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क़ानूनी पेशा मुनाफ़े में बढ़ोतरी नहीं, बल्कि समाज की सेवा के लिए है: सीजेआई एनवी रमना

प्रधान न्यायाधीश एनवी रमना ने ‘क़ानूनी सेवा दिवस’ के मौक़े पर राष्ट्रीय क़ानूनी सेवा प्राधिकरण (नालसा) द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि क़ानून में शिक्षित छात्र समाज के कमजोर और वंचित वर्गों की आवाज़ बनने के लिए सशक्त हैं.

चीफ जस्टिस एनवी रमना. (फोटो साभार: यूट्यूब/सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन)

नई दिल्ली: प्रधान न्यायाधीश एनवी रमना ने मंगलवार को कहा कि कानूनी पेशा मुनाफे में बढ़ोतरी का नहीं, बल्कि समाज की सेवा के लिए है.

‘कानूनी सेवा दिवस’ के उपलक्ष्य में राष्ट्रीय कानूनी सेवा प्राधिकरण (नालसा) द्वारा आयोजित एक समारोह में प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि कानून में शिक्षित छात्र समाज के कमजोर और वंचित वर्गों की आवाज बनने के लिए सशक्त हैं.

जस्टिस रमना ने कहा, ‘कानूनी सहायता आंदोलन में शामिल होने का आपका निर्णय एक महान करिअर का मार्ग प्रशस्त करेगा. इससे आपको सहानुभूति, समझ और नि:स्वार्थ होने की भावना पैदा करने में मदद मिलेगी. याद रखें, अन्य व्यवसायों के विपरीत, कानूनी पेशा मुनाफे में वृद्धि का नहीं, बल्कि समाज की सेवा के लिए है.’

उन्होंने कहा कि वह कानूनी सेवा प्राधिकरणों की प्रगति के प्रति केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू की व्यक्तिगत रुचि को देखकर बहुत खुश हैं.

रिजिजू ने समारोह को संबोधित करते हुए न्यायाधीशों के खिलाफ सोशल मीडिया पर की जा रहीं आपत्तिजनक टिप्पणियों पर चिंता व्यक्त की थी.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, सीजेआई ने कहा, ‘मुझे उम्मीद है कि उनके नेतृत्व में कानूनी सेवाओं के अधिकारियों के विकास में मौजूदा बाधाओं को बुनियादी ढांचे के मुद्दों सहित त्वरित हस्तक्षेप के साथ ध्यान दिया जाएगा. मुझे खुशी है कि वह न्यायाधीशों द्वारा की गई कड़ी मेहनत को पूरी तरह से समझते हैं.’

उन्होंने विधि सेवा प्राधिकरणों द्वारा आयोजित मूट कोर्ट प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले युवा कानून के छात्रों को देखकर प्रसन्नता व्यक्त की.

प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘मैं ईमानदारी से महसूस करता हूं कि आप सभी को दोगुना विशेषाधिकार प्राप्त है. सबसे पहले, आपको देश के प्रमुख संस्थानों में शिक्षित होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है, जहां सूचना और ज्ञान आपकी उंगलियों पर उपलब्ध है. दूसरा, कानून में शिक्षित होने के कारण आप उन लोगों की आवाज बनने के लिए सशक्त हैं जिनके पास कोई नहीं है.’

उन्होंने कहा, ‘यह आपका कर्तव्य है कि आप अपने आसपास की सामाजिक वास्तविकताओं के बारे में सतर्क रहें और उसी के जवाब में अपनी भूमिका के प्रति सचेत रहें. मुझे कानून के छात्रों के लिए यह बेहद फायदेमंद लगता है कि कानूनी सेवा प्राधिकरणों के माध्यम से वे हमारे देश की जमीनी हकीकत से रूबरू हो रहे हैं.’

सीजेआई ने कहा, ‘मुझे जो अधिक फायदेमंद लगता है वह यह है कि ये छात्र कानूनी सहायता आंदोलन में प्रमुख खिलाड़ी बन रहे हैं. वे देश के हर कोने में कानूनी सेवाओं के विस्तार के लिए आवश्यक हैं.’

स्वामी विवेकानंद और मार्टिन लूथर किंग जूनियर का हवाला देते हुए, प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि वास्तविक कानूनी सहायता आंदोलन देश की स्वतंत्रता से बहुत पहले स्वतंत्रता संग्राम के दौरान शुरू हुआ था.

उन्होंने कहा कि कई कानूनी दिग्गज हमारे स्वतंत्रता सेनानियों को अपनी मुफ्त कानूनी सेवाएं देते थे और औपनिवेशिक शक्तियों की ताकत के खिलाफ लड़ते थे.

रमना ने कहा कि कानूनी सहायता आंदोलन का विकास हमारे संविधान में परिलक्षित होता है, जिसमें अभिव्यक्ति ‘न्याय: सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक’ प्रस्तावना में विशेष स्थान रखती है.

उन्होंने कहा, ‘यह न्याय की धारणा और उसके दायरे के बारे में संविधान सभा के सदस्यों की गंभीरता को दर्शाता है. पहले कानूनी सहायता का विचार कोर्ट रूम तक ही सीमित था. न्याय तक पहुंच की धारणा को पारंपरिक दृष्टिकोण से समझा जाता था.’

उन्होंने कहा, ‘लेकिन.. 26 वर्षों के दौरान कानूनी सेवाओं के अधिकारियों ने कानूनी सहायता की पारंपरिक धारणाओं को तोड़ा है और न्याय तक पहुंच को व्यापक अर्थ दिया है. आज कानूनी सेवा प्राधिकरणों की भूमिका केवल अदालत आधारित कानूनी प्रतिनिधित्व के प्रावधान तक ही सीमित नहीं है.’

प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि वैकल्पिक विवाद समाधान तंत्र के माध्यम से एक सौहार्दपूर्ण समाधान तक पहुंचने की निरंतर ऊपर की प्रवृत्ति अदालतों पर बोझ को आनुपातिक रूप से कम करेगी.

उन्होंने कानूनी सेवा एप्लिकेशन का आईओएस संस्करण भी लॉन्च किया और यह भी बताया कि नालसा के ऑनलाइन पोर्टल ने अपनी सेवाएं और अधिक भाषाओं में खोली हैं.

रमना ने कहा, ‘यह भाषा की बाधा को दूर करने, सुगमता की ओर अग्रसर करने में एक सराहनीय उपलब्धि है. एक और पहल, जिसकी मैं सराहना करना चाहता हूं, वह है कानूनी जागरूकता पर इस लघु फिल्म महोत्सव का शुभारंभ. मुझे बताया गया है कि इस प्रतियोगिता के माध्यम से अधिकारियों का लक्ष्य स्कूल जाने वाले युवा और ऊर्जावान छात्रों की क्षमता का दोहन करना है. मुझे विश्वास है कि यह पहल युवा पीढ़ी को समाज से जुड़ने का अवसर प्रदान करेगी. यह प्रतियोगिता इन छात्रों के लिए हमारे समाज के भीतर मौजूदा असमानताओं को पाटने के लिए एक खिड़की खोलेगी.’

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)