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रोहिंग्याओं के समर्थन में पश्चिम बंगाल बाल अधिकार आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में दायर की याचिका

आयोग ने याचिका में शीर्ष अदालत से कहा कि पूरे रोहिंग्या समुदाय को आतंकवादी नहीं कहा जा सकता.

Rohingya in India Reuters

भारत में रोहिंग्या शरणार्थियों की एक बस्ती. (फोटो: रॉयटर्स)

नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल के बाल अधिकार आयोग ने रोहिग्या शरणार्थियों को वापस म्यांमार भेजने के केंद्र सरकार के आदेश के ख़िलाफ़ आज उच्चतम न्यायालय में यह कहते हुए याचिका दायर की कि इस समूचे समुदाय को आतंकवादी नहीं कहा जा सकता.

पश्चिम बंगाल राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने यह याचिका दायर की है जिसे न्यायालय ने केंद्र के आदेश को चुनौती देने वाली दो रोहिंग्या मुस्लिम शरणार्थियों की जनहित याचिका के साथ संलग्न करके तीन अक्टूबर के लिए सूचीबद्ध कर दिया.

आयोग की अध्यक्ष अनन्या चक्रवर्ती ने बताया कि शीर्ष अदालत की रजिस्ट्री ने उनकी याचिका स्वीकार कर ली है और इस पर भी पहले से ही निर्धारित तिथि पर सुनवाई होगी.

याचिका में केंद्र सरकार की उस अधिसूचना को चुनौती दी गई है जिसमें सभी रोहिंग्याओं की पहचान करके उन्हें म्यांमार भेजने का आदेश दिया गया है. बाल अधिकार संरक्षण आयोग का तर्क है कि रोहिंग्याओं को सुनियोजित तरीके से यातना दी जा रही है और मारा जा रहा है. आयोग का कहना है कि पूरे समुदाय को आतंकवादी क़रार नहीं दिया जा सकता.

याचिका के अनुसार संयुक्त राष्ट्र ने उन्हें दुनिया का सर्वाधिक उत्पीड़ित समुदाय बताया है.

इससे पहले, गृह मंत्रालय ने शीर्ष अदालत में दायर अपने हलफनामे में रोहिंग्याओं को गैरकानूनी शरणार्थी बताते हुए आरोप लगाया था कि इनमें से कुछ पाकिस्तानी ख़ुफिया एजेंसी आईएसआई के नापाक मंसूबों और आईएसआईएस जैसे आतंकी समूहों का हिस्सा थे.

हलफनामे में सरकार ने कहा है कि भारत में उनकी मौजूदगी राष्ट्र की सुरक्षा के लिए गंभीर ख़तरा है और देश के किसी भी हिस्से मे रहने और बसने का मौलिक अधिकार रोहिंग्याओं को नहीं बल्कि सिर्फ नागरिकों को प्राप्त हैं.

इतना ही नहीं गुरुवार को गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने भी कहा, रोहिंग्या समुदाय के लोग अवैध प्रवासी हैं. वे उचित प्रक्रिया का पालन करने के बाद यहां नहीं आए. वे भारत में शरण के लिए आवेदन करने वाले शरणार्थी नहीं हैं. सिंह ने कहा कि जब म्यांमार रोहिंग्या लोगों को वापस लेने के लिए तैयार है, तो कुछ लोग क्यों उन्हें वापस भेजे जाने पर आपत्ति जता रहे हैं.

म्यांमार के रखाइन प्रांत में 25 अगस्त को शुरू हुई हिंसा के बाद से अब तक चार लाख से ज्यादा रोहिंग्या समुदाय के लोग बांग्लादेश में पलायन कर चुके हैं.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)