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जहां भी मानवाधिकारों को ठेस पहुंचे, वहां धारा 144 लागू करना केंद्र का पसंदीदा काम: महबूबा मुफ़्ती

पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की अध्यक्ष महबूबा मुफ़्ती का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब रविवार को लखीमपुर खीरी में हुई हिंसा में चार किसानों सहित आठ लोगों की मौत हो गई. इस घटना के बाद विपक्षी दलों के कई नेताओं ने रात में उत्तर प्रदेश जाने की कोशिश की लेकिन पुलिस ने उन्हें जाने से रोक दिया.

पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती. (फोटो: पीटीआई)

श्रीनगरः उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में हुई हिंसा के संदर्भ में पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने सोमवार को कहा कि जहां कहीं भी मानवाधिकारों और गरिमा को ठेस पहुंची है, वहां धारा 144 लागू करना केंद्र सरकार का पसंदीदा काम रहा है.

उन्होंने दावा किया कि सरकार अपने ही लोगों के खिलाफ कड़ा रुख रखती है लेकिन चीनी सैनिकों का बांहें खोल कर स्वागत करती है.

मुफ्ती का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब रविवार को लखीमपुर खीरी में हुई हिंसा में चार किसानों सहित आठ लोगों की मौत हो गई. इस घटना के बाद विपक्षी दलों के कई नेताओं ने रात में उत्तर प्रदेश जाने की कोशिश की लेकिन पुलिस ने उन्हें जाने से रोक दिया.

बता दें कि उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के दौरे को लेकर किसानों के विरोध प्रदर्शन के दौरान रविवार को लखीमपुर खीरी जिले के तिकोनिया इलाके में भड़की हिंसा में आठ लोगों की मौत हो गई थी.

पीडीपी प्रमुख ने ट्वीट कर कहा, ‘जहां भी मानवाधिकारों और गरिमा को कुचला जाता है, वहां धारा 144 लागू करना केंद्र सरकार का पसंदीदा काम रहा है. यह सरकार अपने ही लोगों के खिलाफ कड़े रुख अपनाने से नहीं हिचकिचाती लेकिन चीनी सैनिकों का खुले हाथों से स्वागत करती है.’

मुफ्ती ने कहा, ‘2019 के बाद से जम्मू कश्मीर में किए गए उत्पीड़न की तुलना भी नहीं की जा सकती है. जम्मू कश्मीर में उदासीनतापूर्ण रवैये के साथ जो कुछ शुरू हुआ था, वह अब पूरे देश में फैल गया है. हम कब बोलेंगे?’

 लखीमपुर खीरी की स्थिति पर प्रतिक्रिया देते हुए नेशनल कांफ्रेंस (नेकां) के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने कहा कि उत्तर प्रदेश नया जम्मू-कश्मीर बन गया है.

उन्होंने ट्वीट कर कहा, ‘उत्तर प्रदेश नया जम्मू-कश्मीर है.’

बता दें कि रविवार को उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य द्वारा केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा के पैतृक गांव में आयोजित किए जा रहे एक कार्यक्रम में शिरकत करने के विरोध को लेकर भड़की हिंसा में चार किसानों समेत आठ लोगों की मौत हो गई.

आरोप है कि मिश्रा के बेटे आशीष ने किसानों पर गाड़ी चढ़ा दी जिससे उनकी मौत हुई. इस मामले में आशीष समेत कई लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है.

यह घटना तिकोनिया कोतवाली क्षेत्र के तिकोनिया-बनबीरपुर मार्ग पर हुई. खबरों के मुताबिक ‘स्पोर्ट्स यूटिलिटी व्हीकल’ (एसयूवी) वाहनों द्वारा कुछ प्रदर्शनकारियों को कथित तौर पर टक्कर मारे जाने के बाद नाराज किसानों ने दो एसयूवी में आग लगा दी.

किसानों का आरोप है कि एक वाहन में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा के पुत्र आशीष मिश्रा सवार थे, जिन्होंने किसानों को अपनी गाड़ी से कुचला है. हालांकि मिश्रा ने आरोप को खारिज कर दिया है.

इस मामले में पुलिस ने दो एफआईआर दर्ज की है. अपर मुख्य सचिव (गृह) अवनीश अवस्थी ने बताया कि इस मामले में आशीष मिश्रा सहित कई अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया हैं.

इस बीच उत्तर प्रदेश सरकार ने लखीमपुर खीरी हिंसा की जांच हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जज से करवाने की बात कही है. साथ ही घटना में मारे गए चार किसानों के परिवारों को 45-45 लाख रुपये की वित्तीय मदद और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की घोषणा की है. घायल किसानों को दस लाख रुपये मुआवज़ा दिया जाएगा.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)