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लखीमपुर खीरी हिंसाः राज्यमंत्री के ड्राइवर के पीछे रह गया है क़र्ज़ और ग़रीबी से जूझता परिवार

लखीमपुर खीरी ज़िले के तिकोनिया में तीन अक्टूबर को चार किसानों के साथ भाजपा के दो कार्यकर्ताओं, राज्यमंत्री अजय मिश्रा के ड्राइवर हरिओम और एक पत्रकार रमन कश्यप की भी मौत हो गई थी. घर के एकमात्र कमाने वाले हरिओम के परिवार में सालों से बीमार पिता, वृद्ध मां और छोटे भाई-बहन हैं.

हरिओम मिश्रा. (सभी फोटोः इस्मत आरा/द वायर)

फरधान (लखीमपुर खीरी): उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में तीन अक्टूबर को हुई हिंसा में केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्रा के ड्राइवर हरिओम मिश्रा की मौत को एक हफ्ता हो गया है लेकिन अभी भी उनके पिता इस बात से अनजान हैं कि अब उनका बेटा इस दुनिया में नहीं है.

हरिओम की बहन महेसरी देवी अपने हाथों से पिता को खाना खिलाते हुए धीरे से बताती है कि उनके पिता की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है.

महेसरी ने द वायर  को बताया, ‘मेरे पिता को नहीं पता है कि भैया अब नहीं हैं. वह मानसिक तौर पर स्थिर नहीं हैं और बिना हमारी मदद के हिल भी नहीं सकते हैं. वे बिस्तर पर ही रहते हैं और पूरा समय उनके देखभाल की जरूरत पड़ती है.’

बता दें कि हरिओम मिश्रा को तीन अक्टूबर को दंगल के लिए मुख्य अतिथि को लाने के लिए बतौर ड्राइवर भेजा गया था. यह दंगल हिंसास्थल से कुछ किलोमीटर की दूरी पर हो रहा था.

हरिओम के छोटे भाई श्रीराम के स्थानीय पुलिस थाने कोतवाली तिकुनिया में दिए गए बयान के मुताबिक, ‘हरिओम तीन अक्टूबर को बनवीरपुर में आयोजित दंगल में मुख्य अतिथि उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य को लेने जा रहे थे, जहां दंगल का आयोजन किया गया था.’

तीन अक्टूबर को जिस समय यह घटना हुई, श्रीराम उस समय घर पर अपने बीमार पिता की देखभाल कर रहे थे. पीड़ित परिवार ने जैसे ही टेलीविजन पर हिंसा की यह खबर देखी तो उन्होंने तुरंत हरिओम को फोन करने की कोशिश की लेकिन उनका फोन स्विच ऑफ आ रहा था.

हरिओम की बहनों का कहना है कि उन्हें टीवी के जरिये बाद में उनके भाई की मौत का पता चला क्योंकि हिंसा में मारे गए लोगों के नाम टीवी पर फ्लैश किए जा रहे थे. हरिओम की मां निशा देवी का कहती हैं कि हरिओम कभी दंगल से लौटा ही नहीं.

उन्होंने कहा, ‘उसने कहा था कि वह दंगल से लौटने पर अपने पिता को लखनऊ में किसी अच्छे डॉक्टर को दिखाएगा. वह इसके लिए पैसों की भी बचत कर रहा था.’

हरिओम की मां कमरे में रखे एक ट्रंक की ओर इशारा करते हुए बताती है, ‘वह मेरे बगल में अक्सर इसी ट्रंक पर सोता था.’

हरिओम के घर में एक गाय है, जो परिवार की एकमात्र पूंजी है. हरिओम के घर की बिना प्लास्टर की दीवारें, आंगन में कुछ चारपाई, प्लास्टिक की कुर्सियां और एक तरफ रखे मिट्टी के चूल्हे से उनके घर की आर्थिक स्थिति का पता लगाया जा सकता है.

हरिओम के परिवार के मुताबिक, ‘वे बनवीरपुर में अजय मिश्रा के घर पर रहते थे और पिता के लिए जरूरी दवाओं के साथ हफ्ते में एक बार घर वापस आते थे.’

पिता के साथ हरिओम की बहन.

परिवार में एकमात्र कमाने वाले थे हरिओम

हरिओम अपने परिवार में इकलौता कमाने वाले शख्स थे. उनका परिवार घटनास्थल से लगभग 100 किलोमीटर की दूरी पर लखीमपुर खीरी के फरधान में परसेहरा बुजुर्ग नाम के गांव में रहता है.

परिवार का कहना है कि हरिओम अपने बीमार मां-बाप की देखभाल करता था और अपनी 23 साल की बहन महेसरी की शादी के बारे में सोच रहे थे, साथ ही अपने छोटे भाई श्रीराम को पढ़ाने की भी कोशिश कर रहे थे. पांच भाई-बहनों में महेसरी अकेली हैं, जिसने स्नातक की पढ़ाई पूरी की है.

लखीमपुर खीरी हिंसा में मारे गए अन्य लोगों के घरों की तुलना में हरिओम के घर के बाहर न कोई पुलिसकर्मी तैनात मिला और न ही यहां कोई मीडियाकर्मी थे.

कई वर्षों से केंद्रीय गृहराज्य मंत्री अजय मिश्रा का ड्राइवर होने की वजह से उन (हरिओम) पर मंत्री के परिवार को भरोसा था. इसी वजह से गृह मंत्रालय में पद मिलने की वजह से दिल्ली शिफ्ट हो जाने के बाद हरिओम को उनके (मंत्री) परिवार के ड्राइवर के तौर पर रखा गया था.

हरिओम को मंत्री के परिवार से 12,000 रुपये मासिक वेतन मिलता था. बीमार पिता के मेडिकल खर्चों के बीच इतनी कम आय से वह बमुश्किल ही अपना परिवार चला पाते थे.

हरिओम के पिता बीते एक दशक से बीमार हैं और उनके दवाइयों का खर्चा हर महीने लगभग 10,000 रुपये है. हरिओम की मां का कहना है कि हरिओम ने अपने पिता की तीन एकड़ जमीन पर किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के जरिये तीन लाख रुपये का कर्ज भी लिया था. इसके अलावा संबंधियों से दो से तीन लाख रुपये भी उधार लिए थे.

मेडिकल खर्चे, बहन की शादी

हरिओम की तीसरी बहन महेसरी देवी की अभी शादी नहीं हुई है. हरिओम की मां का कहना है कि वह उसकी शादी के लिए बचत कर रहा था और इसलिए उसने अपनी शादी के बारे में भी नहीं सोचा था.

महेसरी ने द वायर  को बताया, ‘वे हमेशा सोचते थे कि वे सभी का ख्याल रख सकते हैं और इन सभी जिम्मेदारियों की वजह से उन्होंने कभी शादी नहीं की.’

हरिओम के पिता लगभग एक दशक पहले बीमार हो गए थे इसलिए उन्होंने अपने पिता की देखभाल करने और उनके मेडिकल बिलों के भुगतान के लिए दसवीं के बाद पढ़ाई छोड़ दी थी.

बता दें कि तीन अक्टूबर को हरिओम की मौत के बाद चार अक्टूबर को उनके गांव में परिवार और कुछ पड़ोसियों की मौजूदगी मे उनका अंतिम संस्कार किया गया.

हरिओम के मालिक केंद्रीय गृहराज्य मंत्री अजय मिश्रा ने अगले दिन पीड़ित परिवार के घर जाने का वादा किया था लेकिन वे नहीं गए. हालांकि, परिवार का कहना है कि मंत्री जी ने आश्वासन दिया है कि वह एक लाख रुपये देकर हरिओम की बहन की शादी में मदद करेंगे.

हरिओम के चाचा चंद्रभाल मिश्रा भाजपा के सक्रिय कार्यकर्ता हैं. उन्होंने द वायर  को बताया कि भाजपा के स्थानीय विधायक योगेश वर्मा परिवार से मिलने आए थे.

चंद्रभाल ने कहा, ‘अगर किसान आंदोलन जारी रहा तो और हिंसा हो सकती है. गणतंत्र दिवस के बाद से ही किसानों में गुस्सा है, अगर उस दिन किसानों को संभाल लिया जाता तो ऐसा कुछ नहीं होता.’

हरिओम की मां का कहना है कि हरिओम को भाजपा कार्यकर्ता नहीं कहना चाहिए क्योंकि वह सिर्फ अपना काम कर रहा था.

हरिओम की बहन ने बताया, ‘उन्हें राजनीति से कुछ लेना-देना नहीं था. वे बस पैसे कमाना चाहते थे क्योंकि इसी से खाने और दवाई का इंतजाम होता.’

हरिओम की मां कहती हैं, ‘मेरे पास अपने बेटे को खोने का दर्द बांटने वाला कोई नहीं है. जिसने अपने बेटा खोया हो, वही इस दर्द को समझ सकता है.’

बता दें कि लखीमपुर खीरी जिले के तिकोनिया क्षेत्र में किसानों का एक समूह उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की यात्रा के खिलाफ तीन अक्टूबर को प्रदर्शन कर रहा था, तभी एक एसयूवी (कार) ने चार किसानों को कथित तौर पर कुचल दिया, जिससे उनकी मौत हो गई थी.

इस दौरान भड़की हिंसा में भाजपा के दो कार्यकर्ताओं, मंत्री अजय मिश्रा का ड्राइवर और एक निजी टीवी चैनल के लिए काम करने वाले पत्रकार रमन कश्यप की भी मौत हो गई थी.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.)