नॉर्थ ईस्ट

त्रिपुराः अलग राज्य की मांग को लेकर तिपरा मोथा के साथ चर्चा में भाजपा की सहयोगी आईपीएफटी

अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले अलग राज्य की मांग को लेकर बना प्रद्योत किशोर देबबर्मन की अगुवाई वाला तिपरा मोथा गठबंधन तेज़ी से अपना आधार बढ़ा रहा है. बीते कुछ समय में भाजपा सरकार की सहयोगी इंडीजिनस पीपुल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा के विधायकों सहित कई नेता और समर्थक इसमें शामिल हुए हैं.

(साभार: सोशल मीडिया)

नई दिल्लीः त्रिपुरा में भाजपा के नेतृत्व में सहयोगी पार्टी इंडीजिनस पीपुल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (आईपीएफटी) जनजातीय अधिकारों की रक्षा के लिए एक बार फिर अलग राज्य की मांग पर जोर देते हुए प्रद्योत किशोर देबबर्मन की अगुवाई वाले तिपरा मोथा गठबंधन से बातचीत कर रही है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, यह कदम इस महीने के अंत में होने वाले तिपरा मोथा के तीन दिवसीय प्रदर्शन से पहले हुआ है, जिसमें 1,000 से अधिक समर्थक और कार्यकर्ता ‘ग्रेटर तिपरालैंड’ की मांग को लेकर जंतर मंतर पर जुटेंगे.

दोनों पार्टियों ने इस साल अप्रैल में त्रिपुरा जनजातीय क्षेत्र स्वायत्त जिला परिषद (टीटीएडीसी) चुनाव से पहले हाथ मिलाया था लेकिन आईपीएफटी किसी सीट पर जीत दर्ज नहीं कर पाई जबकि तिपरा मोथा ने 28 सीटों में से 18 सीटों और भाजपा ने नौ सीटों पर जीत दर्ज की.

तभी से तिपरा मोथा तेजी से अपना आधार बढ़ा रही है, आईपीएफटी के विधायकों सहित कई नेता और समर्थक तिपरा में शामिल हुए हैं.

बता दें कि राज्य का लगभग दो-तिहाई क्षेत्र टीटीएडीसी के तहत आता है.

आईपीएफटी और तिपरा मोथा ने पूर्ण राज्य के दर्जे की मांग और त्रिपुरा के जनजातीय लोगों की सुरक्षा के लिए प्रस्तावित संयुक्त आंदोलन समिति पर चर्चा की.

इस बैठक में देबबर्मन और भाजपा की अगुवाई वाली सरकार में मंत्री आईपीएफटी के महासचिव मेवार कुमार जमातिया शामिल हुए. देबबर्मन ने कहा कि वह पुराने रिकॉर्ड को देखकर आईपीएफटी के प्रस्ताव को लेकर सावधानी से विचार कर रहे हैं.

देबबर्मन ने बताया कि उन्होंने आईपीएफटी को स्पष्ट किया है कि इस मांग पर संयुक्त आंदोलन से किसी तरह का समझौता नहीं किया जा सकता.

राज्य में 2023 में विधानसभा चुनाव से पहले अलग राज्य का मुद्दा एक बार फिर त्रिपुरा की राजनीति के केंद्र में आ गया है. हालांकि, यह मांग कोई नई नहीं है लेकिन प्रद्योत देबबर्मन की अगुवाई वाले तिपरा मोथा के तेजी से हो रहे विस्तार की वजह से राज्य की राजनीति में इस मुद्दे ने जोर पकड़ लिया है.

देबबर्मन ने कहा, ‘आईपीएफटी को हमें लिखित में देना होगा कि वे अलग राज्य की मांग को लेकर किसी तरह का समझौता नहीं करेंगे. उन्हें ऐसा कोई भी गठबंधन नहीं करना चाहिए जहां अन्य सहयोगी दल इस मांग का समर्थन नहीं करे. आईपीएफटी को यह स्पष्ट करना होगा कि वह हमारे द्वारा निर्धारित किए गए इन शर्तों और नियमों पर क्या रुख रखता है. भाजपा जैसी पार्टियों से कुछ सीटों के आश्वासन और स्वदेशी समुदायों के विकास के लिए वित्तीय मदद के वादों पर इस आंदोलन को रोका नहीं जा सकता.’

उन्होंने कहा, ‘दिल्ली में होने वाले प्रदर्शन के लिए तिपरा मोथा के 1,000 से अधिक समर्थकों और कार्यकर्ताओं को ले जाने के लिए एक ट्रेन बुक की गई है. यह प्रदर्शन 28 अक्टूबर से शुरू हो सकता है.’

बता दें कि दोनों पक्ष केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को संयुक्त ज्ञापन सौंपने के लिए आम सहमति बनाने की कोशिश कर रहे हैं.