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जम्मू कश्मीर: कांग्रेस के कई नेताओं का इस्तीफ़ा, स्थानीय नेतृत्व बदलने की मांग

कांग्रेस की जम्मू कश्मीर इकाई के सात प्रमुख नेताओं समेत क़रीब 20 नेताओं ने पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी को अपना त्यागपत्र भेजा. नेतृत्व बदलाव की मांग के साथ उन्होंने कहा कि सूबे में उन्हें पार्टी संबंधित मामलों पर अपनी बात रखने का मौक़ा नहीं दिया गया. इन नेताओं में चार पूर्व मंत्री और तीन पूर्व विधायक भी शामिल हैं.

(प्रती​कात्मक फोटो: रॉयटर्स)

जम्मू: कांग्रेस की जम्मू कश्मीर इकाई के सात प्रमुख नेताओं ने पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी को अपना त्यागपत्र भेजा और दावा किया है कि केंद्रशासित प्रदेश में उन्हें पार्टी से संबंधित मामलों को लेकर अपनी बात रखने का मौका नहीं दिया गया.

सूत्रों का कहना है कि इस्तीफा देने वाले नेताओं में से चार पूर्व मंत्री और तीन पूर्व विधायक हैं, जो पूर्व मुख्यमंत्री व कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद के करीबी हैं.

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, कम से कम 20 वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं ने अपने-अपने पार्टी पदों से इस्तीफा दे दिया है. इस्तीफा देने वाले सभी लोग केंद्र शासित प्रदेश में पार्टी नेतृत्व में बदलाव की मांग कर रहे हैं.

इनमें पूर्व मंत्री जीएम सरूरी, विकार रसूल और डॉ. मनोहर लाल शर्मा के अलावा जुगल किशोर शर्मा, गुलाम नबी मोंगा, नरेश गुप्ता, मोहम्मद अमीन भट, सुभाष गुप्ता (सभी पूर्व विधायक), प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष अनवर भट, कुलगाम जिला विकास परिषद और पूर्व जिलाध्यक्ष अन्यातुल्ला राथर और सदस्य शामिल हैं.

कांग्रेस के बडगाम जिलाध्यक्ष जाहिद हसन जान, सीएम के पूर्व राजनीतिक सलाहकार मंजूर अहमद गनई, एआईसीसी सदस्य इंजीनियर मरूफ, पार्टी के एसटी सेल के उपाध्यक्ष चौधरी सोहत अली, पार्षद गौरव चोपड़ा, जिला महासचिव अश्विनी शर्मा भी शामिल हैं.

इन नेताओं ने अपना इस्तीफा पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी, राहुल गांधी और जम्मू कश्मीर में पार्टी मामलों की प्रभारी रजनी पाटिल को भेजा है.

त्यागपत्र में इन नेताओं ने आरोप लगाया है कि उन्हें प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व के ‘शत्रुतापूर्ण रवैये’ के चलते यह कदम उठाना पड़ा. उन्होंने प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गुलाम अहमद मीर पर निशाना साधा है.

सूत्रों ने यह भी बताया कि पूर्व उप मुख्यमंत्री तारा चंद समेत आजाद के करीब कुछ अन्य नेताओं ने इस्तीफा देने वाले नेताओं से दूरी बना ली है.

इन नेताओं ने त्यागपत्र में कहा कि उन्होंने अपने मुद्दों की तरफ पार्टी आलाकमान का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया, लेकिन उन्हें समय नहीं दिया गया.

इन नेताओं का कहना है कि वे पिछले करीब एक साल से ज्ञापन के माध्यम से पार्टी नेतृत्व से मिलने का समय मांग रहे थे, लेकिन उन्हें समय नहीं दिया गया.

उन्होंने अगस्त 2021 में राहुल गांधी के जम्मू कश्मीर दौरे पर व्यक्तिगत रूप से पार्टी आलाकमान से मिलने का अनुरोध किया था, लेकिन कुछ नहीं हुआ.

मीर पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि मीर के अध्यक्ष रहते हुए पार्टी बहुत दयनीय स्थिति की तरफ बढ़ रही है और पार्टी के बहुत सारे नेता इस्तीफा देकर दूसरे दलों में शामिल हो गए, जबकि कुछ ने खामोश रहने का फैसला किया है.

उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि जम्मू कश्मीर प्रदेश कांग्रेस के कामकाज पर कुछ नेताओं ने कब्जा जमा रखा है.

यह रेखांकित करते हुए कि जल्दी ही विधानसभा चुनावों की घोषणा की जा सकती है, उन्होंने कहा कि पार्टी आलाकमान उनकी उचित समस्याएं सुनने को भी तैयार नहीं है.

सूत्रों ने बताया कि कांग्रेस आलाकमान ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि किसी भी चिंता का निदान पार्टी की व्यवस्था के तहत किया जाएगा और मीडिया के जरिये कुछ नहीं होगा.

कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि इन नेताओं के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई हो सकती है.

इंडियन एक्सप्रेस द्वारा संपर्क करने पर जीएन मोंगा और विकार रसूल ने पुष्टि की कि उन्होंने पार्टी अध्यक्ष को पत्र लिखकर केंद्र शासित प्रदेश में नेतृत्व बदलने की मांग की है.

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीए मीर का नाम लिए बिना विकार रसूल ने कहा, ‘हमें बताया गया था कि उन्हें तीन साल की अवधि के लिए नियुक्त किया जा रहा है, लेकिन अब सात साल हो गए हैं. हालांकि, हमने आलाकमान से कहा है कि अगर जम्मू कश्मीर में पार्टी नेतृत्व में कोई बदलाव नहीं हुआ तो हम पार्टी का कोई पद नहीं संभालेंगे.’

सोनिया गांधी को भेजे त्याग पत्र में इन नेताओं ने आरोप लगाया है कि मीर की अध्यक्षता में कांग्रेस एक विनाशकारी स्थिति की ओर बढ़ रही है और आज तक 200 से अधिक पूर्व मंत्रियों, विधायकों, एमएलसी, पीसीसी पदाधिकारियों, जिलाध्यक्षों और एआईसीसी सदस्यों सहित कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया है और अन्य दलों में शामिल हो गए हैं.

आगे आरोप लगाया है कि कुछ बेईमान चापलूसों ने पीसीसी के कामकाज पर कब्जा कर उसे हाईजैक कर लिया है. वरिष्ठ नेताओं और जिलों के मौजूदा विधायकों/एमएलसी के परामर्श के बिना पार्टी पदों का वितरण किया गया.

पत्र में आगे कहा गया है कि ‘पार्टी नेतृत्व द्वारा अपनाए गए इस शत्रुतापूर्ण रवैये के मद्देनजर हमें पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा देने के लिए मजबूर होना पड़ा है. ऐसे में सबसे विनम्रतापूर्वक अनुरोध किया जाता है कि कृपया हमारा इस्तीफा स्वीकार करें.’

हालांकि, पीसीसी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा कि ये नेता एक साल से अधिक समय से पार्टी की बैठकों में शामिल नहीं हो रहे थे और उनमें से एक करीब तीन महीने पहले कठुआ जिले में रजनी पाटिल के पार्टी कार्यक्रम में भी शामिल नहीं हुआ था.

उन्होंने कहा, ‘पार्टी आलाकमान ने उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू की थी. इन विद्रोही नेताओं ने कुछ छह महीने पहले भी पार्टी अध्यक्ष को इसी तरह का पत्र लिखा था. अब यह सोचकर कि पार्टी की गतिविधियों और कार्यक्रमों के प्रति उदासीनता दिखाने के लिए उनके खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है, उन्होंने उस पत्र को फिर से जनता में प्रसारित किया है.’

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)