भारत

जय श्रीराम का नारा लगाते पुलिसकर्मी का पुराना वीडियो त्रिपुरा हिंसा का बताकर शेयर किया जा रहा

फैक्ट चेक: बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमले की घटनाओं के बाद से त्रिपुरा में बीते कुछ दिनों से मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाकर हिंसा के मामले सामने आ रहे हैं. इस बीच भगवा झंडा लिए लोगों के समूह में शामिल जय श्री राम का नारा लगा रहे एक पुलिसकर्मी के वीडियो को सोशल मीडिया पर साझाकर यह अफ़वाह उड़ाई जा रही है कि त्रिपुरा पुलिस मुस्लिमों को निशाना बनाने के लिए हिंदुओं की भीड़ की मदद कर रही है. हालांकि यह वीडियो चार साल पहले बिहार में निकले एक जुलूस का है.

(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

पटना: इन दिनों सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें भगवा झंडे लिए लोगों के एक समूह के साथ एक पुलिसकर्मी ‘जय श्रीराम’ का नारा लगाते नजर आ रहा है. यह वीडियो त्रिपुरा का बताया जा रहा है.

बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमले के बाद से त्रिपुरा में बीते कुछ दिनों से मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाकर हिंसा की जा रही है. त्रिपुरा में मुस्लिमों की दुकानें और उनकी संपत्तियों में तोड़फोड़ की जा रही है और उन्हें आग के हवाले किया जा रहा है.

इस वायरल वीडियो को यह कहते हुए शेयर किया जा रहा है कि त्रिपुरा पुलिस मुस्लिमों को निशाना बनाने के लिए हिंदुओं की भीड़ की मदद कर रही है.

इस वीडियो को कई ट्विटर यूजर्स ने भी शेयर किया है.

पुराना वीडियो, त्रिपुरा हिंसा से कोई लेना-देना नहीं

फेसबुक पर एक कीवर्ड सर्च करने पर 30 मार्च 2018 की पटना लाइव की एक वीडियो रिपोर्ट सामने आती है. इस वीडियो के कैप्शन में कहा गया है कि पुलिस ने समस्तीपुर के रोसेरा में रामनवमी के जुलूस में हिस्सा लिया.

वीडियो पर पटना लाइव की रिपोर्ट के मुताबिक, जुलूस में भाग लेने के लिए पुलिस की आलोचना की गई, क्योंकि दोनों समूहों के बीच झड़प के बाद रोसेरा में धारा 144 लागू की गई थी. इस वीडियो को नवरात्रि के दौरान 27 मार्च 2018 को शूट किया गया था.

यह स्टोरी करने वाले कुलदीप भारद्वाज ने अपने फेसबुक प्रोफाइल पर भी यह वीडियो शेयर किया है. ऑल्ट न्यूज ने उनसे संपर्क किया है. अगर वह जवाब देते हैं तो इस रिपोर्ट को अपडेट किया जाएगा.

उल्लेखनीय है कि 2018 में बिहार और पश्चिम बंगाल के कई हिस्सों में रामनवमी समारोह के दौरान हिंसक झड़प हुई थी. रोसेरा में हुई हिंसा में कथित भूमिका के लिए समस्तीपुर से भाजपा के दो नेताओं को गिरफ्तार किया गया था.

उस समय इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, सोमवार रात को हुई सांप्रदायिक झड़प के तीन दिन बाद समस्तीपुर के रोसेरा में सांप्रदायिक तनाव बढ़ गया. रोसेरा में झड़प के दौरान पुलिसकर्मियों सहित 60 से अधिक लोग घायल हो गए और दर्जनभर दुकानें और वाहनों को आग लगा दी गई. इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गईं और स्थिति पर नजर रखने के लिए पुलिस को तैनात किया गया है.

रोसेरा में एक मस्जिद में तोड़फोड़ और कुछ लोगों द्वारा मस्जिद की मीनार पर भगवा झंडा फहराने का प्रयास करने के बाद दो समुदायों के बीच झड़प हुई.

यह घटना रामनवमी जुलूस के दौरान कथित तौर पर एक चप्पल फेंकने के एक दिन बाद हुई. हिंसा सबसे पहले 17 मार्च को भागलपुर में भड़की, जब भाजपा, आरएसएस और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे के बेटे अरिजीत शाश्वत की अगुवाई में ‘विक्रम संवत’ (हिंदू नव वर्ष)  के मौके पर अनाधिकृत रूप से जुलूस निकाला था.

यह जुलूस दर्जनभर मुस्लिम बहुल इलाकों से होकर निकला था. जोरदार संगीत और भड़काऊ नारेबाजी ने कथित तौर पर हिंसा को भड़काया था.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें. यह मूल रूप से ऑल्ट न्यूज पर प्रकाशित हुई)