कोविड-19

दो वर्ष से भी कम समय में कोविड-19 के कारण विश्व में जान गंवाने वालों का आंकड़ा 50 लाख के पार

भारत में मंगलवार को पिछले 259 दिनों में कोविड-19 के सबसे कम 10,423 नए मामले सामने आने के बाद संक्रमण के कुल मामलों की संख्या बढ़कर 3,42,96,237 हो गई है. बीते 24 घंटे के दौरान 443 और मरीज़ों की मौत होने से मृतक संख्या 4,58,880 पर पहुंच गई है. दुनिया में संक्रमण के 24.71 करोड़ से अधिक मामले दर्ज किए गए हैं.

एक टेबल ग्लोब पर लगाया गया मास्क. (फोटो: रॉयटर्स)

वॉशिंगटन/नई दिल्ली: कोरोना वायरस के कारण जान गंवाने वाले लोगों की संख्या सोमवार (एक नवंबर) को 50 लाख के पार चली गई.

कोविड-19 महामारी ने दो वर्ष से भी कम समय में इतनी बड़ी संख्या में लोगों की जान ली है और संक्रामक रोग ने न सिर्फ गरीब देशों को प्रभावित नहीं किया है, बल्कि समृद्ध राष्ट्रों में भी तबाही मचाई है, जहां स्वास्थ्य देखभाल की उत्तम व्यवस्था है.

अमेरिका, यूरोपीय संघ, ब्रिटेन और ब्राजील उच्च मध्यवर्गीय उच्च आय वाले देश हैं और इनमें विश्व की जनसंख्या का आठवां हिस्सा रहता है, लेकिन कोविड से हुई मौतों में से आधी इन्हीं देशों में हुई हैं. अमेरिका में सबसे ज्यादा 7,40,000 से अधिक जाने गई हैं.

मृतक संख्या का संकलन जॉन हॉपकिंस विश्वविद्यालय ने किया है. अमेरिका के इस विश्वविद्यालय की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, पूरी दुनिया में कोरोना वायरस संक्रमण के कुल मामले बढ़कर 24,71,29,785 हो गए हैं और अब तक 50,05,638 लोगों की जान जा चुकी है.

‘पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट ओसलो’ के मुताबिक, 1950 से लेकर अब तक हुए युद्ध में करीब इतने ही लोगों की मौत हुई है, जितने इस महामारी से मरे हैं. कोविड-19 विश्व भर में हृदयाघात और मस्तिष्काघात के बाद मौत की तीसरी प्रमुख वजह है.

मृतकों का यह आंकड़ा निश्चित रूप से कम गिना गया है, क्योंकि सीमित संख्या में लोगों की जांच हुई है और लोगों की बिना उपचार के घर पर ही मौत हुई है, खासकर, भारत जैसे दुनिया के अल्प विकसित हिस्सों में.

वायरस अब रूस, यूक्रेन और पूर्वी यूरोप के अन्य हिस्सों में फैल रहा है, जहां अफवाह और सरकार में विश्वास की कमी की वजह से टीकाकरण प्रभावित हुआ है. यूक्रेन में सिर्फ 17 प्रतिशत वयस्क जनसंख्या का पूर्ण टीकाकरण हुआ है, जबकि अर्मेनिया में यह संख्या सात प्रतिशत है.

कोलंबिया विश्वविद्यालय में वैश्विक स्वास्थ्य केंद्र आईसीएपी की निदेशक डॉ. वफा अल सद्र ने कहा कि इस महामारी ने उच्च आय वाले देशों को बुरी तरह से प्रभावित किया है.

उन्होंने कहा कि समृद्ध देशों में लंबी जीवन प्रत्याशा होती है, जिस वजह से आबादी में वृद्धों, कैंसर पीड़ितों की संख्या अधिक होती है और इन्हें कोविड-19 होने का अधिक खतरा है.

अल सद्र ने कहा कि गरीब देशों की आबादी में बच्चों, किशोरों और युवाओं का हिस्सा अधिक होता है और उनके कोरोना वायरस से गंभीर रूप से बीमार पड़ने की संभावना कम रहती है.

बहरहाल, मई की शुरुआत में भारत में कोरोना वायरस के मामले चरम पर थे, लेकिन देश में अब मृतक संख्या कम रिपोर्ट हो रही है. यह दर रूस, अमेरिका और ब्रिटेन से कम भी है, लेकिन उसके आंकड़ों पर अनिश्चितता है.

समृद्ध देशों में संक्रमण और मौत के मामलों को देखा गया तो यह गरीब इलाकों से अधिक थे. समृद्धि ने वैश्विक टीकाकरण अभियान में भी अहम भूमिका निभाई है और अमीर देशों पर आरोप लगा है कि उन्होंने टीके की आपूर्ति बाधित की है.

अमेरिका और अन्य देश टीके की वर्धक खुराकें अपनी आबादी को दे रहे हैं, जबकि अफ्रीका में लाखों लोगों को टीके की पहली खुराक तक नसीब नहीं हुई है. हालांकि समृद्ध देशों ने दुनियाभर में टीके भेजे हैं.

अफ्रीका की 1.3 अरब की आबादी में से सिर्फ पांच प्रतिशत का पूर्ण टीकाकरण हुआ है.

बीते 24 घंटे के दौरान भारत में 10,423 नए मामले सामने आए और 443 मरीजों की मौत

भारत में मंगलवार को पिछले 259 दिनों में कोविड-19 के सबसे कम 10,423 नए मामले सामने आए, जबकि उपचाराधीन मरीजों यानी सक्रिय मामलों की संख्या घटकर 1,53,776 रह गई है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों से यह जानकारी सामने आई है.

वहीं, पिछले 24 घंटों में सामने आए नए मामलों के बाद संक्रमण के कुल मामलों की बढ़कर 3,42,96,237 हो गई है. सुबह आठ बजे तक के अद्यतन आंकड़ों के मुताबिक, बीते 24 घंटे के दौरान 443 और मरीजों की मौत होने से मृतक संख्या 4,58,880 पर पहुंच गई है.

कोरोना वायरस संक्रमण के नये मामलों में दैनिक वृद्धि पिछले 25 दिनों से 20,000 से कम है और रोजाना के नए मामले अब लगातार 128 दिनों से 50,000 के आंकड़े से नीचे रह रहे हैं.

मंत्रालय ने बताया कि इलाज करा रहे मरीजों की संख्या संक्रमण के कुल मामलों की 0.45 प्रतिशत है, जो मार्च 2020 के बाद से सबसे कम है, जबकि कोविड-19 से स्वस्थ होने की दर 98.21 प्रतिशत है, जो पिछले साल मार्च से सबसे अधिक है.

पिछले 24 घंटों में कोविड-19 के उपचाराधीन मामलों में से कुल 5,041 मामले घटे हैं. मंत्रालय के मुताबिक, दैनिक संक्रमण दर 1.03 प्रतिशत दर्ज की गई. पिछले 29 दिनों से यह दो प्रतिशत से कम है. साप्ताहिक संक्रमण दर भी 1.16 प्रतिशत दर्ज की गई जो पिछले 39 दिनों से दो प्रतिशत से नीचे है.

बीमारी से स्वस्थ होने वाले लोगों की संख्या बढ़कर 3,68,83,581 हो गई है, जबकि मृत्यु दर 1.34 प्रतिशत है. देश में कोविड-19 राष्ट्रव्यापी टीकाकरण अभियान के तहत अब तक टीके की कुल 106.85 करोड़ खुराकें दी जा चुकी हैं.

बीते 24 घंटे के दौरान मौत के 443 नए मामलों में से 368 केरल से, 20 तमिलनाडु से और 10 महाराष्ट्र से हैं. केरल पिछले कुछ दिनों से कोविड से होने वाली मौतों के आंकड़े का मिलान करने का प्रयास कर रहा है.

सोमवार को राज्य सरकार की ओर से जारी एक विज्ञप्ति में कहा गया कि केरल में हुई 368 मौतों में से, 78 पिछले कुछ दिनों में हुईं, 232 ऐसे मामले हैं, जिनकी मौत की पुष्टि पर्याप्त दस्तावेजीकरण न होने के कारण पिछले साल 18 जून तक नहीं हो पाई थी और 58 मौतों को केंद्र एवं उच्चतम न्यायालय के नये दिशा-निर्देशों के आधार पर प्राप्त अपीलों के बाद कोविड मौतों के तौर पर निर्दिष्ट किया गया.

देश में कोविड महामारी से अब तक कुल 4,58,880 मौतें हुई हैं, जिनमें महाराष्ट्र से 1,40,226, कर्नाटक से 38,084, तमिलनाडु से 36,136, केरल से 32,049, दिल्ली से 25,091, उत्तर प्रदेश से 22,900 लोगों की जान गई जबकि पश्चिम बंगाल में 19,149 मरीजों की मौत हुई है.

स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि अब तक जिन लोगों की संक्रमण से मौत हुई है, उनमें से 70 प्रतिशत से ज्यादा मरीजों को अन्य बीमारियां भी थीं.

आंकड़ों के मुताबिक, देश में 110 दिन में कोविड-19 के मामले एक लाख हुए थे और 59 दिनों में वह 10 लाख के पार चले गए थे.

भारत में कोविड-19 संक्रमण के कुल मामलों की संख्या 10 लाख से 20 लाख (7 अगस्त 2020 को) तक पहुंचने में 21 दिनों का समय लगा था, जबकि 20 से 30 लाख (23 अगस्त 2020) की संख्या होने में 16 और दिन लगे. हालांकि 30 लाख से 40 लाख (5 सितंबर 2020) तक पहुंचने में मात्र 13 दिनों का समय लगा है.

वहीं, 40 लाख के बाद 50 लाख (16 सितंबर 2020) की संख्या को पार करने में केवल 11 दिन लगे. मामलों की संख्या 50 लाख से 60 लाख (28 सितंबर 2020 को) होने में 12 दिन लगे थे. इसे 60 से 70 लाख (11 अक्टूबर 2020) होने में 13 दिन लगे. 70 से 80 लाख (29 अक्टूबर को 2020) होने में 19 दिन लगे और 80 से 90 लाख (20 नवंबर 2020 को) होने में 13 दिन लगे. 90 लाख से एक करोड़ (19 दिसंबर 2020 को) होने में 29 दिन लगे थे.

इसके 107 दिन बाद यानी पांच अप्रैल को मामले सवा करोड़ से अधिक हो गए, लेकिन संक्रमण के मामले डेढ़ करोड़ से अधिक होने में महज 15 दिन (19 अप्रैल को) का वक्त लगा और फिर सिर्फ 15 दिनों बाद चार मई को गंभीर स्थिति में पहुंचते हुए आंकड़ा 1.5 करोड़ से दो करोड़ के पार चला गया. चार मई के बाद करीब 50 दिनों में 23 जून को संक्रमण के मामले तीन करोड़ से पार चले गए थे.

मई रहा अब तक का सबसे घातक महीना

भारत में अकेले मई में कोविड-19 की दूसरी लहर के दौरान कोरोना वायरस के 92,87,158 से अधिक मामले सामने आए थे, जो एक महीने में दर्ज किए गए संक्रमण के सर्वाधिक मामले हैं. इस तरह यह महीना इस महामारी के दौरान सबसे खराब और घातक महीना रहा था.

मई में इस बीमारी के चलते 1,20,833 लोगों की जान भी गई थी.

सात मई को 24 घंटे में अब तक कोविड-19 के सर्वाधिक 4,14,188 मामले सामने आए थे और 19 मई को सबसे अधिक 4,529 मरीजों ने अपनी जान गंवाई थी.

रोजाना नए मामले 17 मई से 24 मई तक तीन लाख से नीचे रहे और फिर 25 मई से 31 मई तक दो लाख से नीचे रहे थे. देश में 10 मई को सर्वाधिक 3,745,237 मरीज उपचाररत थे.

वायरस के मामले और मौतें

बीते एक नवंबर को एक दिन या 24 घंटे के दौरान संक्रमण के 12,514 नए मामले आए और 251 लोगों की मौत हुई थी.

अक्टूबर महीने में बीते एक दिन या 24 घंटे के दौरान संक्रमण के सर्वाधिक 26,727 नए मामले एक अक्टूबर को और केरल में आंकड़ों के पुन:मिलान के बाद सर्वाधिक 805 लोगों की मौत 29 अक्टूबर को हुई थी.

सितंबर महीने में बीते एक दिन या 24 घंटे के दौरान संक्रमण के सर्वाधिक 47,092 मामले दो सितंबर को सामने आए, जबकि दो सितंबर को ही सर्वाधिक 509 लोगों की जान गई थी.

अगस्त महीने में बीते 24 घंटे के दौरान संक्रमण के सर्वाधिक 46,759 मामले 28 अगस्त को दर्ज किए गए और इस अवधि में सर्वाधिक 648 लोगों की मौत 25 अगस्त को दर्ज की गई थी.

जुलाई महीने में बीते 24 घंटे के दौरान संक्रमण के सर्वाधिक 48,786 मामले एक जुलाई को सामने आए और एक दिन में मौत के सर्वाधिक 3,998 मामले (महाराष्ट्र द्वारा आंकड़ों में संशोधन किए जाने के बाद) 21 जुलाई को दर्ज किए गए थे.

जून महीने में बीते 24 घंटे के दौरान संक्रमण के सर्वाधिक मामले तीन जून को 1,34,154 आए थे और इस अवधि में मौत के सर्वाधिक 6,148 मामले (बिहार द्वारा आंकड़ों में संशोधन किए जाने के बाद) 10 जून को सामने आए थे.

अप्रैल महीने में बीते 24 घंटे के दौरान सर्वाधिक 3,86,452 नए मामले 30 तरीख को दर्ज किए गए थे, जबकि सबसे अधिक 3,645 लोगों की मौत 29 तारीख को हुई थी.

मार्च में 24 घंटे के दौरान सर्वाधिक 68,020 मामले 29 मार्च को सामने आए थे और महामारी से जान गंवाने वाले लोगों की सर्वाधिक संख्या 31 मार्च को दर्ज की गई. इस दिन 354 लोगों की मौत हुई थी, जो साल 2021 की पहली तिमाही (जनवरी से मार्च) का सर्वाधिक आंकड़ा है.

फरवरी माह में 24 घंटे में संक्रमण के सर्वाधिक 16,738 मामले 25 फरवरी को सामने आए थे और इस महीने सर्वाधिक 138 लोगों की मौतें भी इसी तारीख में दर्ज है.

जनवरी में 24 घंटे के दौरान संक्रमण के सर्वाधिक 20,346 मामले बीते सात जनवरी को दर्ज किए गए थे. वहीं इस अवधि में सबसे अधिक 264 लोगों की मौत छह जनवरी को हुई थी.

पिछले साल छह सितंबर को संक्रमण के नए मामले पहली बार 90 हजार (90,632) के पार हो गए थे. 28 अगस्त को पहली बार 70 हजार (75,760) के पार, सात अगस्त को पहली बार 60 हजार (62,538) के पार, 30 जुलाई को पहली बार 50 हजार के पार हो गए थे.

इसी तरह पिछले साल 20 जुलाई को यह पहली बार 40 हजार के पार, 16 जुलाई को पहली बार 30 हजार के पार, 10 जुलाई को पहली बार 25 हजार (26,506) के पार, तीन जुलाई को पहली बार 20 हजार के पार, 21 जून को पहली बार 15 हजार के पार और 20 जून को संक्रमण के नए मामलों की संख्या पहली बार 14 हजार के पार हुई थी.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)