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निहंग समूहों ने कृषि मंत्री से ‘गोपनीय’ मुलाक़ात करने वाले अमन सिंह का बहिष्कार किया

निहंगों ने मांग की है कि पुलिस इस मामले की जांच कर पता लगाए कि वे भाजपा नेताओं के साथ क्या कर रहे थे. हाल ही में एक निहंग धड़े के प्रमुख बाबा अमन सिंह की केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर के साथ तस्वीर वायरल हुई थी, जिसके बाद से किसान आंदोलन को ख़त्म करने की साज़िश के कयास लगाए जा रहे हैं.

केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर के साथ निहंग नेता बाबा अमन सिंह. (फोटो: सोशल मीडिया)

नई दिल्ली: निहंग समूहों ने अपने एक धड़े के प्रमुख बाबा अमन सिंह का बहिष्कार करना शुरू कर दिया है, जिनकी हाल ही में केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर के साथ एक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी.

इस फोटो में सिंह, मंत्री के अलावा पंजाब के विवादास्पद पूर्व पुलिस अधिकारी गुरमीत सिंह पिंकी, जिन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था और हत्या के एक मामले में दोषी ठहराया गया था तथा भाजपा नेता हरविंदर गरेवाल के साथ भी खड़े दिखाई देते हैं.

बाबा अमन सिंह निरवैर खालसा-उड़ना दल के मुखिया हैं, जिसके सदस्यों को 15 अक्टूबर को सिंघू बॉर्डर पर दलित खेतिहर मजदूर लखबीर सिंह की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया गया है. सिंह ने घटना के बाद अपने बयान में इस हत्या को जायज भी ठहराया था.

इसे लेकर निहंग समूह तरना दल के प्रमुख राजा राज सिंह ने कहा, ‘हम घोषणा करना चाहते हैं कि आज से हमारा अमन सिंह से कोई लेना-देना नहीं है. उन्होंने जो कुछ भी (भाजपा नेताओं के साथ बैठक) किया, पुलिस को उनसे पूछताछ करनी चाहिए. पुलिस को उन्हें लाठियों से पीटना चाहिए और पूछना चाहिए कि वह भाजपा नेताओं के साथ क्या कर रहे थे.’

उन्होंने आगे कहा, ‘न तो उन्होंने (अमन सिंह) शिरोमणि पंथ अकाली दल के प्रमुख निहंग बाबा मान सिंह को सूचित किया और न ही हममें से किसी को इस बारे (तोमर और भाजपा नेताओं के साथ उनकी मुलाकात के बारे में) में बताया था. हालांकि, हम लखबीर सिंह की हत्या करने वाले निहंगों का समर्थन करते हैं, क्योंकि उन्होंने सिख धर्मग्रंथों का अपमान किया था और उन्हें (आरोपियों) कानूनी सहायता प्रदान करेंगे.’

उन्होंने यह भी कहा कि अमन सिंह जो कुछ भी कह रहे थे, वह सब झूठ था.

राजा राज सिंह ने कहा, ‘इसकी एक जांच होनी चाहिए. हम इस मामले में पुलिस के साथ हैं. हम आपको यह साबित करने की चुनौती देते हैं कि हम (छह निहंग समूह) कभी किसी मंत्री से मिले हैं. हम यह भी स्पष्ट करना चाहते हैं कि हम सभी साफ दिल के लोग हैं. और अगर लोग हमें भाजपा के साथ साजिश रचने या सिंघू बॉर्डर पर बेअदबी के मामले में शामिल होने का दोषी पाते हैं, तो वे हमें टुकड़े-टुकड़े कर कुत्तों के हवाले कर सकते हैं.’

द वायर  ने बीते 19 अक्टूबर को रिपोर्ट कर बताया था कि यदि भाजपा नेताओं के साथ उनका ‘गठजोड़’ साबित हो जाता है तो निहंग समूह अमन सिंह का बहिष्कार करेंगे.

एक वायरल वीडियो, जिसमें मृतक लखबीर सिंह द्वारा 20 लोगों को 30,000 रुपये देने की बात करते सुना जा सकता है, पर उन्होंने कहा, ‘हमें कैसे पता चलेगा कि वे लोग कहां हैं? लेकिन मैं एक बात कहना चाहता हूं कि जहां भी गुरु ग्रंथ साहिब रखा जाता है, वहां हम सभी को सतर्क रहना चाहिए. बेअदबी के जरिये किसानों के विरोध को पटरी से उतारने और लोगों को भड़काने की यह बड़ी साजिश है. लखीमपुर खीरी कांड से जनता का ध्यान हटाने के लिए सरकार ऐसा कर रही है.’

शिरोमणि पंथ अकाली बुड्ढा दल के प्रमुख निहंग बाबा मान सिंह ने अपने समूह के सदस्यों के साथ घोषणा की, ‘हमने एक बैठक की, जहां यह निर्णय लिया गया कि हम बाबा अमन सिंह से खुद को अलग कर रहे हैं. हम सिख निकायों, किसान संघों, अधिकारियों और सरकार को सूचित करना चाहते हैं कि बुधा दल अमन सिंह से जुड़ा नहीं है. कृपया उनके साथ हमारे समूह के नाम का प्रयोग न करें.’

गौरतलब है कि बीते गुरुवार को सिंघू बॉर्डर पर निहंगों द्वारा एक रेहड़ी वाले की पिटाई की एक अन्य घटना सामने आई. यह आरोपी भी बाबा अमन सिंह के निहंग गुट का सदस्य है.

हरियाणा के करनाल जिले के गगसीना गांव के निवासी नवीन संधू ने कथित तौर पर एक अंडा विक्रेता का पैर तोड़ दिया, क्योंकि उसने कहा था कि उसके पास अंडे उपलब्ध नहीं हैं और वह उनके शिविर के पास धूम्रपान कर रहा था.

इसके बाद साथी निहंगों ने संधू को कुंडली पुलिस के हवाले कर दिया. इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसने एक बार फिर अमन सिंह के समूह के सदस्यों द्वारा हिंसा पर सवाल उठाए हैं.

हालांकि इस घटना के तुरंत बाद भारतीय किसान यूनियन (भाकियू), करनाल के अध्यक्ष जगदीप औलख ने एक वीडियो संदेश साझा करते हुए कहा कि संधू इस साल यानी 13 अप्रैल को बैसाखी पर निहंग बने थे.

उन्होंने कहा, ‘लोगों को तुरंत निष्कर्ष पर पहुंचने से बचना चाहिए. जैसा कि उसने हाल ही में जॉइन किया है, उसके बाल छोटे हैं और सिख धार्मिक सिद्धांतों के अनुसार लंबे नहीं हैं और वह पंजाबी नहीं बोल सकता, क्योंकि वह हरियाणा से है. लेकिन वह शुरू से ही किसानों के विरोध में सक्रिय रूप से शामिल रहे हैं. हम इस मामले में कुंडलीथाने के एसएचओ के संपर्क में हैं.’

अमन सिंह को परिवार ने कर दिया था बेदखल

ऐसी जानकारी मिली है कि अमन सिंह को उनके माता-पिता ने बेदखल कर दिया था और 17 अप्रैल, 2018 को एक पंजाबी अखबार में इस संबंध में विज्ञापन छपवाया था. अमन सिंह संगरूर जिले के धुरी उपमंडल के बब्बनपुर गांव के रहने वाला हैं.

जब पंजाब के उपमुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा ने सिंघू सीमा हत्याकांड की जांच के लिए 20 अक्टूबर को एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया, तो यह पता चला कि अमन सिंह के माता-पिता गांव में दयनीय स्थिति में रह रहे हैं.

अमन सिंह के पिता ज्ञान सिंह (60) जहां कैंसर के मरीज हैं, वहीं उनकी मां करमजीत कौर भी बीमार रहती हैं. अमन के माता-पिता गांव में किसी और के घर में रह रहे थे और यहां तक ​​कि उनका इलाज भी ग्रामीणों द्वारा एकत्र किए गए पैसे पर निर्भर है.

उनके बुजुर्ग माता-पिता ने कहा कि उनका अमन सिंह से कोई लेना-देना नहीं है और उन्होंने गुहार लगाई कि पंजाब पुलिस उन्हें परेशान न करे. उन्होंने यह भी कहा कि सिंघू सीमा पर हत्या दुर्भाग्यपूर्ण है और इसकी जांच होनी चाहिए.

अमन सिंह बरनाला जिले के महल कलां पुलिस स्टेशन में दर्ज एनडीपीएस अधिनियम, 2018 के एक मामले में वांछित थे, जिसमें उन्हें पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय से जमानत मिली थी.

मालूम हो कि पंजाब के तरन तारन जिले के मजदूर लखबीर सिंह का शव बीते 15 अक्टूबर को दिल्ली-हरियाणा के सिंघू बॉर्डर पर एक बैरिकेड से बंधा हुआ पाया गया था, जहां नए कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसान डेरा डाले हुए हैं. सिंह का एक हाथ कटा हुआ मिला और शरीर पर धारदार हथियारों के कई घाव मिले थे.

कुंडली थाने में बीते 15 अक्टूबर को दर्ज हत्या के मामले में पुलिस ने अब तक चार निहंग सिखों– सरबजीत सिंह, नारायण सिंह, भगवंत सिंह और गोविंद प्रीत सिंह को गिरफ्तार किया है.

पुलिस ने कहा कि आरोपियों ने गुरु ग्रंथ साहिब को अपवित्र करने के लिए लखबीर को ‘सजा’ के रूप में मारने की बात कबूल की है.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.)