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उत्तराखंड: केदारनाथ में त्रिवेंद्र सिंह रावत का विरोध, बिना दर्शन किए वापस लौटना पड़ा

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के केदारनाथ पहुंचने पर हेलीपैड से मंदिर के रास्ते में तीर्थ-पुरोहितों ने उन्हें काले झंडे दिखाए और जमकर नारेबाज़ी करते हुए उन्हें वहां से वापस जाने को मजबूर कर दिया. रावत के कार्यकाल के दौरान चारधाम देवस्थानम बोर्ड की स्थापना के बाद से ही चार हिमालयी मंदिरों के पुरोहित इसका विरोध कर रहे हैं.

त्रिवेंद्र सिंह रावत. (फोटो साभार: फेसबुक)

देहरादूनः  उत्तराखंड के केदारनाथ मंदिर पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को सोमवार को यहां तीर्थ-पुरोहितों का विरोध करना पड़ा.

त्रिवेंद्र सिंह को तीर्थ पुरोहितों ने मंदिर तक भी नहीं पहुंचने दिया और उन्हें बाबा के दर्शन किए बिना ही उल्टे पांव लौटना पड़ा. वह पांच नवंबर को प्रस्तावित प्रधानमंत्री के दौरे की व्यवस्था देखने केदारनाथ पहुंचे थे.

पूर्व मुख्यमंत्री के केदारनाथ पहुंचने पर हेलीपैड से मंदिर के रास्ते में तीर्थ-पुरोहितों ने उन्हें काले झंडे दिखाए और उनके खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए उन्हें वहां से वापस जाने को मजबूर कर दिया.

इस दौरान पुरोहितों ने पूर्व मुख्यमंत्री के लिए ‘वापस जाओ, वापस जाओ’ की नारेबाजी की.

यह महसूस कर कि विरोध कर रहे तीर्थ पुरोहित मानने के मूड में नहीं है, रावत ने हाथ जोड़े और वहां से चले गए. इस दौरान ‘त्रिवेंद्र रावत मुर्दाबाद’ और ‘तीर्थ-पुरोहित एकता जिंदाबाद’ के नारे लगते रहे.

रावत के कार्यकाल के दौरान चारधाम देवस्थानम बोर्ड की स्थापना के बाद से ही चार हिमालयी मंदिरों के पुरोहित इसका विरोध कर रहे हैं. इन्हें लगता है कि बोर्ड मंदिरों पर उनके पारंपरिक अधिकारों का उल्लंघन है और पुरोहित इसे भंग करने की मांग करते रहे हैं.

पुरोहितों के दबाव में मौजूदा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को सभी पक्षों का मामले सुनने और समाधान ढूंढने के लिए मनोहर कांत ध्यानी की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया है.

समिति ने अपनी अंतरिम रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप दी है, लेकिन यह अभी तक सार्वजनिक नहीं हुई है.

बता दें कि चारधाम सहित प्रदेश के 51 मंदिरों के रखरखाव और प्रबंधन के लिए चारधाम देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड के गठन के प्रावधान वाला अधिनियम दो साल पहले त्रिवेंद्र सिंह के मुख्यमंत्रित्व काल में ही राज्य विधानसभा में पारित किया गया था.

चारों धामों- बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री के तीर्थ पुरोहितों का आरोप है कि बोर्ड का गठन उनके पारंपरिक अधिकारों का हनन है और इसे भंग करने की मांग को लेकर वे लंबे समय से आंदोलनरत हैं.

केदारानाथ के एक पुरोहित संतोष त्रिवेदी ने भाजपा सरकार को ‘धर्मविरोधी’ बताते हुए कहा, ‘चारों धामों में तीर्थ पुरोहितों का सब्र अब खत्म हो गया है. मुख्यमंत्री धामी ने 11 सितंबर की बैठक में उन्हें 30 अक्टूबर तक सब्र रखने को कहा था और इसलिए अब उग्र आंदोलन शुरू कर दिया गया है.’

उन्होंने कहा, ‘हमने अब देवस्थानम बोर्ड मामले पर आक्रामक आंदोलन शुरू करने का फैसला किया है. त्रिवेंद्र सिंह रावत को दर्शन के लिए मंदिर नहीं जाने देना इसका हिस्सा था.’

तीर्थ-पुरोहित ने मंदिर के दर्शन के लिए अलग से पहुंचे कैबिनेट मंत्री धन सिंह रावत और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मदन कौशिक सामने भी सरकार विरोधी नारेबाजी की.

केदारनाथ पुरोहितों द्वारा रावत के अपमान पर टिप्पणी करते हुए प्रदेश कांग्रेस के उपाध्यक्ष धीरेंद्र प्रताप ने कहा, ‘आप जो बोते हैं, वही काटते हैं.’

वहीं, ताजा घटनाक्रम पर चुटकी लेते हुए राज्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह ने कहा कि भाजपा नेताओं और मंत्रियों को काले झंडे दिखाकर तीर्थ-पुरोहितों ने अभी ट्रेलर दिखाया है और आगे पूरी पिक्चर बाकी है, जो चुनाव में दिखेगी.

उधर, उत्तरकाशी में भी देवस्थानम बोर्ड भंग करने की मांग को लेकर गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के व्यापारिक प्रतिष्ठान सोमवार को पूरी तरह बंद रहे थे, जबकि पुरोहितों ने विरोध में श्रद्धालुओं का पूजा-पाठ भी नहीं कराया था.

पुरोहितों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द ही इस पर निर्णय नहीं किया तो भाजपा को उग्र आंदोलन के साथ ही आगामी विधानसभा चुनाव में भी इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)