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टीवी शो में असम की प्रतिभागी के लिए ‘नस्ली’ टिप्पणी की मुख्यमंत्री ने की निंदा

एक वायरल वीडियो में कलर्स चैनल पर प्रसारित होने वाले ‘डांस दीवाने-3’ कार्यक्रम के मेज़बान राघव जुयाल को गुवाहाटी की एक प्रतिभागी बच्ची गुंजन सिन्हा का परिचय ‘चीनी’ भाषा के अस्पष्ट उच्चारण में देते हुए देखा जा सकता है, जिसमें वह ‘मोमो’ और ‘चाऊमीन’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं.

राघव जुयाल. (फोटो साभार: फेसबुक)

गुवाहाटी/मुंबई: टीवी पर प्रसारित होने वाले डांस आधारित एक रियलिटी शो के मेजबान की ओर से असम की एक प्रतिभागी को लेकर की गई कथित नस्ली टिप्पणी पर विवाद हो गया है. मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा ने बीते मंगलवार को इसे ‘शर्मनाक’ बताते हुए कहा कि देश में नस्लवाद के लिए कोई जगह नहीं है.

एक वायरल वीडियो में कलर्स चैनल पर प्रसारित होने वाले ‘डांस दीवाने-3’ कार्यक्रम के मेजबान राघव जुयाल को गुवाहाटी की एक प्रतिभागी बच्ची गुंजन सिन्हा का परिचय ‘चीनी’ भाषा के अस्पष्ट उच्चारण में देते हुए देखा जा सकता है, जिसमें वह ‘मोमो’ और ‘चाऊमीन’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं. ऐसा लगता है कि वह मन्दारिन भाषा का मजाक बना हैं, जिसे चीन के अधिकतर लोग बोलते हैं.

इस पर कार्यक्रम की ‘निर्णायक’ अभिनेत्री माधुरी दीक्षित और कोरियोग्राफर रेमो डिसूजा ने उनसे इस बारे में पूछा कि वह क्या बोल रहे हैं.

जुयाल ने 40 सेकंड के वीडियो में कहा, ‘लोग शायद उनकी चीनी भाषा को नहीं समझ पाएंगे, लेकिन वे उनके नृत्य को जरूर समझते हैं.’

इस साल की शुरुआत में प्रसारित हुए शो के तीसरे सीजन का समापन पिछले महीने हुआ था.

जुयाल ने बाद में स्पष्टीकरण जारी करते हुए उन सभी से माफी मांगी है जिनकी भावनाएं आहत हुई हैं.

विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा ने ट्वीट किया, ‘यह मेरे संज्ञान में लाया गया है कि एक लोकप्रिय रियलिटी शो के मेजबान ने गुवाहाटी की युवा प्रतिभागी के लिए नस्ली शब्दावली का इस्तेमाल किया है. यह शर्मनाक है और पूरी तरह से अस्वीकार्य है. हमारे देश में नस्लवाद के लिए कोई जगह नहीं है और हमें इसकी स्पष्ट रूप से निंदा करनी चाहिए.’

राजनीतिक दल द इंडिजिनस प्रोग्रेसिव रिजनल अलाएंस (टीआईपीआरए) के अध्यक्ष प्रद्योत विक्रम माणिक्य देववर्मा ने भी घटना की निंदा की और ट्वीट किया, ‘एक तीसरे दर्जे का कॉमेडियन-असंवेदनशील दर्शकों को हंसाता है! फिर ये लोग इसे सही ठहराते हैं और हमसे सवाल करते हैं कि पूर्वोत्तर के लोग इस तरह महसूस क्यों नहीं करते हैं कि हम मुख्यधारा का हिस्सा हैं?’

असम पुलिस के विशेष महानिदेशक एलआर बिश्नोई ने भी राज्य पुलिस के साइबर सेल से इस मामले का संज्ञान लेने का आग्रह किया है.

ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (आसू) के मुख्य सलाहकार समुज्जल कुमार भट्टाचार्य ने भी इस पर अपना गुस्सा व्यक्त किया है.

‘डांस दीवाने-3’ में माधुरी दीक्षित और कोरियोग्राफर तुषार कालिया और धर्मेश येलांडे निर्णायक थे. डिसूजा इस एपिसोड में एक विशेष अतिथि के रूप में आए थे.

चैनल की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन 30 वर्षीय जुयाल ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो साझा करके ‘गलतफहमी को दूर’ करने की कोशिश की है.

उन्होंने एक क्लिप भी साझा की है, जिसमें प्रतिभागी गुंजन सिन्हा, माधुरी दीक्षित को बता रही हैं कि उन्हें चीनी भाषा बोलना आती है और इसके बाद जुयाल अस्पष्ट उच्चारण में बात करके बच्ची से मजाक करते हैं.

मेजबान ने कहा कि वह अपने मानसिक स्वास्थ्य और उन्हें जानने वाले लोगों के लिए इंटरनेट पर प्रसारित छोटी क्लिप के पीछे की ‘कहानी’ साझा करना चाहते हैं.

उन्होंने वीडियो में कहा, ‘जब बच्चे कार्यक्रम में आते हैं तो हम उनसे पूछते हैं कि उनके शौक क्या हैं. गुंजन ने कहा, ‘मैं चीनी में बात कर सकती हूं, मेरे पास यह प्रतिभा है’. और हम बच्चों की बातों पर हंसते थे. जब हमने उन्हें चीनी भाषा बोलने के लिए कहा, तो वह अस्पष्ट उच्चारण में बात करने लगी. वहां से हम उन्हें हर एपिसोड में ‘चीनी’ में बोलने के लिए कहने लगे या किसी अन्य ग्रह की भाषा में बोलने के लिए कहने लगे!’

जुयाल के अनुसार, अंतिम एपिसोड में उन्होंने गुंजन सिन्हा की प्रस्तुति से पहले उसी चीनी भाषा के अस्पष्ट उच्चारण में उनका परिचय दिया.

उन्होंने कहा, ‘मेरा परिवार सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश में है. नगालैंड में मेरे दोस्त हैं, जिनके साथ मैं बोर्डिंग स्कूल में पला-बढ़ा हूं. मैं ऐसा व्यक्ति हूं, जो चीजों को राजनीतिक रूप से सही दिखाने की कोशिश करता है और जो अन्याय और नस्लवाद पर एक मत रखता है. जब भी मैं किसी धर्म, जाति, संस्कृति या पंथ के बारे में कोई मत रखता हूं तो मुझे अक्सर ट्रोल किया जाता है.’

मालूम हो कि साल 2014 में अरुणाचल प्रदेश के एक पूर्व विधायक के बीस वर्षीय बेटे निदो तानिया की दिल्ली में हत्या कर दी गई थी, जो कि देश में नस्लवाद की क्रूर वास्तविकता को दर्शाता है.

तानिया पर कुछ दुकानदारों ने उस समय हमला कर दिया था, जब उन्होंने ‘अपने बालों और जातीयता’ का मजाक उड़ाने वाले अपमानजनक शब्दों का विरोध किया था.

उनकी मौत के बाद व्यापक स्तर पर विरोध प्रदर्शन हुए और क्षेत्र के लोगों में गुस्से के चलते तत्कालीन मनमोहन सिंह सरकार को एमपी बेजबरुआ समिति का गठन करना पड़ा और निर्देश दिया गया कि वे पूर्वोत्तर के लोगों के खिलाफ हो रहे इस तरह के हमलों को रोकने का समाधान बताएं.

गृह मंत्रालय को सौंपी गई इस समिति की रिपोर्ट को तब से ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है और नरेंद्र मोदी सरकार इस मुद्दे को हल करने के लिए प्रस्तुत की गईं सिफारिशों और कानूनी उपायों को लागू करने में विफल रही है. रिपोर्ट ने नस्लवादी टिप्पणी के रूप में ‘चीनी’, ‘मोमो’, ‘चिंग चोंग’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल करने का उल्लेख किया गया है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)