राजनीति

यूपी: फर्ज़ी मार्कशीट के 28 साल पुराने मामले में भाजपा विधायक को पांच साल की जेल

उत्तर प्रदेश में अयोध्या के गोसाईगंज से भाजपा के विधायक इंद्र प्रताप तिवारी के ख़िलाफ़ 1992 में अयोध्या के साकेत डिग्री कॉलेज के तत्कालीन प्राचार्य यदुवंश राम त्रिपाठी ने मामला दर्ज कराया था. प्राथमिकी के अनुसार, स्नातक के दूसरे वर्ष में फे़ल हुए तिवारी ने 1990 में फर्जी मार्कशीट जमा कर अगली कक्षा में प्रवेश लिया था. इस मामले में 13 साल बाद आरोप-पत्र दाख़िल किया गया था.

इंद्र प्रताप तिवारी. (फोटो साभार: ट्विटर/@khabbutiwari)

अयोध्या: उत्तर प्रदेश में अयोध्या के गोसाईगंज से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक इंद्र प्रताप तिवारी को सोमवार को एक विशेष अदालत ने कॉलेज में दाखिले के लिए फर्जी अंकपत्र (मार्कशीट) के इस्तेमाल संबंधी 28 साल पुराने मामले में पांच साल जेल की सजा सुनाई है.

विशेष न्यायाधीश पूजा सिंह ने फैसला सुनाया और अदालत में मौजूद तिवारी को हिरासत में लेकर जेल भेज दिया गया. अदालत ने तिवारी पर आठ हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया.

गोसाईगंज विधानसभा क्षेत्र से इंद्र प्रताप तिवारी उर्फ खब्बू तिवारी निर्वाचित हुए हैं. तिवारी के खिलाफ 1992 में अयोध्या के साकेत डिग्री कॉलेज के तत्कालीन प्राचार्य यदुवंश राम त्रिपाठी ने राम जन्मभूमि थाने में मामला दर्ज कराया था.

प्राथमिकी के अनुसार, स्नातक के दूसरे वर्ष में अनुत्तीर्ण हुए तिवारी ने 1990 में फर्जी मार्कशीट जमा कर अगली कक्षा में प्रवेश लिया था. इस मामले में 13 साल बाद आरोप-पत्र दाखिल किया गया था.

कई मूल दस्तावेज रिकॉर्ड से गायब हो गए और सुनवाई के दौरान वादी यदुवंश राम त्रिपाठी की भी मौत हो गई. साकेत कॉलेज के तत्कालीन डीन महेंद्र कुमार अग्रवाल और अन्य गवाहों ने तिवारी के खिलाफ गवाही दी थी.

अमर उजाला के मुताबिक, अदालत ने इंद्र प्रताप तिवारी उर्फ खब्बू समेत तीन लोगों को पांच-पांच साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है.

प्रोफेसर यदुवंश राम त्रिपाठी ने 18 फरवरी, 1992 को इंद्र प्रताप तिवारी उर्फ खब्बू, फूलचंद यादव और कृपा निधान तिवारी के खिलाफ फर्जी मार्कशीट के आधार पर अगली कक्षा में प्रवेश लेने की एफआईआर दर्ज करवाई थी.

सभी लोगों के खिलाफ धारा 419, 420 समेत आईपीसी की अन्य धाराओं में आरोप-पत्र अदालत में प्रस्तुत किया गया था. निचली अदालत ने साल 2018 में मामले को विचारण के लिए सेशन को सौंप दिया था.

एफआईआर में आरोप लगाया था कि इंद्र प्रताप तिवारी ने 1990 में बीएससी प्रथम वर्ष की मार्कशीट में फर्जीवाड़ा करके बीएससी द्वितीय वर्ष में प्रवेश लिया. फूलचंद यादव (पूर्व अध्यक्ष साकेत महाविद्यालय) ने 1986 में बीएससी प्रथम वर्ष की मार्कशीट में फर्जीवाड़ा करके बीएससी द्वितीय वर्ष में प्रवेश लिया. वहीं कृपा निधान तिवारी (संरक्षक चाणक्य परिषद) ने 1989 में बीए तृतीय वर्ष की मार्कशीट में फर्जीवाड़ा करके एलएलबी में प्रवेश लिया था.

रिपोर्ट के मुताबिक, इंद्र प्रताप तिवारी की बाहुबली विधायक एवं ब्राह्मण नेता के रूप में प्रदेश भर में पहचान है. इंद्र प्रताप तिवारी सपा व बसपा से भी विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं.

विधायक के अधिवक्ता पवन तिवारी ने कहा कि वे इस फैसले को अब उच्च न्यायालय में चुनौती देंगे.

उन्होंने बताया कि 1992 में छात्र संघ साकेत महाविद्यालय के तत्कालीन प्रधानाचार्य के द्वारा नकल अध्यादेश के तहत मुकदमा दर्ज कराया गया था, जिसको लेकर करीब 30 साल बाद सुनवाई के दौरान सजा सुनाई गई है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)