दुनिया

बेरोज़गारी के कारण ही सत्ता में आए मोदी और ट्रंप: राहुल गांधी

कांग्रेस उपाध्यक्ष ने कहा, लोगाें काे गले लगाना ही भारत की ताकत रही है, लेकिन देश सौहार्द्र बिगड़ने के ख़तरे का सामना कर रहा है.

Rahul Gandhi PTI

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी. (फोटो: पीटीआई)

प्रिंस्टन/अमेरिका: कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने बुधवार को कहा कि दुनिया में तेज़ी से बढ़ती बेरोज़गारी से परेशान लोग नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड ट्रंप जैसे नेताओं को चुन रहे हैं.

उन्होंने साथ ही स्वीकार किया कि उनकी पार्टी पर्याप्त संख्या में रोज़गार के अवसर पैदा नहीं कर सकी और यही 2014 में उनकी पार्टी की हार का कारण बना.

दो हफ्ते की अमेरिका यात्रा पर आए 47 वर्षीय गांधी ने प्रिंस्टन यूनिवर्सिटी में छात्रों के साथ बातचीत में कहा कि रोज़गार लोगों को सशक्त करने, अधिकार संपन्न करने और राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में उन्हें शामिल करने का एक समावेशी माध्यम है.

उन्होंने कहा, मैं सोचता हूं… मोदी कैसे उभरे और एक हद तक ट्रंप कैसे सत्ता में आए अमेरिका और भारत में रोज़गार का सवाल है. हमारी आबादी के एक बड़े हिस्से के पास कोई नौकरी नहीं है और उन्हें अपना कोई भविष्य दिखाई नहीं दे रहा है. इसलिए वह परेशान हैं. और उन्होंने इस तरह के नेताओं को समर्थन दिया है.

उन्होंने कहा कि दूसरी समस्या यह है कि कोई मान ही नहीं रहा कि बेरोज़गारी एक समस्या है.

राहुल ने कहा, मैं ट्रंप को नहीं जानता. मैं उस बारे में बात नहीं करूंगा. लेकिन, निश्चित तौर पर हमारे प्रधानमंत्री रोज़गार सृजन के लिए पर्याप्त क़दम नहीं उठा रहे हैं.

कांग्रेस उपाध्यक्ष ने अमेरिका में विशेषज्ञों, प्रमुख कारोबारियों और सांसदों के साथ अपनी बैठक में बेरोज़गारी का मामला बार-बार उठाया है.

उन्होंने बर्कले में यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया को संबोधित करते हुए कहा था, अभी हम पर्याप्त नौकरियां पैदा नहीं कर रहे हैं. हर दिन रोज़गार बाज़ार में 30,000 नए युवा शामिल हो रहे हैं और इसके बावजूद सरकार प्रतिदिन केवल 500 नौकरियां पैदा कर रही है. इसमें बड़ी संख्या में पहले से ही बेरोज़गार चल रहे युवा शामिल नहीं हैं.

राहुल गांधी ने यहां कहा कि भारत को चीन के साथ मुकाबला करने के लिए ख़ुद को रूपांतरित करने की आवश्यकता है और इसके लिए देश के लोगों को रोज़गार की ज़रूरत है.

उन्होंने कहा, जो लोग एक दिन में 30,000 नौकरियां पैदा नहीं कर पाने के कारण हमसे नाराज़ थे वही अब मोदी से भी नाराज़ होने वाले हैं. मुख्य प्रश्न इस समस्या को सुलझाना है. मेरा मोदी के साथ मुख्य मसला यह है कि वे इस मुद्दे से ध्यान भटका देते हैं.

राहुल ने कहा, भारत में इस समय लोगों में गुस्सा भर रहा है. हम इसे महसूस कर सकते हैं. इसलिए मेरे लिए चुनौती एक लोकतांत्रिक पर्यावरण में रोजगार सृजन की समस्या को सुलझाना है. यह चुनौती है.

उन्होंने कहा, इसलिए पहले हमें इसे एक समस्या के तौर पर स्वीकार करना होगा. इसके बाद हमें एकजुट होकर इससे निपटने की कोशिश करनी होगी. इस वक्त, कोई यह स्वीकार तक नहीं कर रहा कि यह एक समस्या है.

राहुल ने प्रिंसटन में अपने प्रश्नोत्तर सत्र का अधिकतर भाग रोज़गार पर केंद्रित किया. उन्होंने कहा कि नई तकनीक एवं आधुनिकीकरण से रोज़गार कम होने की संभावना नहीं है.

उन्होंने भारत में ध्रुवीकरण का मामला भी उठाया. राहुल गांधी ने कहा कि ध्रुवीकरण की राजनीति भारत में मुख्य चुनौती है और अल्पसंख्यक समुदायों और जनजातीय लोगों समेत समाज के कुछ वर्ग महसूस करते हैं कि वह सत्तारूढ़ भाजपा की दृष्टि में शामिल नहीं हैं.

उन्होंने कहा, 21वीं सदी में यदि आप कुछ लोगों को अपनी सोच से बाहर रख रहे हैं, तो आप संकट को बुलावा दे रहे हैं. नए विचार आएंगे, नई भिन्न सोच विकसित होंगी. इसलिए, मेरे लिए भारत में मुख्य चुनौती ध्रुवीकरण की राजनीति है जहां आप एक समुदाय को दूसरे समुदाय के ख़िलाफ़ खड़ा कर देते हैं और आप अन्य लोगों के आने के लिए जगह पैदा कर देते हैं.

राहुल गांधी ने एक प्रश्न के उत्तर में कहा, 10 करोड़ जनजातीय लोगों का एक इलाका है जो भाजपा की सोच के साथ सहज महसूस नहीं करता. भारत में कई राज्य हैं, जो नहीं चाहते कि उन पर एक ही सोच लागू की जाए. देश में अल्पसंख्यक समुदाय है, उन्हें नहीं लगता कि वे इस सोच का हिस्सा है. असल ख़तरा यही है.

उन्होंने कहा कि लोगाें काे गले लगाना ही भारत की ताकत रही है. राहुल ने कहा कि भारत सौहार्द्र बिगड़ने के ख़तरे का सामना कर रहा है.

कांग्रेस नेता ने कहा, भारत एक अस्थिर पड़ाेस में रह रहा है. और अगर हम अपने ही लाेगाें काे अलग-थलग कर देंगे ताे इससे लाेगाें काे गड़बड़ी करने का मौका मिल जाएगा. मैं उन लाेगाें का नाम नहीं लेना चाहता, लेकिन इससे उनकाे मौका मिल जाता है.

उन्हाेंने कहा, कराेड़ाें लाेगाें काे अपनी दृष्टि के दायरे से बाहर रखना अच्छी चीज नहीं है, क्याेंकि इससे दूसरे लाेग समस्याएं पैदा करना शुरू कर देंगे. समान नागरिक संहिता के एक प्रश्न पर उन्हाेंने कहा कि इस पर अदालत काे निर्णय लेना है. उन्हाेंने कहा, मुझे अपने देश की अदालताें पर पूरा भराेसा है.

उन्हाेंने कहा कि अगर उन्हें कांग्रेस पार्टी की बागडाेर सौंपी जाती है ताे अगले 10 वर्ष के लिए भारत के लिए एक नई दृष्टि का निर्माण करना उनके काम का बड़ा हिस्सा हाेगा. उन्हाेंने कहा कि दृष्टि में इस बात पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा कि राेज़गार की समस्या कैसे हल की जाए. उसमें कृषि, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाआें पर ध्यान दिया जाएगा.

अलग-अलग विकास पथों के बावजूद दुनिया को नया आकार देंगे भारत और चीन

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि एशिया के दो बड़े देशों- भारत और चीन ने भले ही विकास के अलग-अलग पथों का चयन किया हो लेकिन दोनों मूलभूत रूप से दुनिया को नया आकार देंगे.

प्रतिष्ठित प्रिंसटन विश्वविद्यालय में छात्रों को संबोधित करते समय राहुल ने कहा कि सहयोग और प्रतिस्पर्धा दुनिया के दो सबसे सघन आबादी वाले देशों के आपसी रिश्ते का हिस्सा हैं.

राहुल ने कहा, दो बड़े बदलाव हो रहे हैं. एक तो पूरी तरह स्वतंत्र है और दूसरा केंद्रीय तौर पर नियंत्रित है. अलग-अलग तंत्र अलग-अलग तरीके से प्रतिक्रिया देते है. भारत और चीन दो विशाल देश हैं और वे कृषि आधारित देशों से शहरी आधुनिक मॉडल देश बन रहे हैं. और वे वैश्विक जनसंख्या का एक बड़ा हिस्सा हैं.

उन्होंने कहा, इन दोनों देशों का प्रदर्शन मूल तौर पर दुनिया को नया आकार देने का काम करेगा. मैं यह नहीं कह सकता कि चीन को लोकतांत्रिक होना चाहिए या नहीं. उन्होंने अपना रास्ता चुना है और हमने अपना.

राहुल ने कहा कि चीन के साथ प्रतिस्पर्धा करने का जब मामला आता है तो भारत अच्छा प्रदर्शन नहीं कर रहा. उन्होंने कहा, हमें पता लगाना होगा कि रोज़गार कैसे मिलेगा. हमें मूल तौर पर चीन के साथ प्रतिस्पर्धा करनी है.

राहुल ने कहा, सच कहूं तो भारत अच्छा प्रदर्शन नहीं कर रहा. उन्होंने कहा कि चीन वन बेल्ट, वन रोड की पहल के साथ नए क्षेत्र में प्रवेश कर रहा है. इसके तहत बीजिंग की योजना एशिया और यूरोप को बंदरगाहों, सड़कों और रेल नेटवर्कों से जोड़ने की है.

राहुल ने कहा, चीन के पास दुनिया को लेकर एक विशेष नज़रिया है. यह बेहद स्पष्ट है और उनके परिप्रेक्ष्य से यह बेहद शक्तिशाली नज़रिया है. उन्होंने कहा, क्या भारत के पास इसी तरह का कोई नज़रिया है वह नज़रिया कैसा दिखता है हमारे और उनके बीच कितना सहयोग होने जा रहा है बुनियादी तौर पर ये ऐसे मूलभूत सवाल हैं, जो आगे आ रहे हैं. लेकिन यह समझाना होगा कि चीन अपार शक्ति के साथ आगे बढ़ रहा है और हमें उसके साथ काम करना होगा.

अमेरिका के साथ भारत के रिश्तों के बारे में राहुल ने कहा कि रोज़गार सृजन और शिक्षा क्षेत्र में दोनों देशों के बीच सहयोग के लिए बहुत सी संभावनाएं हैं. उन्होंने कहा, मुझे लगता है कि दोनों देशों के बीच बहुत सक्रियता है.

साथ ही, ऐतिहासिक तौर पर भी भारत ने संबंधों में संतुलन बनाकर रखा है. इसलिए भारत का चीन से संबंध रहा है, भारत का रूस के साथ संबंध रहा है. मेरे हिसाब से अमेरिका के साथ रणनीतिक संबंध अहम है.

राहुल ने अन्य देशों के साथ संबंधों में संतुलन की ज़रूरत को रेखांकित किया. राहुल ने एक सवाल के जवाब में कहा, बाकी सभी देशों के साथ संबंधों के मामले में भी संतुलन बेहद अहम है. इसलिए मैं कहूंगा कि हमारी और सरकार की सोच के बीच हल्का सा अंतर है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)