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मध्य प्रदेश: मुस्लिम परिवार ने भीड़ द्वारा पीटने और गांव छोड़ने के लिए धमकी देने का लगाया आरोप

मध्य प्रदेश में इंदौर ज़िले का मामला. पीड़ित मुस्लिम परिवार ने आरोप लगाया है कि भीड़ में शामिल लोग ‘जय श्री राम’ का नारा लगा रहे थे. हालांकि पुलिस का कहना है कि ये पैसे को लेकर विवाद है. पुलिस ने इस आरोप को सिरे से नकार दिया कि तय तारीख़ तक हिंदू बाहुल्य गांव ख़ाली करने का फ़रमान नहीं माने जाने पर मुस्लिम परिवार पर भीड़ ने हमला किया था.

(प्रतीकात्मक फोटो: धीरज मिश्रा/द वायर)

इंदौर:मध्य प्रदेश के इंदौर जिले के ग्रामीण क्षेत्र में शनिवार रात दो पक्षों के विवाद में एक ही परिवार के पांच सदस्यों समेत कम से कम सात लोग घायल हो गए. पुलिस ने रविवार को यह जानकारी दी.

उधर, मुस्लिम समुदाय के पीड़ित परिवार के लोगों का आरोप है कि दूसरे पक्ष ने उन्हें हिंदू बाहुल्य पिवड़ाय गांव को नौ अक्टूबर तक खाली करने का फरमान सुना दिया था और इसे नहीं माने जाने पर भीड़ ने उन पर हमला कर दिया था.

पुलिस अधीक्षक महेशचंद्र जैन ने बताया कि जिला मुख्यालय से करीब 20 किलोमीटर दूर पिवड़ाय गांव में शनिवार रात हुए विवाद में दो पक्षों के कुल सात लोग घायल हुए हैं.

उन्होंने बताया कि इनमें एक ही मुस्लिम परिवार के पांच लोग तथा हिंदू पक्ष के दो व्यक्ति शामिल हैं. साथ ही कहा कि घायलों को सामान्य चोटें आई हैं.

जैन ने इस आरोप को सिरे से नकार दिया कि तय तारीख तक हिंदू बाहुल्य गांव खाली करने का फरमान नहीं माने जाने पर मुस्लिम परिवार पर भीड़ ने हमला कर दिया.

सोशल मीडिया पर सांप्रदायिक रंग ले रही इस घटना को ‘दो पक्षों के बीच विवाद का सामान्य मामला’ बताते हुए पुलिस अधीक्षक ने कहा, ‘दोनों पक्षों के खिलाफ एक-दूसरे की शिकायत पर भारतीय दंड संहिता की धारा 294 (गाली-गलौज), 323 (मारपीट), 506 (आपराधिक धमकी) और 147 (बलवा) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है.’

जैन के मुताबिक, पिवड़ाय गांव में संबंधित मुस्लिम परिवार लोहे का सामान बनाने का काम करता है और इस सामान की मरम्मत को लेकर दो पक्षों के बीच विवाद के कारण शनिवार रात की हिंसक घटना सामने आई.

बहरहाल, पीड़ित परिवार के नजदीकी रिश्तेदार फजलुद्दीन ने कहा, ‘पिवड़ाय में रहने वाले मेरे नवासे ने बताया कि अन्य पक्ष ने उसके परिवार को दो-तीन महीने पहले धमकी देकर नौ अक्टूबर तक यह गांव खाली करने का फरमान सुना दिया था. इस तारीख तक गांव खाली नहीं किए जाने पर 30-40 ग्रामीणों ने शनिवार रात उसके परिवार पर हमला कर दिया.’

उन्होंने कहा कि कथित भीड़ के हमले में उनके परिवार की दो महिलाओं समेत पांच लोग घायल हुए हैं. फजलुद्दीन ने आरोप लगाया कि इस परिवार पर लोहे का सामान बनाने के उसके ही कारखाने के औजारों से हमला किया गया.

पीड़ित परिवार की कानूनी मदद के लिए सक्रिय वकील एहतेशाम हाशमी ने आरोप लगाया कि इस परिवार पर धार्मिक भेदभाव के कारण हमला किया गया. उन्होंने कहा, ‘हम इस मामले में उचित कानूनी कदम उठा रहे हैं.’

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक मुस्लिम परिवार ने आरोप लगाया है कि भीड़ में शामिल लोग ‘जय श्री राम’ का नारा लगा रहे थे और गांव नहीं छोड़ने के चलते उनकी पिटाई भी की. इस समूह ने एक महीने पहले चेतावनी दी थी कि गांव छोड़ दें.

रिपोर्ट के मुताबिक, गयासुद्दीन परिवार करीब दो साल पहले इस गांव में आया था और वे पेशे से लोहार हैं. वे अपनी आजीविका के लिए ट्रॉली और अन्य कृषि उपकरण बनाते थे.

शाहरुख गयासुद्दीन, जिनके 46 वर्षीय पिता फारुख गयासुद्दीन को भीड़ ने कथित रूप से पीटा था, ने बताया, ‘वे अंदर आए और पास में रखी रॉड से हमें पीटना शुरू कर दिया. उन्होंने मेरे पिता को कई बार मारा और जब मेरे चाचा ने हस्तक्षेप किया तो उन्होंने यह कहते हुए उन्हें भी पीटा कि हमने आपको गांव खाली करने के लिए कहा था, अब इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे.’

यह पूरी घटना करीब 25 मिनट तक चली थी, जिसके बाद भीड़ उनके घर से गई. इसके बाद परिवार के लोग खुदेल पुलिस स्टेशन पहुंचे, जहां से उन्हें मेडिकल परीक्षण के लिए इंदौर के महाराजी यशवंतराव अस्पताल भेजा गया और बाद में उनकी शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज की गई.

शाहरुख के कहा कि जब पहले इन लोगों ने परिवार को गांव खाली करने और छोड़ने की धमकी दी थी, तो उन्होंने ग्राम पंचायत से संपर्क किया और सरपंच को इस बारे में सूचित किया था. इसे लेकर सरपंच ने उन्हें आश्वासन दिया था कि चिंता की कोई बात नहीं है.

गयासुद्दीन परिवार की शिकायत के आधार पर पुलिस ने नौ लोगों के खिलाफ आईपीसी की धारा 294 (गाली-गलौज), 323 (मारपीट), 506 (आपराधिक धमकी), 147 (दंगा के लिए सजा), 506 (आपराधिक धमकी) इत्यादि के तहत मामला दर्ज किया है.

सब-इंस्पेक्टर विश्वजीत तोमर ने कहा, ‘गयासुद्दीन परिवार को दूसरे समूह द्वारा एक ट्रॉली बनाने के लिए कुछ पैसे दिए गए थे, लेकिन उन्होंने न तो ट्रॉली बनाई और न ही उन्होंने पैसे वापस किए, जो कि प्रथमदृष्टया घटना की वजह जैसा प्रतीत होता है और इसके चलते दो गुट भिड़ गए हैं. गांव के पास रहने वाले विकास पटेल की शिकायत के आधार पर एक-दूसरे की शिकायत दर्ज की गई है.’

हालांकि जब ये पूछा कि गया क्या हमला करने और धमकी देने वाले लोग आरएसएस से जुड़े हुए थे, तो तोमर ने ऐसी किसी जानकारी से इनकार किया.

उन्होंने यह भी कहा कि गयासुद्दीन परिवार द्वारा 100 से अधिक लोगों की भीड़ के बारे में किए गए दावों के विपरीत उनकी पिटाई करने में केवल नौ लोग शामिल थे और बाकी घर के आसपास जमा हुई भीड़ का हिस्सा थे.

पीड़ित परिवार के वकील एहतेशाम हाशमी ने कहा कि पुलिस ने परिवार द्वारा दी गई लिखित अर्जी के आधार पर प्राथमिकी दर्ज करने से इनकार कर दिया. इसके बजाय लगभग तीन से चार सब-इंस्पेक्टर शाहरुख (गयासुद्दीन) के साथ बैठे और फिर गरीब परिवार पर दबाव बनाने के लिए एक फर्जी प्राथमिकी दर्ज की.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)