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ताइवान की राष्ट्रपति ने राष्ट्रीय दिवस भाषण में कहा- उनका देश चीन के सामने नहीं झुकेगा

ताइवान पर चीन अपना अधिकार होने का दावा करता है, जबकि यह द्वीप 1949 में गृहयुद्ध के दौरान कम्युनिस्ट शासित मुख्य भूमि से अलग होने के बाद से स्वायत्तशासी है. दोनों देशों में बढ़ते तनाव के बीच ताइवान की राष्ट्रपति ने बातचीत और आपसी सम्मान का आह्वान करते हुए कहा कि ताइवान का भविष्य ताइवान के लोगों द्वारा ही तय किया जाना चाहिए.

ताइवान की राष्ट्रपति साई इंग वेन (फोटोः रॉयटर्स)

ताइपे: ताइवान की राष्ट्रपति साई इंग वेन ने चीन की ओर से एकीकरण को लेकर बढ़ते दबाव के बीच रविवार को द्वीप की रक्षा करने का संकल्प लिया. वेन ने यह संकल्प पिछले हफ्ते बीजिंग के साथ उत्पन्न अभूतपूर्व तनाव के बाद दोहराया है.

राष्ट्रपति साई इंग वेन ने कहा कि उनका देश चीन के दबाव के आगे नहीं झुकेगा. राष्ट्रपति ने रविवार को ताइवान के राष्ट्रीय दिवस के मौके पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, ‘उन्होंने तनाव कम होने की उम्मीद की थी, लेकिन हम अपनी राष्ट्रीय रक्षा को बढ़ावा देते रहेंगे.’

उन्होंने आगे कहा, ‘और हम यह सुनिश्चित करेंगे कि कोई भी ताइवान को चीन द्वारा निर्धारित मार्ग पर चलने के लिए मजबूर न करे. हम अपना बचाव करने के लिए दृढ़ संकल्प का प्रदर्शन करते रहेंगे.’

उन्होंने कहा, ‘इसका कारण यह है कि चीन ने जो रास्ता बनाया है, वह न तो ताइवान के लिए एक स्वतंत्र और लोकतांत्रिक जीवन शैली प्रदान करता है, न ही हमारे 2.3 करोड़ लोगों के लिए संप्रभुता प्रदान करता है.’

राष्ट्रपति साई इंग वेन ने अपने भाषण में राजनीतिक यथास्थिति बनाए रखने का आह्वान किया, जो चीन के बढ़ते दबाव को दिखाता है.

उन्होंने कहा, ‘हम यथास्थिति को एकतरफा रूप से बदलने से रोकने के लिए पूरी कोशिश करेंगे.’

राष्ट्रीय दिवस पर आयोजित परेड में ताइवान की रक्षा क्षमता का प्रदर्शन किया गया और इस दौरान राष्ट्रपति साई इंग वेन ने चीनी सेना के बलप्रयोग को दृढ़ता से खारिज किया.

बता दें कि ताइवान का राष्ट्रीय दिवस साल 1911 के वुचांग विद्रोह को याद करते हुए मनाया जाता है. इसके साथ ही चीन के किंग राजवंश की समाप्ति हुई थी और चीन गणराज्य की स्थापना हुई थी, लेकिन चीन के गृहयुद्ध की वजह से सरकार के तत्कालीन अधिकारी ताइवान भाग खड़े हुए थे. ‘’

ताइवान की राष्ट्रपति ने कहा कि हाल के कुछ हफ्तों में चीन के जेट विमानों द्वारा ताइवान के हवाई क्षेत्र में 100 से अधिक बार घुसपैठ की गई हैं.

कुछ रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका के विशेष-बल ताइवान के जवानों को प्रशिक्षण देने के लिए राजधानी ताइपे में हैं.

ताइवान की राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में बातचीत और आपसी सम्मान का आह्वान करते हुए कहा कि ताइवान का भविष्य ताइवान के लोगों द्वारा ही तय किया जाना चाहिए.

चीन, ताइवान के अपना क्षेत्र होने का दावा करता है, जबकि यह द्वीप 1949 में गृहयुद्ध के दौरान कम्युनिस्ट शासित मुख्य भूमि से अलग होने के बाद से स्वायत्तशासी है.

साई ने चीन के अधिनायकवादी और एकल पार्टी कम्युनिस्ट शासन प्रणाली के विपरीत ताइवान में जीवंत लोकतंत्र पर जोर दिया.

राष्ट्रपति साई ने चीन के अधिनायकवादी और एकल पार्टी कम्युनिस्ट शासन प्रणाली के विपरीत ताइवान में जीवंत लोकतंत्र पर जोर दिया.

सर्वेक्षण दिखाता है कि अधिकतर ताइवानी स्वतंत्र राज्य की यथास्थिति कायम रखने के पक्ष में हैं और चीन द्वारा एकीकरण का पुरजोर विरोध करते हैं, जबकि चीन का कहना है कि वह द्वीप पर नियंत्रण स्थापित करने के लिए जरूरत पड़ी तो सैन्य बल का भी इस्तेमाल करेगा.

बता दें कि राष्ट्रपति साई अपने सार्वजनिक संबोधन में शायद ही कभी चीन का नाम लेती हैं, लेकिन उनका यह भाषण बीते एक साल से चीन द्वारा सैन्य उत्पीड़न के कारण बढ़ते तनाव की ओर इशारा करता है. पिछले साल सितंबर से लेकर अब तक चीन ने 800 से अधिक बार अपने लड़ाकू विमानों को ताइवान के हवाई क्षेत्र की ओर भेजा है.

बीते शुक्रवार से चीन ने रिकॉर्ड संख्या में अपने लड़ाकू विमानों को ताइवान के अंतरराष्ट्रीय हवाई क्षेत्र में भेज रहा है. ताइवान संभावित खतरे के मद्देनजर जापान, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका जैसे देशों से अपने अनौपचारिक संबंधों को मजबूत कर रहा है.

साई ने कहा, ‘जितना अधिक चीन हम पर दबाव बनाएगा, उतनी ही हम उपलब्धि प्राप्त करेंगे. ताइवान शांतिपूर्ण क्षेत्रीय विकास में योगदान देना चाहता है, भले ही हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिति और तनावपूर्ण और जटिल’ हो गई है.’

साई ने कहा कि ताइवान शांतिपूर्ण क्षेत्रीय विकास में योगदान देना चाहता है, भले ही हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिति ‘और तनावपूर्ण और जटिल’ हो गई है.

राजधानी ताइपे के मध्य में प्रेसिडेंशियल ऑफिस बिल्डिंग में आयोजित समारोह के दौरान ताइवान के विभिन्न जातीय समूहों से गायकों ने कार्यक्रम प्रस्तुत किया. इस भवन का निर्माण जापानियों ने किया था, जिन्होंने द्वितीय विश्वयुद्ध की समाप्ति तक 500 सालों तक उपनिवेश के तौर पर इस द्वीप पर शासन किया था.

राष्ट्रपति के भाषण के बाद ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने मिसाइल लांचर, बख्तरबंद वाहनों सहित अपने हथियारों का प्रदर्शन किया, जबकि लड़ाकू विमानों और हेलीकॉप्टर ने फ्लाइट पास्ट किया. इनमें एक एफ-16, स्वदेशी लड़ाकू विमान और मिराज 2000 शामिल थे.

वायुसेना की ताकत का प्रदर्शन करने के बाद सीएम-32 टैंक और उसके बाद ट्रकों में रखी मिसाइल प्रणाली प्रदर्शित की गई.

मालूम हो कि एक दिन पहले ही चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अपना संकल्प दोहराया था कि बीजिंग के नियंत्रण के तहत चीन और ताइवान का एकीकरण किया जाएगा, लेकिन उन्होंने साथ में यह भी कहा कि शांतिपूर्ण एकीकरण संभव है.

शी ने कहा था, ‘कोई भी चीनी जनता की अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करने की दृढ़ इच्छाशक्ति और क्षमता को कमतर कर नहीं आंके.’

राष्ट्रपति जिनपिंग का यह बयान दोनों देशों के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच आया है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)