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असम: बंद पेपर मिलों के ठेकेदारों ने मुख्यमंत्री से बकाया भुगतान की अपील की

असम में हिंदुस्तान पेपर कॉरपोरेशन लिमिटेड के हैलाकांडी ज़िले में कछार पेपर मिल एवं मोरीगांव जिले के जगीरोड में नगांव पेपर मिलें- क्रमश: अक्टूबर 2015 और मार्च 2017 से बंद पड़ी हैं. नगांव पेपर मिल ठेकेदार संगठन ने कहा है कि मिल बंद होने से वे असहाय और बेरोज़गार हो गए हैं. नियोक्ताओं और श्रमिकों को लंबे समय से वेतन का भुगतान नहीं किया गया है और उनकी वित्तीय स्थिति ख़राब हो रही है.

नगांव पेपर मिल. (फोटो साभार: https://nenow.in/)

गुवाहाटी: असम में हिंदुस्तान पेपर कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) के बंद पेपर मिल के ठेकेदारों के एक संगठन ने मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा से अपील की है कि इसके सदस्यों के लंबित बकाया का भुगतान करें.

नगांव पेपर मिल ठेकेदार संगठन के अध्यक्ष नारायण प्रसाद शर्मा ने गुवाहाटी में संवाददाता सम्मेलन में कहा कि पेपर मिल के 2017 में बंद होने से पहले इकाई के संचालन में ठेकेदारों, आपूर्तिकर्ताओं और खासकर ग्रामीण क्षेत्रों के बांस उत्पादकों ने काफी मदद की.

शर्मा ने कहा कि उन्हें जो काम दिए गए उसे उन्होंने पूरी ईमानदारी से किया. उन्होंने कहा, ‘मिल बंद होने से हम असहाय और बेरोजगार हो गए हैं. हमने विभिन्न ठेकों और नगांव पेपर मिल में आपूर्ति के लिए जो खर्च किए हैं, वे पिछले पांच वर्षों से बकाया हैं.’

उन्होंने कहा कि ठेकेदारों और आपूर्तिकर्ताओं की बकाया राशि को राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) ने भी स्वीकार किया है.

उन्होंने कहा कि संगठन को उम्मीद है और मुख्यमंत्री में विश्वास है कि वह मामले पर गौर करेंगे और उनकी समस्याओं का समाधान करने के लिए पहल करेंगे.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, एसोसिएशन के महासचिव लाल राजभर ने कहा कि दो पेपर मिल- हैलाकांडी जिले में कछार पेपर मिल एवं मोरीगांव जिले के जगीरोड में नगांव पेपर मिल, हिंदुस्तान पेपर कॉरपोरेशन लिमिटेड की इकाइयां थीं. ये दोनों मिलें क्रमश: अक्टूबर 2015 और मार्च 2017 से बंद पड़ी हैं.

राजभर ने कहा कि नियोक्ताओं और श्रमिकों को लंबे समय से उनके वेतन का भुगतान नहीं किया गया है और उनकी वित्तीय स्थिति खराब हो रही है.

उन्होंने कहा कि वर्तमान में असम में एचपीसीएल और उसकी दो मिलों- नगांव पेपर मिल और कछार पेपर मिल – का मामला नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल की अदालत में है, जिसने दोनों मिलों की संपत्ति के परिसमापन और भुगतान जारी करने का निर्णय दिया है.

एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री से उनकी वित्तीय कठिनाई को हल करने का आग्रह किया है, क्योंकि उन्होंने मिलों के बंद होने के कारण अपनी नौकरी गंवाने वालों के लिए 570 करोड़ रुपये के राहत पैकेज की घोषणा की थी.

असम सरकार ने पिछले हफ्ते कहा था कि वह दोनों बंद मिलों की संपत्ति का अधिग्रहण करेगी और राहत पैकेज मुहैया कराएगी.

मुख्यमंत्री ने कहा था, ‘मंत्रिमंडल ने दो पेपर मिलों के लिए 700 करोड़ रुपये के पैकेज को मंजूरी दी है. इनमें से 570 करोड़ रुपये की राशि कर्मचारियों की देनदारी के लिए होगी, जबकि बाकी राशि का इस्तेमाल बिजली बिल भरने और तरलता (नकदी) उपलब्ध कराने के भुगतान में व्यय होगा.’

शर्मा ने कहा था कि औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद एसपीसी की जगीरोड स्थित पंचग्राम और नगांव मिल की 470 एकड़ जमीन असम सरकार को स्थानांतरित की जाएगी.

मिलों द्वारा परिचालन बंद करने के बाद कर्मचारियों ने कई मौकों पर विरोध किया है और मिलों को पुनर्जीवित करने और उनके लंबित बकाया को चुकाने के लिए अदालतों का रुख किया.

मिलें बंद होने के बाद से खराब स्वास्थ्य के कारण 95 कर्मचारियों की मौत हो चुकी है. 23 सितंबर को यूनियन के एक नेता ने कहा था कि आत्महत्या से कम से कम तीन कर्मचारियों की मौत हो गई है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)