भारत

विषम मौसम के कारण देश में जून से अगस्त के बीच 400 से अधिक लोगों की मौत

भारत मौसम विज्ञान विभाग द्वारा जुटाए गए आंकड़ों के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून के कारण विषम मौसम की घटनाओं में पिछले तीन महीने में देशभर में कम से कम 435 लोगों की मौत हो गई. इनमें आकाशीय बिजली गिरने से जान गंवाने वाले 240 लोग शामिल हैं. यह संख्या कुल हताहतों का 50 फीसदी से अधिक है. इन घटनाओं में हुई मौतों में से एक तिहाई मौत महाराष्ट्र में हुई.

(फोटो: पीटीआई)

मुंबई: दक्षिण पश्चिम मानसून के कारण विषम मौसम की घटनाओं में पिछले तीन महीने में देश भर में कम से कम 435 लोगों की मौत हुई है. भारत मौसम विज्ञान विभाग की ओर से जुटाए गए आंकड़ों में यह जानकारी दी गई है.

आंकड़ों के अनुसार, इनमें आकाशीय बिजली गिरने से जान गंवाने वाले 240 लोग शामिल हैं. यह संख्या कुल हताहतों का 50 फीसदी से अधिक है.

मौसम विभाग के अनुसार, पिछले तीन माह (जून से अगस्त) में देशभर में विषम मौसमी घटनाओं में हुई मौतों में से एक तिहाई मौत महाराष्ट्र में हुई.

इसमें कहा गया है कि तीन महीने में खराब मौसम की वजह से जून में 109 लोगों की, जुलाई में 301 लोगों की, जबकि अगस्त में कुल 25 लोगों की मौत हुई है.

मानसून के दौरान खराब मौसम में आकाशीय बिजली गिरना, भारी बारिश (बाढ़ का कारण) तथा अन्य घटनाएं शामिल हैं.

महाराष्ट्र में इससे पहले अधिकारियों ने कहा था कि इस साल जुलाई में प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में भारी बारिश के कारण आई बाढ़ एवं भूस्खलन की घटनाओं में कम से कम 213 लोगों की मौत हो चुकी है.

प्रदेश के कोंकण क्षेत्र के अलावा कोल्हापुर और सांगली जिले में बड़े पैमाने पर क्षति हुई.

बीते 24 जुलाई को राज्य सरकार ने बताया था कि महाराष्ट्र में केवल दो दिनों में बारिश से जुड़ी घटनाओं और भूस्खलन में लगभग 136 लोगों की मौत हो गई थी.

मौसम विभाग के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र ने कहा कि सितंबर महीने में होने वाली मौत के आंकड़ों को एकत्र किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे ग्रह तीव्र गति से गर्म होता जा रहा है, प्रतिकूल मौसम संबंधी घटनाएं बढ़ रही हैं.

मालूम हो कि पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव एम. राजीवन और अन्य वैज्ञानिकों द्वारा बीते मई में जारी किए अध्ययन रिपोर्ट में कहा गया था कि भारत में 1970-2019 के 50 सालों के दौरान अति प्रतिकूल मौसम संबंधी कुल 7,063 घटनाओं में 141,308 लोगों की जान चली गई, जिनमें से 40,358 लोगों (यानी 28 फीसद) ने चक्रवात की वजह से और 65,130 लोगों (46 फीसद से थोड़ा अधिक) ने बाढ़ के कारण अपनी जान गंवाई.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)