्वस्त किए गए अपने घरों के पास जमा ग्रामीण. (फाइल फोटो: पीटीआई)

गुवाहाटीः असम पुलिस ने 23 सितंबर को राज्य के दरांग जिले के सिपाझार में बेदखली अभियान के दौरान हिंसा भड़काने के आरोप में दो लोगों को गिरफ्तार किया है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए दोनों लोगों की पहचान असमत अली अहमद (37 वर्ष) और चांद मामूद (47 वर्ष) हैं, जो किरकारा और धौलपुर-3 गांवों से हैं.

दरांग के पुलिस अधीक्षक सुशांत बिस्वा शर्मा ने बताया, ‘हमारी जांच में पता चला है कि इन्होंने प्रदर्शनकारियों को उकसाया और उन्हें बेदखली अभियान के दौरान अपने घरों से बाहर नहीं जाने को कहा.’

एसपी ने कहा कि दोनों पर आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है, जिसमें हत्या का प्रयास और आपराधिक साजिश शामिल है.

बता दें कि पिछले हफ्ते धौलपुर-3 गांव में सरकारी बेदखली अभियान हिंसक हो गया था, जिसमें 12 साल के बच्चे सहित दो लोगों की मौत हो गई थी. पुलिस के साथ हुई झड़पों में करीब 15 लोग घायल भी हो गए थे.

इस घटना का एक चौंकाने वाला वीडियो सामने आया था, जिसमें छाती पर गोली लगने से जख्मी एक व्यक्ति को कैमरा लिए हुए एक शख्स पीटता हुआ दिखाई दे रहा है.

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा ने मौतों की न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं और जिला प्रशासन की ओर से हायर किए गए कैमरापर्सन बिजय बनिया को गिरफ्तार करने का निर्देश दिया है.

रिपोर्ट के अनुसार, घटना के वायरल वीडियो में बनिया को जमीन पर गिरे प्रदर्शनकारी के शरीर पर कूदते देखा गया था. आरोपी फिलहाल गुवाहाटी जेल में है.

यह पूछने पर कि वीडियो में दिखाई दे रहे पुलिसकर्मियों के खिलाफ किसी तरह की कार्रवाई की गई है? इस पर एसपी ने कहा, ‘अभी पुलिस द्वारा कोई कार्रवाई नही की गई है.’

उन्होंने कहा कि अहमद और मामूद पंचायती निकाय के स्थानीय नेता हैं और अब तक हुई जांच के अनुसार पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के साथ उनके संबंधों के कोई साक्ष्य नहीं मिले हैं.

बता दें कि पीएफआई एक मुस्लिम संगठन है, जो सरकारी संगठनों की जांच के दायरे में है.

मुख्यमंत्री हिमंता ने बीते 25 सितंबर को पीएफआई का नाम लेते हुए संकेत दिया था कि इस हिंसा से पीएफआई जुड़ा हो सकता है.

उन्होंने कहा था, ‘घटना से एक दिन पहले बेदखल परिवारों को खाना देने के नाम पर पीएफआई ने घटनास्थल का दौरा किया था.’

मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा, ‘राज्य सरकार के पास स्पष्ट साक्ष्य हैं कि कुछ लोगों ने पिछले कुछ महीनों से गरीब लोगों से यह कहते हुए 28 लाख रुपये इकट्ठा किए गए कि वे बेदखली के खिलाफ सरकार को मनाएंगे. हमारे पास इन लोगों के नाम हैं. जब ये लोग अतिक्रमण अभियान का विरोध नहीं कर सकें तो उन्होंने लोगों को इकट्ठा कर हंगामा करना शुरू कर दिया. इस घटना में शामिल छह लोगों के नाम हमारे पास है.’

उन्होंने कहा था, ‘घटना से एक दिन पहले बेदखल परिवारों के लिए खाद्य सामग्री ले जाने के नाम पर पीएफआई के सदस्यों ने अतिक्रमण वाली जगह का दौरा किया था. इसके सबूत सामने आ रहे हैं कि एक कॉलेज के शिक्षक सहित कुछ लोगों को फंसाया गया. इन्हें जांच के दायरे में लाया जाएगा. पीएफआई पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग के लिए असम सरकार पहले ही केंद्र सरकार को डोजियर भेज चुकी है.’

रिपोर्ट के अनुसार, मुख्यमंत्री ने कहा था कि उन्होंने मामले में बनिया की भूमिका की सीआईडी जांच का आदेश दिया है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हम इसकी जांच नहीं करेंगे कि किसने वहां 10,000 लोगों को इकट्ठा किया.

हिमंता ने कहा कि बेदखली अभियान से सिर्फ 60 लोग प्रभावित हुए, लेकिन वहां मौजूदा 10,000 लोगों ने 27 पुलिसकर्मियों का घेराव किया.

पहचान उजागर नहीं करने की शर्त पर असम के एक शीर्ष पुलिस अधिकारी ने बताया था, ‘इस प्रदर्शन में बाहरी लोग शामिल थे. ये वही लोग थे, जिन्होंने प्रदर्शन को हिंसक रंग दिया. ड्रोन तस्वीरों से पता चलता है कि सोच-समझकर प्रतिरोध किया गया, जिसे बड़ी चतुराई से अंजाम दिया गया.’

मुस्लिम संगठनों के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर घटना पर रोष जताया

देश में मुसलमानों के दो प्रमुख संगठनों जमीयत उलेमा-ए-हिंद और जमात-ए-इस्लामी हिंद के एक संयुक्त प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को असम के मुख्यमंत्री से गुवाहाटी में मुलाकात की और इस घटना के पीड़ितों के लिए उचित मुआवजे की मांग की.

इसके साथ ही प्रतिनिधिमंडल ने उम्मीद जताई कि मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा पीड़ितों को इंसाफ दिलाने में व्यक्तिगत रूप से मदद करेंगे.

राष्ट्रीय राजधानी में जमीयत की ओर से सोमवार को जारी बयान में कहा गया, ‘जमीयत उलेमा-ए-हिंद और जमात-ए-इस्लामी हिंद के एक संयुक्त प्रतिनिधिमंडल ने असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा से गुवाहाटी स्थित उनके कार्यालय में भेंट की और दरांग जिले के धौलपुर में सरकारी भूमि को खाली कराने में हुई हिंसक घटना और अमानवीयता तथा गरीब व मजदूर वर्ग को अपने ही देश में बेघर करने पर अपना रोष जताया.’

बयान के मुताबिक, प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से इस घटना की उच्चस्तरीय न्यायिक जांच कराने, पुलिस कार्रवाई में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को 20-20 लाख रुपये और घायलों को 10-10 लाख रुपये का मुआवजा देने की मांग की.

मुस्लिम संगठन के बयान के मुताबिक, प्रतिनिधिमंडल में शामिल जमीयत के महासचिव मौलाना हकीमुददीन कासमी ने कहा, ‘दरांग जिले में जो कुछ हुआ वह बड़ा अमानवीय और बर्बरतापूर्ण है. हम यह आशा करते हैं कि आप निर्बल, असहाय, पीड़ितों को न्याय दिलाने में व्यक्तिगत तौर से सहायता करेंगे. हमारे देश के संविधान में मानवाधिकारों को प्राथमिकता प्राप्त है. कोई भी भूमि का टुकड़ा किसी भी व्यक्ति के जीवन से अधिक महत्वपूर्ण नहीं है.’

उन्होंने कहा, ‘इसलिए हम आशा करते हैं कि असम के मुख्यमंत्री मानवीय मूल्यों की सुरक्षा करेंगे और पीड़ितों को न्याय दिलाने में बड़ी तत्परता से काम लेंगे.’

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)